Wednesday, March 25, 2026

बिहारशरीफ में सौ साल पुरानी धर्मशाला ‘श्री बिहार धर्मशाला’ का जीर्णोद्धार किया जाएगा।

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बिहारशरीफ में सौ साल पुरानी धर्मशाला ‘श्री बिहार धर्मशाला’ का जीर्णोद्धार किया जाएगा। इस धर्मशाला में लगभग सौ कमरे हैं और यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। नवीनीकरण से यात्रियों और पर्यटकों को बेहतर आवास मिलेगा, जिससे बिहारशरीफ में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

बिहारशरीफ। शहर की ऐतिहासिक धरोहर श्री बिहार धर्मशाला का अब आधुनिक स्वरूप में पुनर्निर्माण होने जा रहा है। भरावपर स्थित यह धर्मशाला, जिसे लेकर अलग-अलग वर्ष बताए जाते रहे हैं, उसके निर्माण का सही वर्ष 1925 बताया गया है।

Shree Bihar Dharamshala के सचिव मृत्युंजय नाथ गोपाल के अनुसार, उसी दौरान यहां बीबी लाइट रेलवे लाइन और प्रमुख सरकारी बस स्टैंड भी मौजूद थे। पुरानी धर्मशाला में कुल 19 कमरे थे और यह 47 डिसमिल में फैली हुई थी। कानूनी विवाद की वजह से इनमें से अलग 10 डिसमिल भूमि पर अभी पेंच फंसा हुआ है।

उस दौर में बाहर से रोजगार के लिए आने वाले लोग महीनेभर सिर्फ 10 रुपये में यहां ठहर जाते थे। बाद के वर्षों में किराया बढ़कर 125 रुपये प्रति माह तक पहुंचा।

आधुनिक रूप में तैयार होगी धरोहर

भवन निर्माण से जुड़ी आपत्तियों के बाद पुरानी धर्मशाला को खाली करा दिया गया था। धार्मिक न्यास के अधीन होने के कारण इसके पदेन अध्यक्ष एसडीओ हैं, जिनकी अध्यक्षता में जी-4 श्रेणी का प्रपोजल भेजा गया है।

स्वीकृति मिलते ही अगले वर्ष भूमि पूजन की संभावना जताई गई है। न्यास के अध्यक्ष रणवीर नंदन ने भरोसा दिलाया है कि इस ऐतिहासिक धरोहर को नए स्वरूप में संवारने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

नए नक्शे में शामिल होंगे ये बड़े बदलाव

सचिव श्री गोपाल ने बताया कि कुल 100 कमरों का विशाल परिसर, ग्राउंड और फर्स्ट फ्लोर पर लगभग 50 दुकानें, सेकंड फ्लोर पर ठहरने के लिए 50 कमरे, थर्ड फ्लोर पर आधुनिक मैरिज हॉल और चौथी मंजिल पर पुस्तकालय और योगा हाल का निर्माण होगा। 

निर्माण पर अनुमानित खर्च: लगभग 5 करोड़ रुपये

किराया तय नहीं हुआ है, लेकिन समिति ने निर्णय लिया है कि जरूरतमंदों, मरीजों और साधु-संतों के लिए मुफ्त आवास और छात्रों के लिए रियायती दर पर कमरा उपलब्ध कराया जाएगा। इसमें कुल पांच करोड़ का खर्च आएगा।

सचिव ने आशा व्यक्त की है कि भरावपर की यह ऐतिहासिक धरोहर अब आधुनिकता और परंपरा के संगम के रूप में फिर से जीवंत होने जा रही है।

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