नई दिल्ली: IndiGo एयरलाइन संकट ने हाल ही में यात्रियों और निवेशकों दोनों के लिए मुश्किलें बढ़ा दी हैं. पिछले पांच दिनों में इंडिगो की सैकड़ों उड़ानें रद्द हो चुकी हैं और कई उड़ानों को रिस्केड्यूल करना पड़ा. इस कारण यात्रियों को अपने सफर में बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. लोग समय पर अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रहे हैं और एयरलाइन की लगातार देरी से उनकी परेशानियां बढ़ रही हैं.
शेयर बाजार में भारी गिरावट
इंडिगो की पैरेंट कंपनी इंटरग्लोबल एविएशन लिमिटेड (InterGlobe Aviation Ltd) के शेयरों में भी बुरी तरह गिरावट आई है. बीते पांच कारोबारी दिनों में इस शेयर में 8.76% की कमी आई है. निवेशकों को हर शेयर पर औसतन 515.50 रुपये का नुकसान हुआ है. जबकि पिछले छह महीनों में इस शेयर की गिरावट केवल 5.75% रही थी. इस अचानक बड़ी गिरावट से कंपनी का मार्केट कैप भी घटकर 2.08 लाख करोड़ रुपये रह गया है.
DGCA ने एयरलाइन को नोटिस जारी किया
विमानन नियामक DGCA ने इंडिगो के CEO पीटर एल्बर्स और अकाउंटेबल मैनेजर इसिड्रो पोर्केरास को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. DGCA ने कहा कि बड़े पैमाने पर उड़ानों की देरी और रद्दीकरण एयरलाइन की योजना, निगरानी और संसाधन प्रबंधन में गंभीर चूक को दर्शाता है. नियामक ने एयरलाइन से 24 घंटे के भीतर जवाब देने को कहा है.
पायलट घंटों में बदलाव संकट का मुख्य कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, संकट के पीछे पायलटों के उड़ान घंटे कम होने का नियम मुख्य कारण है. पहले पायलटों को सप्ताह में 36 घंटे आराम मिलता था, जिसे अब बढ़ाकर 48 घंटे कर दिया गया है. इसका सीधा असर यह हुआ कि पायलट कम समय के लिए उपलब्ध हैं और सभी विमानों को उड़ाने के लिए पर्याप्त पायलट नहीं हैं. एयरएशिया के पूर्व CFO विजय गोपालन के अनुसार, जब तक एयरलाइन पायलटों की संख्या नहीं बढ़ाती, परिचालन में सुधार मुश्किल है.
यात्रियों और निवेशकों पर दोहरी मार
सामान्य यात्रियों के लिए यह समय बहुत कठिन है. कई लोग अपने सफर की योजनाओं में बदलाव करने को मजबूर हैं. वहीं निवेशकों को भी शेयर बाजार में भारी नुकसान उठाना पड़ा है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर एयरलाइन पायलटों की संख्या बढ़ाकर संचालन सुधार नहीं करती, तो संकट लंबी अवधि तक बना रह सकता है.


