Thursday, January 15, 2026

पटना हाईकोर्ट ने आरा सिविल कोर्ट बम ब्लास्ट मामले में एक ऐतिहासिक न्यायिक पहल की.

Share

पटना हाईकोर्ट ने आरा सिविल कोर्ट बम ब्लास्ट मामले में एक ऐतिहासिक न्यायिक पहल की है। मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू की खंडपीठ ने सभी दोषियों को वर्चुअल माध्यम से सुनवाई में उपस्थित रहने का निर्देश दिया। मृत्युदंड पाए लंबू शर्मा को भी ऑनलाइन पेश किया गया। इसे न्यायिक निष्पक्षता और पारदर्शिता में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

पटना। आरा सिविल कोर्ट बम ब्लास्ट कांड में डेथ रेफरेंस और आपराधिक अपीलों की सुनवाई के साथ ही पटना हाईकोर्ट में एक ऐतिहासिक न्यायिक पहल सामने आई है।

हाईकोर्ट के इतिहास में पहली बार मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू और राजीव रंजन प्रसाद की खंडपीठ की पहल पर यह निर्देश दिया गया कि सभी दोषियों को वर्चुअल माध्यम से सुनवाई में उपस्थित रखा जाए, ताकि वे सीधे अदालती कार्यवाही से जुड़ सकें। इसे विधि विशेषज्ञ न्यायिक निष्पक्षता और पारदर्शिता में एक महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं।

वर्ष 2015 के इस बहुचर्चित मामले में कुल 11 अभियुक्तों पर मुकदमा चला, जिनमें विजय शर्मा, संजय सोनार और नरेंद्र कुमार को बरी किया गया। 

शेष सात अभियुक्त दोषी ठहराए गए, जिनमें लंबू शर्मा को मृत्युदंड तथा श्याम विनय शर्मा, रिंकू यादव, चांद मियां, अंशु कुमार, अखिलेश उपाध्याय और नईम मियां को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। अभियुक्त प्रमोद सिंह की मृत्यु हो गई है ।

इन्हीं सजाओं की वैधानिक समीक्षा अब हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच कर रही है, जहां पीठ ने स्पष्ट किया है कि यह सुनवाई केवल दंड की पुष्टि तक सीमित नहीं होगी, बल्कि न्यायिक विवेक और संवैधानिक संतुलन की अंतिम कसौटी पर पूरे मामले को परखा जाएगा।

सुनवाई के दौरान अदालत के निर्देश पर जमुई जेल अधीक्षक वर्चुअल माध्यम से उपस्थित हुए और मृत्युदंड से दंडित दोषी लंबू शर्मा को भी ऑनलाइन पेश किया गया। 

उसेजिसे अवगत कराया गया कि डेथ रेफरेंस में उसकी ओर से अधिवक्ता प्रतीक मिश्रा को कोर्ट मित्र नियुक्त किया गया है; अभियुक्त ने इस व्यवस्था पर कोई आपत्ति नहीं जताई।

पीठ ने यह पाते हुए कि अन्य दोषी अलग-अलग जेलों में निरुद्ध हैं, राज्य सरकार को सख्त निर्देश दिया कि अगली सुनवाई में सभी दोषियों की वर्चुअल उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।

यह भी आदेश दिया कि प्रत्येक दोषी के साथ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पैनल से एक अधिवक्ता मौजूद रहेंगे , जो उन्हें अदालती कार्यवाही और कानूनी स्थिति को समुचित रूप से समझाएंगे। इस प्रकरण में हाईकोर्ट में सुनवाई आगे भी जारी रहेगी।

Read more

Local News