Wednesday, March 18, 2026

भारतीय पासपोर्ट अब 80वें स्थान पर पहुंच गया है.

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नई दिल्ली: भारतीय यात्रियों के लिए एक सकारात्मक खबर सामने आई है. लंदन स्थित वैश्विक कंसल्टेंसी फर्म हेनले एंड पार्टनर्स द्वारा जारी हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2026 में भारतीय पासपोर्ट ने उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है. इस नई रैंकिंग में भारत 5 पायदान ऊपर चढ़कर 80वें स्थान पर पहुंच गया है. वर्ष 2025 में भारत की रैंकिंग 85वीं थी. इस सुधार के साथ ही अब भारतीय नागरिक 55 देशों में बिना वीजा या वीजा-ऑन-अराइवल की सुविधा के साथ यात्रा कर सकते हैं.

यह बदलाव न केवल भारतीय यात्रियों के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा को आसान बनाता है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती साख और कूटनीतिक प्रभाव को भी दर्शाता है. वीजा फ्री या वीजा-ऑन-अराइवल सुविधा का मतलब है कि यात्रियों को लंबी कागजी प्रक्रिया, समय और अतिरिक्त खर्च से राहत मिलती है, जिससे पर्यटन, व्यापार और लोगों के आपसी संपर्क को बढ़ावा मिलता है.

एशियाई देशों का दबदबा, सिंगापुर फिर नंबर 1
हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2026 में एशियाई देशों का दबदबा एक बार फिर देखने को मिला है. सिंगापुर लगातार तीसरे वर्ष दुनिया का सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट बना हुआ है, जिसके नागरिक 192 देशों में वीजा-मुक्त प्रवेश कर सकते हैं. जापान और दक्षिण कोरिया संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर हैं. यह रैंकिंग इस बात का संकेत है कि मजबूत अर्थव्यवस्था, राजनीतिक स्थिरता और सक्रिय कूटनीति किसी देश के पासपोर्ट की ताकत को कैसे बढ़ाती है.

इन देशों में भारतीयों को मिलती है वीजा फ्री एंट्री
भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए कई लोकप्रिय पर्यटन स्थलों के दरवाजे अब और आसान हो गए हैं.

  • एशिया में भूटान, नेपाल, थाईलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया, मालदीव और श्रीलंका.
  • मध्य पूर्व में कतर (वीजा-ऑन-अराइवल) और ईरान.
  • अफ्रीका में मॉरीशस, सेशेल्स, केन्या और तंजानिया.
  • कैरिबियन व अन्य क्षेत्र में जमैका, फिजी, बारबाडोस और अल साल्वाडोर जैसे देश शामिल हैं.

रैंकिंग में सुधार का क्या है मतलब
हेनले एंड पार्टनर्स के चेयरमैन क्रिश्चियन एच. केलिन के अनुसार, किसी देश के पासपोर्ट की ताकत उसकी राजनीतिक स्थिरता, कूटनीतिक भरोसे और आर्थिक प्रभाव को दर्शाती है. भारत की रैंकिंग में हुआ यह सुधार वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती स्वीकार्यता और मजबूत होते अंतरराष्ट्रीय संबंधों का संकेत है. हालांकि, शीर्ष देशों की तुलना में भारत को अभी लंबा सफर तय करना है, जिसके लिए और अधिक द्विपक्षीय वीजा समझौतों की आवश्यकता होगी.

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