भारत सरकार की केंद्रीय टीम ने झारखंड में चल रहे टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा की.
रांची: केंद्रीय यक्ष्मा (टीबी) प्रभाग, भारत सरकार की 12 सदस्यीय टीम ने झारखंड में चल रहे टीबी टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की समीक्षा की. बता दें कि 25 से 27 नवंबर 2025 तक झारखंड के गुमला और रामगढ़ जिला में टीबी उन्मूलन कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं.
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देश पर हो रहे इस समीक्षा टीम का नेतृत्व डॉ. भवानी सिंह कुठियाला कर रहे हैं. समीक्षा के दौरान टीम ने गुमला और रामगढ में चल रहे टीबी उन्मूलन कार्यक्रम की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया. इस निक्षय पोषण योजना, संभावित टीबी रोगियों (Presumptive TB) रोगियों के पहचान के लिए चल रहे कार्यक्रमों, निक्षय मित्र अभियान और टीबी नोटिफिकेशन के लिए उठाये गए कदमों की सराहना की.
केंद्रीय टीम ने प्रदेश के दोनों जिलों का भ्रमण करने के बाद वहां के उपायुक्तों के सामने टीबी उन्मूलन के लिए उनके जिलों में चल रहे कार्यक्रम से जुड़ा प्रजेंटेशन भी दिया. गुमला और रामगढ़ दोनों जिलों के अधिकारियों ने टीम के समक्ष टीबी उन्मूलन की स्थिति, स्वास्थ्य संरचनाओं, तथा चल रहे कार्यक्रमों की उपलब्धियों से संबंधित विस्तृत प्रस्तुति दी. टीम ने प्रशासनिक और स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ बैठक कर जमीनी स्तर की चुनौतियों और समाधान पर भी चर्चा की.
टीबी उन्मूलन कार्यक्रमों की समीक्षा करने आई केंद्रीय टीम ने आज राज्य के स्वास्थ्य निदेशक-प्रमुख, स्वास्थ्य सेवाओं एवं सभी जिला यक्ष्मा पदाधिकारियों के साथ बैठक की और कई अहम निर्देश दिए. टीम ने कहा कि टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत चिह्नित जिलों में जोखिम वाले ग्रुप (Vulnerable Group) की Screening में तेजी लायी जाए. इसके साथ साथ टीबी उन्मूलन अभियान में जनभागीदारी और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ाने और इसे मजबूत बनाने के निर्देश दिए.
केंद्रीय टीम ने कहा कि सभी ज़िलों में टीबी उन्मूलन से जुड़े कार्यों की गति को बढ़ाते हुए एक्स-रे और मैपिंग को प्राथमिकता दें.
स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने बैठक के दौरान टीबी उन्मूलन के लिए उठाए गए कदमों की प्रगति का अद्यतन मूल्यांकन किया. इस दौरान उन्होंने जोखिम वाले समूहों की मैपिंग और त्वरित गति से कार्रवाई करने का निर्देश दिया.
केंद्रीय टीम के सुझावों के आधार पर राज्य के टीबी रोग पदाधिकारी डॉ. कमलेश कुमार को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए. अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य ने कहा कि अभियान को जनभागीदारी से और मज़बूत किया जाएगा. नेट टेस्टिंग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. उन्होंने बताया कि दिसंबर से राज्य के सभी पंचायतों में टी बी फोरम गठन किया जाएगा और पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने हेतु जनसहभागिता बढ़ाई जाएगी.
भारत सरकार की केंद्रीय टीम में वरिष्ठ विशेषज्ञों में डॉ. उमा शंकर, डॉ. भावना बदेरे, डॉ. सुवन पांडेय, डॉ. रेहाना बेगम,
डॉ. मिंतू, डॉ. गंगाधर दास, डॉ. मट्टू, अमित श्रीवास्तव, राहुल शर्मा एवं सुमित कुमार शामिल रहे.


