Saturday, May 2, 2026

बिहार में महिलाओं के लिए प्रोफेशनल ड्राइविंग ट्रेनिंग की व्यवस्था की जा रही है।

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बिहार में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केरल मॉडल पर आधारित प्रोफेशनल ड्राइविंग ट्रेनिंग शुरू की जा रही है। इस योजना के तहत नालंदा, सुपौल, मोतिहारी और बांका में विशेष केंद्र खुलेंगे, जहाँ 6000 महिलाओं को ट्रक, बस, टैक्सी आदि चलाने का प्रशिक्षण मिलेगा। केंद्र सरकार की सहायता से 68 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह पहल महिलाओं को परिवहन क्षेत्र में रोजगार के अवसर प्रदान कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाएगी

पटना। बिहार में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ी पहल की जा रही है। राज्य में पहली बार केरल मॉडल पर महिलाओं के लिए प्रोफेशनल ड्राइविंग ट्रेनिंग की व्यवस्था की जा रही है। इस योजना के तहत कुल 6 हजार महिलाओं को प्रोफेशनल ड्राइवर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके लिए नालंदा, सुपौल, मोतिहारी और बांका जिले में विशेष ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट खोले जाएंगे।

यह योजना केंद्र सरकार की सहायता से संचालित की जाएगी, जिसमें चारों केंद्रों पर करीब 68 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इन प्रशिक्षण केंद्रों में महिलाओं को ट्रक, बस, टैक्सी, टेंपो और बाइक चलाने की प्रोफेशनल ट्रेनिंग दी जाएगी।

खास बात यह है कि यहां ऑटोमैटिक ड्राइविंग टेस्टिंग ट्रैक का भी निर्माण होगा, जहां प्रशिक्षित महिलाएं तकनीकी दक्षता के आधार पर ड्राइविंग टेस्ट देंगी और सफल होने पर उन्हें लाइसेंस एवं प्रोफेशनल सर्टिफिकेट प्रदान किया जाएगा।

योजना के तहत हर वर्ष लगभग 1,500 महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस तरह चार वर्षों में कुल 6 हजार महिलाओं को प्रोफेशनल ड्राइविंग का प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार योग्य बनाया जाएगा।

प्रशिक्षण पूरी तरह व्यवस्थित और सुरक्षित माहौल में होगा, जहां अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक सभी महिलाएं होंगी। इससे प्रशिक्षण ले रही महिलाओं को न सिर्फ सहज माहौल मिलेगा, बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।

सरकार का मानना है कि ड्राइविंग के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से परिवहन सेक्टर में नई संभावनाएं खुलेंगी।

वर्तमान में यह क्षेत्र पुरुष-प्रधान माना जाता है, लेकिन इस पहल से महिलाओं को बस, टैक्सी और अन्य व्यावसायिक वाहनों के संचालन में सीधा अवसर मिलेगा। इससे वे सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में रोजगार प्राप्त कर सकेंगी।

इन प्रशिक्षण केंद्रों में केवल वाहन चलाना ही नहीं, बल्कि ट्रैफिक नियम, सड़क सुरक्षा, वाहन रखरखाव और आपात स्थिति से निपटने की भी जानकारी दी जाएगी।

इसके अलावा महिलाओं को डिजिटल सिस्टम, जीपीएस और आधुनिक वाहन तकनीक से भी परिचित कराया जाएगा, ताकि वे समय के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकें।

सरकार का उद्देश्य इस योजना के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और उन्हें सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराना है।

खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों की महिलाओं के लिए यह योजना नए अवसरों का द्वार खोलने वाली मानी जा रही है। आने वाले समय में यह पहल बिहार में महिला सशक्तिकरण की एक मिसाल बन सकती है।

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