Tuesday, January 27, 2026

बजट 2026 में सेक्शन 80C की सीमा ₹1.50 लाख से बढ़कर ₹3.50 लाख होने की उम्मीद, जिससे मिडिल क्लास को टैक्स बचत का मौका मिलेगा.

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 केंद्रीय बजट 2026 से पहले देश के करोड़ों टैक्सपेयर्स की निगाहें सरकार के उस फैसले पर टिकी हैं, जिसमें सेक्शन 80C के तहत टैक्स छूट की सीमा बढ़ाने की मांग लंबे समय से उठती रही है. मौजूदा समय में आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत टैक्स बचाने के लिए अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर ही छूट मिलती है. खास बात यह है कि यह सीमा बीते 10 वर्षों से जस की तस बनी हुई है, जबकि इस दौरान महंगाई और आम आदमी के खर्चों में काफी इजाफा हुआ है.

2014 के बाद से से नहीं बदली सीमा
वर्तमान व्यवस्था के तहत सेक्शन 80C का लाभ केवल उन्हीं टैक्सपेयर्स को मिलता है, जो ओल्ड टैक्स रिजीम को चुनते हैं. इसके अंतर्गत पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ELSS), जीवन बीमा प्रीमियम, नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (NSC), पोस्ट ऑफिस की विभिन्न सेविंग स्कीम और बच्चों की ट्यूशन फीस जैसे निवेश व खर्च शामिल हैं. हालांकि टैक्सपेयर्स का कहना है कि साल 2014 के बाद से 80C की लिमिट में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जबकि शिक्षा, स्वास्थ्य बीमा, रिटायरमेंट प्लानिंग और जीवन बीमा जैसे खर्च कई गुना बढ़ चुके हैं.

लिमिट बढ़ने से निवेश को मिलेगा बढ़ावा
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार बजट 2026 में सेक्शन 80C की सीमा को बढ़ाकर 3 लाख या 3.5 लाख रुपये करती है, तो इससे न केवल टैक्सपेयर्स को अतिरिक्त टैक्स राहत मिलेगी, बल्कि देश में लॉन्ग टर्म सेविंग और निवेश को भी मजबूती मिलेगी. ज्यादा निवेश से लोगों का रिटायरमेंट फंड मजबूत होगा और बीमा कवरेज का दायरा भी बढ़ेगा, जो मौजूदा समय में बेहद जरूरी हो चुका है.

उद्योग संगठनों की भी मांग
उद्योग संगठनों ने भी सरकार से इस दिशा में कदम उठाने की अपील की है. अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स इन इंडिया (AMCHAM) ने सुझाव दिया है कि जीवन बीमा प्रीमियम पर मिलने वाली टैक्स छूट को कम से कम 2.5 लाख रुपये तक बढ़ाया जाना चाहिए. संगठनों का तर्क है कि इससे बीमा को प्रोत्साहन मिलेगा और सामाजिक सुरक्षा का दायरा भी व्यापक होगा.

न्यू टैक्स रिजीम बनाम ओल्ड टैक्स रिजीम
पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने न्यू टैक्स रिजीम को ज्यादा आकर्षक बनाने के लिए स्लैब रेट्स में बदलाव जरूर किए हैं, लेकिन ओल्ड टैक्स रिजीम को चुनने वाले निवेशक खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं. उनकी सबसे बड़ी शिकायत यही है कि निवेश आधारित टैक्स छूट की लिमिट समय के साथ नहीं बढ़ाई गई.

1 फरवरी 2026 पर टिकी नजरें
महंगाई के दबाव और सीमित टैक्स सेविंग विकल्पों के बीच मिडिल क्लास लंबे समय से राहत की उम्मीद कर रहा है. अब सबकी नजरें 1 फरवरी 2026 पर टिकी हैं, जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण केंद्रीय बजट पेश करेंगी. अगर सरकार सेक्शन 80C की लिमिट बढ़ाने का फैसला करती है, तो यह न सिर्फ मिडिल क्लास के लिए बड़ी राहत होगी, बल्कि देश की सेविंग और निवेश संस्कृति को भी नई मजबूती देगी.

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