रांची: नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ, में सोमवार को ‘उभरते तंबाकू एवं निकोटिन उत्पादों से सुरक्षा: चुनौतियां एवं आगे की राह’ विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की. उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने और जागरूकता फैलाने का आह्वान करते हुए कहा कि ‘देश की युवा शक्ति को नशे की जद से बाहर रखना हमारी जिम्मेदारी है, जब तक कानून का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं होगा, तब तक बदलाव संभव नहीं है.
‘सेमिनार का उद्देश्य युवाओं में तंबाकू और निकोटिन उत्पादों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अधिनियम 2019 के सख्त अनुपालन को प्रोत्साहित करना था. स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा, ‘देश की युवा शक्ति को नशे की जद से बाहर रखना हमारी जिम्मेदारी है. यहां बैठे युवा कल के वकील और जज हैं. समाज आपको उम्मीद के साथ देखता है. नशे की लत में सैकड़ों जाने जा रही हैं, इसलिए विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका तीनों के समन्वित प्रयास बेहद जरूरी हैं’. उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि सशक्त कानून तभी असरदार होते हैं, जब उनका ईमानदारी से पालन और क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए.
- स्वास्थ्य मंत्रालय के उप महानिदेशक एवं निदेशक डॉ. एल. स्वस्तिचरण ने निकोटिन उत्पादों के नियमन संबंधी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की. कार्यक्रम में CTFK की उपाध्यक्ष वंदना शाह ने निकोटिन पाउच पर वैश्विक नीतियों का प्रस्तुतिकरण किया, जबकि WHO के प्रवीण सिन्हा ने निकोटिन उत्पादों के स्वास्थ्य जोखिमों को रेखांकित किया.
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता रंजीत सिंह ने ई-सिगरेट निषेध कानून के प्रभावी प्रवर्तन पर व्यावहारिक सुझाव साझा किए. NUSRL और स्वास्थ्य विभाग ने यह संकल्प लिया है कि निकोटिन और तंबाकू मुक्त समाज के निर्माण के लिए कानूनी, शैक्षिक और सामाजिक स्तर पर संयुक्त अभियान चलाया जाएगा.



