मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘समृद्धि यात्रा’ शुक्रवार को बेतिया, पश्चिमी चंपारण से शुरू हो रही है। इस यात्रा में मुख्यमंत्री प्रगति यात्रा और सात निश्चय से संबंधित योजनाओं का निरीक्षण, शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे। वे जनसंवाद भी करेंगे और जिले की समीक्षा बैठक लेंगे। यात्रा का पहला चरण 16 से 24 जनवरी तक चलेगा, जिसमें पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर, गोपालगंज, सिवान, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली जैसे जिले शामिल हैं।
पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा शुक्रवार को बेतिया (पश्चिमी चंपारण) से शुरू हो रही है। यात्रा के क्रम में मुख्यमंत्री प्रगति यात्रा एवं सात निश्चय से संबंधित योजनाओं तथा जिले की अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं का स्थल निरीक्षण करेंगे। जिले की महत्वपूर्ण परियोजनाओं का शिलान्यास, उद्घाटन एवं कार्यारंभ के बाद वे जनसंवाद करेंगे।
कार्यक्रम के अंत में जिले की समीक्षा बैठक होगी। मुख्यमंत्री शुक्रवार को हेलीकॉप्टर से पटना से रवाना होंगे। 11.30 बजे कुमारबाग औद्योगिक प्रक्षेत्र स्थित हेलीपैड पर लैंड करेंगे। बेतिया से 1.15 बजे वे पटना के लिए हेलीकॉप्टर से प्रस्थान करेंगे। पहले चरण की समृद्धि यात्रा 16 से 24 जनवरी तक होगी। शनिवार को पूर्वी चंपारण की यात्रा होगी। रविवार को वे पटना में रहेंगे
सोमवार को सीतामढ़ी एवं शिवहर, मंगलवार को गोपालगंज, बुधवार को सिवान, गुरुवार को सारण, शुक्रवार को मुजफ्फरपुर एवं शनिवार को वैशाली में यात्रा का कार्यक्रम है। मुख्यमंत्री की समृद्धि यात्रा को लेकर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सरकार के विभागीय प्रधानों के अलावा जिलों में तैनात विभिन्न अधिकारियों के नाम निर्देश जारी किया है।
जिलाधिकारियों को जिला स्तर पर इस कार्यक्रम के समन्चय की जिम्मेवारी दी गई है। समीक्षा बैठक में मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक एवं संबंधित विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव एवं सचिव उपस्थित रहेंगे। समीक्षा में सबसे पहले पिछली प्रगति यात्रा के दौरान घोषित की गई योजनाओं के कार्यान्वयन की स्थिति पर चर्चा होगी।
430 योजनाओं की हुई थी घोषणा
2024 के दिसंबर में शुरू होकर जनवरी 2025 की मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रगति यात्रा के दौरान कुल 430 योजना की घोषणा हुई थी। इनमें से 428 को मंजूरी मिली। मुख्यमंत्री ने 10 दिसंबर को स्वयं इन योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की थी।
बताया गया कि दो योजनाएं तकनीकी रूप से उपयुक्त न होने के कारण नामंजूर की गई। ये योजनाएं राज्य सरकार के 22 विभागों से जुड़ी हैं और इनके लिए 50 हजार करोड़ रुपये का वित्तीय प्रविधान किया गया है। महीने भर पहले तक इनमें से दो दर्जन से अधिक योजनां पूरी हो गई थीं।


