उत्तरी डकोटा और मोंटाना राज्यों के सीनेटरों ने तर्क दिया कि भारत द्वारा लगाए गए ऊंचे शुल्क अमेरिकी किसानों को नुकसान पहुंचा रहे हैं.
अमेरिका के दो वरिष्ठ सांसदों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से अपील की है कि वे भारत के साथ होने वाले किसी भी भविष्य के व्यापार समझौते में अमेरिकी दाल उत्पादकों के लिए अनुकूल प्रावधान सुनिश्चित करें. सांसदों का कहना है कि भारत द्वारा लगाए गए ऊंचे टैरिफ के कारण अमेरिकी किसान गंभीर प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान झेल रहे हैं.
16 जनवरी को राष्ट्रपति ट्रंप को लिखे एक पत्र में रिपब्लिकन सीनेटर स्टीव डेंस (मोंटाना) और केविन क्रेमर (नॉर्थ डकोटा) ने यह मुद्दा उठाया. उन्होंने बताया कि मोंटाना और नॉर्थ डकोटा अमेरिका में दालों के सबसे बड़े उत्पादक राज्य हैं, जहां मटर, मसूर और चने जैसी फसलों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है. वहीं भारत दुनिया का सबसे बड़ा दाल उपभोक्ता देश है, जो वैश्विक खपत का करीब 27 प्रतिशत हिस्सा रखता है.
भारतीय टैरिफ से अमेरिकी किसानों को नुकसान
सांसदों ने पत्र में कहा कि भारत में मसूर, चना, सूखी फलियां और मटर जैसी दालें बड़े पैमाने पर खाई जाती हैं, इसके बावजूद भारत सरकार ने इन उत्पादों के आयात पर भारी शुल्क लगा रखा है. उन्होंने खासतौर पर पीली मटर (येलो पीज) पर लगाए गए टैरिफ का जिक्र किया.
पत्र के अनुसार, भारत ने 30 अक्टूबर 2025 को पीली मटर पर 30 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, जो 1 नवंबर 2025 से लागू हो गया. सांसदों का कहना है कि इन ऊंचे शुल्कों के कारण अमेरिकी दाल उत्पादकों को भारतीय बाजार में अपने उत्पाद बेचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
भारत-अमेरिका सहयोग दोनों के लिए फायदेमंद
सीनेटर डेंस और क्रेमर ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बातचीत में दालों पर टैरिफ का मुद्दा उठाया जाता है, तो इससे भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक सहयोग मजबूत हो सकता है. उनका मानना है कि टैरिफ में राहत मिलने से जहां अमेरिकी किसानों को बड़ा बाजार मिलेगा, वहीं भारतीय उपभोक्ताओं को भी उच्च गुणवत्ता वाली दालें उचित दाम पर उपलब्ध हो सकेंगी.
ट्रंप के पहले कार्यकाल का जिक्र
सांसदों ने राष्ट्रपति ट्रंप के पहले कार्यकाल को भी याद किया. उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 में भारत के साथ व्यापार वार्ता से पहले उन्होंने यही मुद्दा उठाया था. उस समय राष्ट्रपति ट्रंप ने उनका पत्र खुद प्रधानमंत्री मोदी को सौंपा था, जिससे अमेरिकी दाल उत्पादकों को बातचीत की प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर मिला.
किसानों के लिए बेहतर व्यापार माहौल की मांग
पत्र में अमेरिकी सांसदों ने कहा कि अमेरिका व्यापार असंतुलन को दूर करने की दिशा में काम कर रहा है और इस प्रक्रिया में अमेरिकी किसान अहम भूमिका निभा सकते हैं. उन्होंने लिखा कि अमेरिकी किसानों में दुनिया को खाद्य आपूर्ति करने की पूरी क्षमता है, बशर्ते उन्हें बेहतर व्यापार अवसर दिए जाएं.
गौरतलब है कि 2019 में भारत को जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेज (GSP) से बाहर किए जाने के बाद भारतीय टैरिफ और बढ़ गए थे, जिससे अमेरिकी कृषि निर्यात को और नुकसान हुआ. अब एक बार फिर यह मुद्दा भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के केंद्र में आता दिख रहा है.


