मुंबई: भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक मंगलवार को मिलेजुले रुख के साथ बंद हुए. जहां सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) शेयरों में कमजोरी ने बाजार पर दबाव बनाए रखा, वहीं वित्तीय, एफएमसीजी और मेटल शेयरों में खरीदारी से गिरावट काफी हद तक संभली रही. इसके अलावा निफ्टी डेरिवेटिव्स की साप्ताहिक एक्सपायरी के चलते निवेशकों का रुख भी सतर्क बना रहा.
बीएसई सेंसेक्स ने लगातार दो सत्रों की तेजी पर विराम लगाते हुए दिन का कारोबार मामूली गिरावट के साथ समाप्त किया. सेंसेक्स 0.05 प्रतिशत फिसलकर 85,524.84 अंक पर बंद हुआ. दूसरी ओर, एनएसई निफ्टी ने लगातार तीसरे सत्र में बढ़त दर्ज की और 0.02 प्रतिशत यानी 4.75 अंक की मामूली मजबूती के साथ 26,177.15 के स्तर पर बंद हुआ.
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार तकनीकी दृष्टिकोण से निफ्टी 26,000–26,100 के अहम सपोर्ट जोन से ऊपर बना हुआ है, जो फिलहाल एक मजबूत आधार के रूप में काम कर रहा है. जानकारों का मानना है कि यदि निफ्टी इस स्तर के ऊपर टिके रहने में सफल रहता है, तो अल्पकालिक रुझान सकारात्मक बना रह सकता है.
बीएसई पर आईटीसी, अल्ट्राटेक सीमेंट और टाटा स्टील दिन के प्रमुख लाभ में रहने वाले शेयरों में शामिल रहे. एफएमसीजी और मेटल शेयरों में खरीदारी का अच्छा रुझान देखने को मिला. वहीं दूसरी ओर, आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनियां जैसे इंफोसिस और टेक महिंद्रा के साथ-साथ भारती एयरटेल के शेयरों में बिकवाली रही, जिससे बाजार पर दबाव पड़ा.
एनएसई पर भी मिलाजुला रुझान देखने को मिला. कोल इंडिया, श्रीराम फाइनेंस और आईटीसी शीर्ष बढ़त वाले शेयरों में रहे, जबकि इंफोसिस और भारती एयरटेल में कमजोरी ने निफ्टी की तेजी को सीमित कर दिया.
ब्रॉडर मार्केट की बात करें तो इसमें भी मिला-जुला रुख रहा. निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 0.37 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ, जिससे छोटे शेयरों में चुनिंदा खरीदारी का संकेत मिला. वहीं निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स लगभग सपाट बंद हुआ.
सेक्टोरल स्तर पर आईटी इंडेक्स सबसे कमजोर रहा और इसमें 0.80 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. इसके विपरीत मीडिया इंडेक्स में 0.84 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली और यह दिन का सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा. मेटल, मीडिया और एफएमसीजी शेयरों में मजबूती ने बाजार में गिरावट को सीमित रखने में मदद की.
इस बीच, भारतीय रुपया लगातार दूसरे सत्र में डॉलर के मुकाबले सपाट बंद हुआ. विशेषज्ञों के मुताबिक साल के अंत में होने वाले पोर्टफोलियो री-बैलेंसिंग के चलते रुपये में उतार-चढ़ाव सीमित रहा. बाजार जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में डॉलर-रुपया जोड़ी 89.10 से 90.30 के दायरे में कंसोलिडेशन में रह सकती है.


