नई दिल्ली: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर एक बार फिर गैर-शुल्क बाधाओं का मुद्दा सामने आया है. थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने कहा है कि यदि यूरोपीय संघ ने भारतीय उत्पादों पर लगाए गए जटिल नियमों और प्रतिबंधों को नहीं हटाया, तो टैरिफ में छूट का लाभ भारतीय निर्यातकों को नहीं मिल पाएगा.
18 साल बाद अंतिम चरण में समझौता
भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत की शुरुआत वर्ष 2007 में हुई थी. करीब 18 वर्षों बाद यह समझौता अब अंतिम चरण में पहुंच गया है. इसकी औपचारिक घोषणा 27 जनवरी को होने की संभावना है. इसी दौरान यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन 25 से 27 जनवरी तक भारत के दौरे पर रहेंगे. वे 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि होंगे.
EU में भारतीय उत्पादों पर कड़े नियम
GTRI के अनुसार, यूरोपीय संघ में भारतीय उत्पादों को कई तरह की गैर-शुल्क बाधाओं का सामना करना पड़ता है. इनमें शामिल हैं—
- दवाओं की मंजूरी में लंबी देरी
- कृषि और खाद्य उत्पादों पर सख्त नियम
- परीक्षण, प्रमाणन और गुणवत्ता जांच की जटिल प्रक्रिया
कृषि निर्यात सबसे ज्यादा प्रभावित
EU द्वारा कीटनाशक अवशेषों की सीमा कम किए जाने से बासमती चावल, मसाले और चाय की कई खेप या तो खारिज हो जाती हैं या उन्हें अतिरिक्त जांच से गुजरना पड़ता है. वहीं, समुद्री उत्पादों पर एंटीबायोटिक को लेकर सख्त जांच की जाती है, जिससे निर्यातकों की लागत और समय दोनों बढ़ जाते हैं.
दवा और MSME सेक्टर पर बोझ
दवा क्षेत्र में यूरोपीय नियामक प्रक्रिया जटिल और समय-साध्य है. इसके अलावा, रसायनों से जुड़े REACH नियम और जलवायु संबंधी नए कानूनों से उत्पादन लागत बढ़ रही है. इसका सबसे ज्यादा असर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) पर पड़ रहा है, जिनके पास सीमित संसाधन होते हैं.
कार्बन टैक्स (CBAM) पर भारत की आपत्ति
EU ने 1 जनवरी से कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) लागू किया है. यह स्टील, एल्युमिनियम जैसे उत्पादों पर लागू होता है, जिनके उत्पादन में अधिक कार्बन उत्सर्जन होता है. GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि यह कर भारतीय MSME के लिए नुकसानदायक है. भारत चाहता है कि EU इस कर में छूट या विशेष प्रावधान दे, ताकि समझौता असंतुलित न हो.
सेवा क्षेत्र में भी अड़चन
EU द्वारा भारतीय सेवा कंपनियों से स्थानीय कार्यालय खोलने और पेशेवरों के लिए ऊंची सैलरी सीमा तय करने से आईटी और डिजिटल सेवाओं का निर्यात प्रभावित हो रहा है. भारत चाहता है कि उसे EU के GDPR नियमों के तहत ‘डेटा-सिक्योर देश’ का दर्जा मिले, जिससे डेटा ट्रांसफर आसान हो सके.
वीज़ा, निवेश और सरकारी खरीद पर मतभेद
भारत आसान बिजनेस वीज़ा, दोहरे सोशल सिक्योरिटी भुगतान से राहत और पेशेवर योग्यताओं की आपसी मान्यता की मांग कर रहा है. वहीं, EU भारत के लगभग 600 अरब डॉलर के सरकारी खरीद बाजार में अधिक पहुंच चाहता है.
GI और निवेश समझौते पर बातचीत जारी
EU शैम्पेन, रोकफोर्ट चीज और प्रोशुट्टो डी पार्मा जैसे उत्पादों के लिए भारत में स्वतः भौगोलिक संकेतक (GI) मान्यता चाहता है. भारत का कहना है कि इन्हें भी वही प्रक्रिया अपनानी होगी, जो भारतीय GI उत्पादों पर लागू होती है. निवेश के मामले में EU मजबूत सुरक्षा चाहता है, जबकि भारत अपने मॉडल द्विपक्षीय निवेश समझौते के तहत सीमित संरक्षण देने के पक्ष में है.
संतुलित समझौते पर भारत का जोर
GTRI का कहना है कि अगर गैर-शुल्क बाधाओं, कार्बन टैक्स और सेवा क्षेत्र की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो यह समझौता भारतीय हितों के लिए नुकसानदेह हो सकता है.


