Wednesday, January 28, 2026

भारतीय टीम का टेस्ट क्रिकेट में प्रदर्शन लगातार गिरता जा रहा है….

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भारतीय क्रिकेट टीम को टेस्ट क्रिकेट के इतिहास की मजबूत टीमों में एक माना जाता है. टीम इंडिया ने एक समय पर टेस्ट क्रिकेट पर राज किया है. भारत अपने घर में हमेशा किसी भी मजबूत टीम के लिए एक कड़ा विरोधी साबित हुआ और उसे बराबरी की टक्कर दी. इंडियन क्रिकेट टीम को उनके घर में आकर हराना एक समय पर दांतों तले चने चबाने जैसा था, लेकिन अब कोई भी टीम भारत को आकर घर में हराने की हिम्मत रख सकती है. क्योंकि बीती कुछ सीरीज में भारत को घर पर न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका से टेस्ट क्रिकेट में क्लीन स्वीप झेलना पड़ा है.

टीम इंडिया का टेस्ट क्रिकेट में पतन होता हुआ नजर आ रहा है. इससे बचने के लिए बीसीसीआई और चयनकर्ताओं को कुछ सख्त कदम उठाने होंगे. उसमें ऐसे चुनिंदा खिलाड़ियों की खोज घरेलू क्रिकेट से करनी होगी, जो टेस्ट क्रिकेट के स्पेशलिस्ट हों, जैसे पिछले दौर में राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण, अनिल कुंबले और हरभजन सिंह रह चुके हैं.

राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण ने लंबे समय तक सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली जैसे दिग्गज बल्लेबाजों के साथ मिलकर भारतीय बल्लेबाजी क्रम को संभाला था. तो अनिल कुंबले और हरभजन सिंह ने भारतीय स्पिन को हमेशा धारदार बनाए रखा था. इन सबकी विरासत को चेतेश्वर पुजारा, अजिंक्य रहाणे, विराट कोहली रविचंद्रन अश्विन जैसे स्टार खिलाड़ियों ने आगे बढ़ाया.

लेकिन अब आने वाली क्रिकेट पीढ़ी को देखकर उनकी विरासत को खतरा लगता है. अब टी20 क्रिकेट ने विशाल रूप ले लिया है. ऐसे में भारत की मौजूदा टेस्ट टीम में वाशिंगटन सुंदर, रविंद्र जडेजा, अक्षर पटेल, नीतीश कुमार रेड्डी जैसे ऑलराउंडर की भरमार है. वहीं बल्लेबाजी में साई सुदर्शन, देवदत्त पडिक्कल और ध्रुव जुरेल जैसे बल्लेबाज शामिल हैं, जो रेड बॉल क्रिकेट में खुद को साबित नहीं कर पाए हैं.

भारतीय टेस्ट क्रिकेट टीम

इस टीम को देखकर भारतीय क्रिकेट फैंस के मन में कई सवाल उठ रहे हैं. इसमें से एक सवाल है भारतीय क्रिकेट टीम का टेस्ट में भविष्य क्या होगा. अब इस सवाल का जवाब चयनकर्ताओं और बीसीसीआई को ढूंढना होगा. क्योंकि गौतम गंभीर की कोचिंग में भारतीय टीम टेस्ट क्रिकेट का सबसे खराब दौर देख रही है. गंभीर ने अब तक बांग्लादेश और वेस्टइंडीज से घरेलू सीरीज जीती हैं. उन्होंने न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका से व्हाइटवॉश झेला है, जबकि ऑस्ट्रेलिया ने भी उन्हें मात दी थी. इंग्लैंड के साथ गंभीर सीरीज ड्रॉ करने में कामयाब रहे थे

अब सवाल आता है कि क्या ऐसा किया जाए, जिससे भारतीय टेस्ट क्रिकेट का भविष्य सुरक्षित रखा जाए. ऐसे में बीसीसीआई और चयनकर्ताओं पर बड़ी जिम्मेदारी आ जाती है. बीसीसीआई को भारत के घरेलू रेड बॉल क्रिकेट टूर्नामेंट रणजी ट्रॉफी में कोच से लेकर स्टाफ तक और खेल के उपकरणों तक, अधिक एडवांस सुविधाएं देनी चाहिए, जिससे हर राज्य के खिलाड़ी और बेहतर तरीके से रेड बॉल क्रिकेट के लिए खुद को तैयार कर पाएं और प्रदर्शन कर पाएं.

इसके साथ ही चयनकर्ताओं को टेस्ट के स्पेशलिस्ट खिलाड़ियों का एक पूल बनाना होगा, जिसमें से ही टेस्ट क्रिकेट के लिए खिलाड़ियों को चुना जाना चाहिए, न कि व्हाइट बॉल क्रिकेट के तर्ज पर प्लेयर्स को रेड बॉल क्रिकेट में मौका देना चाहिए. भारत अपने ज्यादा से ज्यादा खिलाड़ी इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के रेड बॉल क्रिकेट टूर्नामेंट में खेलने के लिए भेज सकता है, जिससे उन्हें खुद को अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट के लिए तैयार होने का और बेहतरीन मौका मिलेगा.

भारतीय टेस्ट क्रिकेट टीम

भारत के घरेलू सर्किट में शानदार प्रदर्शन करने वाले अभिमन्यू ईश्वरन, शेल्डन जैक्सन, सौरव कुमार और सचिन बेबी जैसे खिलाड़ियों को तरासना होगा. जो रणजी ट्रॉफी में अपने-अपने राज्य के लिए टेस्ट क्रिकेट में सालों से शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं और जिन्हें अभी तक भारत के लिए खेलने का मौका तक नहीं मिला है. ऐसे ज्यादा से ज्यादा खिलाड़ियों को भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट का मौका दिया जो रेड बॉल क्रिकेट में स्पेशलिस्ट हों, जो बॉलिंग और बैटिंग में महारत हासिल कर चुके हैं. तब जाके कहीं भारतीय टेस्ट क्रिकेट के भविष्य को बचाया जा सकता है.

भारतीय क्रिकेट टीम

कोच, कप्तान और टीम मैनेजमैंट का फैसला होता है कि किस खिलाड़ी को खिलाना है और किस खिलाड़ी को बाहर बैठाना है. अभिमन्यु ईश्वरन, सरफराज खान, सौरव कुमार जैसे खिलाड़ियों को कई बार टेस्ट स्क्वाड में मौका तो मिला लेकिन उन्हें बैंच पर ही बैठकर संतोष करना पड़ा, इसके बाद भी इन्हें प्लेइंग-11 में मौका नहीं दिया गया बल्कि टीम से ही बाहर कर दिया गया.

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