Friday, March 27, 2026

 नक्सलियों के खिलाफ झारखंड पुलिस ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की है

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साल 2025 झारखंड पुलिस के लिए बेहद कामयाबी भरा रहा है. नक्सलियों के खिलाफ झारखंड पुलिस ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की है. इस सफलता को जमीन पर उतारने वाले अफसरों और कर्मियों को अब इस अदम्य साहस और वीरता के लिए बड़ा सम्मान मिला है. झुमरा और पारसनाथ इलाके में नक्सलियों को इतिहास बनाने वाले तत्कालीन आईजी अभियान अमोल होमकर, तत्कालीन आईजी बोकारो माइकल राज, डीआईजी एसटीएफ, तत्कालीन बोकारो एसपी, डीआईजी, डिप्टी कमांडेंट और जवानों को केंद्रीय गृह मंत्रालय दक्षता पदक से नवाजा गया है.

पदक पाने वाले अफसरों ने बड़े क्षेत्र से किया नक्सलियों का सफाया

वर्तमान में आईजी रेल अमोल वेणुकांत होमकर को नक्सली अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानते हैं. इसके पीछे बड़ी वजह है. आईजी अभियान के पद पर रहते हुए आईपीएस अमोल होमकर ने भाकपा माओवादियों को पूरे झारखंड में कमजोर कर दिया, बेहतरीन रणनीति के बल पर अमोल होमकर ने एक समय भाकपा माओवादियों के लिए सबसे सुरक्षित ठिकाना रहे झुमरा और पारसनाथ से ही उनका सफाया कर दिया.

आईपीएस अमोल होमकर के नेतृत्व में ही पहली बार झारखंड में एक करोड़ का इनामी नक्सली विवेक मारा गया था, रणविजय जैसा कुख्यात नक्सली गिरफ्तार हुआ. यही नहीं दर्जनों हथियार बरामद किए गए थे. इस अभियान में उन्हें तत्कलीन बोकारो आईजी माइकल राज, तत्कालीन बोकारो डीआईजी सुरेंद्र झा, वर्तमान एसटीएफ डीआईजी इंद्रजीत महथा, तत्कालीन बोकारो एसपी मनोज स्वर्गीयरी, डिप्टी कमांडेंट मिथलेश और नक्सल अभियान में लगे जवानों का भरपूर सहयोग मिला. नतीजा झुमरा और पारसनाथ में नक्सली अब इतिहास हो गए हैं. झुमरा और पारसनाथ से नक्सलियों का सफाया करने वाली आईजी होमकर की टीम को केंद्रीय गृह मंत्रालय दक्षता पदक से नवाजा गया है.

IG Rail Amol Venukant Homkar

जनवरी 2025 में शुरू हुआ था अभियान

साल 2025 के अप्रैल महीने में झारखंड के नक्सल इतिहास में पहली बार एक साथ आठ नक्सली मारे गए, जिसमें एक करोड़ का इनामी भी शामिल था. झारखंड पुलिस से लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय तक इस सफलता को लेकर गुड फील करते नजर आए थे. अब केंद्रीय गृह मंत्रालय के द्वारा इस अभियान में शामिल 14 अफसरों और कर्मियों को पदकों से सम्मानित किया गया है.

आपको बता दें कि झुमरा और पारसनाथ में मिली सफलता के पीछे की कहानी बड़ी दिलचस्प है. झारखंड के तीन दिग्गज आईपीएस अफसरों के दो महीने की मेहनत का फल था. एक करोड़ के इनामी विवेक और उसके सात साथियों का एनकाउंटर. तीन आईपीएस अफसरों में एक तो खुद तत्कालीन आईजी अभियान अमोल होमकर ही थे. बोकारो के लुगु पहाड़ में 21 जनवरी को दो माओवादियों को मार गिराया था, इसी अभियान के दौरान 15 लाख का इनामी रणविजय महतो गिरफ्तार भी हुआ था लेकिन 20 अप्रैल को जो हुआ उसने इतिहास बन दिया.

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पत्नी जया की मौत के बाद एक करोड़ का इनामी नक्सली विवेक एक बार फिर से गिरिडीह के पारसनाथ और बोकारो के झुमरा में अपनी ताकत बढ़ाने की कोशिश में लगा हुआ था, इधर विवेक से जुड़े कई तरह के इनपुट तत्कालीन आईजी अभियान अमोल होमकर और आईजी सीआरपीएफ को प्राप्त हो रहे थे. विवेक के दस्ते को लेकर कई अहम जानकारियां डीजीपी अनुराग गुप्ता को भी मिल रही थी.

फिर क्या था, डीजीपी अनुराग गुप्ता, आईजी अभियान अमोल होमकर और सीआरपीएफ आईजी साकेत सिंह और बोकारो रेंज की पुलिस टीम के द्वारा विवेक उर्फ प्रयाग मांझी के दस्ते पर एक बड़ा प्रहार करने की प्लनिंग तैयार की गई. इन अधिकारियों ने करीब दो महीने तक विवेक और उसके दस्ते के हर तरह की जानकारी इकट्ठा करवाई, जैसे दस्ता रात में कहा ठहरता है? दिन में कहां रूकता है, उनके खाने का इंतजाम कौन करता है, ऐसी हर जानकारी इकट्ठा करवाई गई. वॉर रूम में तत्कलीन आईजी अभियान रात तक जागकर जानकारियां हासिल करते थे.

IG Rail Amol Venukant Homkar

20 अप्रैल की रात मिली सटीक लोकेशन

एक करोड़ के इनामी विवेक दस्ते पर दो महीने तक वॉच करने के बाद आखिरकार वह दिन भी आ गया जब यह जानकारी मिली कि विवेक अपने दस्ते के 20 से ज्यादा नक्सलियों के साथ लुगु पहाड़ी की तराई में डेरा डाले हुए है. विवेक के दस्ते में होने की सूचना की भी पुष्टि हो गई. जिसके बाद 20 अप्रैल की देर शाम से ही झरखंड पुलिस मुख्यालय में हलचल तेज हो गई लेकिन इसकी जानकारी सिर्फ डीजीपी, आईजी अभियान और आईजी सीआरपीएफ तक ही रही.

कांफ्रेंस कॉल के जरिए डीजीपी अनुराग गुप्ता, आईजी अभियान अमोल होमकर और सीआरपीएफ आईजी साकेत सिंह ने विवेक के खिलाफ एक ऑपरेशन प्लान किया. जिसके बाद 209 कोबरा बटालियन, सीआरपीएफ, झरखंड जगुआर और जिला पुलिस के चुनिंदा अफसरों को प्लनिंग में शामिल किया गया. आनन-फानन में जवानों के द्वारा झुमरा से लेकर लुगु पहाड़ी के हर उस इलाके को घेर लिया गया जहां से नक्सली दस्ते के बाहर निकलने की संभावना थी.

रातभर डटे रहे जवान और जागते रहे अधिकारी

20 अप्रैल की शाम से लेकर के 21 अप्रैल के तड़के चार बजे तक विवेक दस्ते के खिलाफ जंगल में घुसे जवान डटे रहे, जबकि आईजी अभियान रात भर जागे रहे और पल-पल की जानकारी लेते रहे, इसी बीच अभियान में लगी पूरी टीम 21 अप्रैल की सुबह करीब पांच बजे खुश हो गई, जब उन्हें लुगु पहाड़ी के नीचे नक्सलियों की हलचल दिखी, मूवमेंट दिखते ही रांची से लेकर बोकारो तक हलचल बढ़ गई.

आईजी अभियान अमोल होमकर और आईजी सीआरपीएफ एक दूसरे के संपर्क में थे, इसके साथ ही डीजीपी को भी पूरी जानकारी दी गई. जिसके बाद सबसे पहले नक्सलियों को जिंदा गिरफ्तार करने की रणनीति पर काम शुरू हुआ.

नक्सलियों की ओर से पहला हमला

पुलिस, नक्सलियों को पहले गिरफ्तार करने के प्लान पर काम कर रही थी, लेकिन जैसे ही सुरक्षाबल नक्सलियों के नजदीक पहुंचे, नक्सल प्रहरी ने पुलिस पर फायर कर दिया, जिसके बाद बाकी नक्सली भी एक्टिव हो गए और पुलिस पर गोलियों की बौछार कर दी, लेकिन नक्सलियों की किस्मत खराब थी, क्योंकि पूरा इलाका जवानों ने घेर रखा था.

नक्सलियों के हमले का करारा जवाब जगुआर और कोबरा के जवानों ने दिया. एक घंटे की मुठभेड़ के बाद नक्सलियों की तरफ से गोलियां चलनी लगभग बंद हो गई. एहतियात बरतते हुए जब जवान आगे बढ़े तो कुछ नक्सली फायर करते भागते दिखाई दिए, जवाबी फायरिंग करने पर नक्सलियों के द्वारा फायरिंग पूरी तरह बंद हो गई.

सर्च में मिली आठ डेथ बॉडी, विवेक को पहचान होते ही झूम उठा मुख्यालय

मुठभेड़ के बाद जवानों ने जब यह जानकारी दी कि जंगल से आठ डेथ बॉडी मिली है और एक का चेहरा एक करोड़ के इनामी विवेक से मिल रहा है, तब आनन फानन में लुगु के वैसे ग्रामीण जो विवेक दस्ते के नक्सलियों को हर तरह से पहचानते थे, उनसे भी डेथ बॉडी की पहचान करवाई गई, जिसके बाद यह पुख्ता हो गया कि विवेक ही नहीं बल्कि स्पेशल एरिया कमेटी के सदस्य अरविंद यादव और जोनल मेंबर कमेटी सदस्य साहब राम मांझी भी मारे गए हैं.

एक साथ तीन बड़े समेत आठ नक्सलियों के मारे जाने के बाद पूरा पुलिस मुख्यालय झूम उठा. डीजीपी ने आईजी अभियान अमोल होमकर और आईजी सीआरपीएफ साकेत सिंह सहित पूरी टीम को बधाई दी और कहा हमने कर दिखाया. मौके से सर्च टीम के द्वारा भारी मात्रा में हथियार और गोला बारूद भी बरामद किए गए थे.

इलाके से था गहरा नाता

बता दें कि झारखंड पुलिस के वर्तमान में रेल आईजी और तत्कालीन आईजी अभियान अमोल वेणुकांत होमकर वो शख्स हैं, जिन्होंने अपने शांत दिमाग से की हुई प्लानिंग के जरिये नक्सलियों को पिछले तीन साल में इतना नुकसान पहुंचाया कि नक्सलियों में उनके नाम का खौफ पैदा हो गया है. जहां तक बात विवेक दस्ते के खात्मे का है. जिस इलाके में एक करोड़ का इनामी विवेक सक्रिय था उस पूरे इलाके से आईजी अभियान अमोल होमकर पूर्व परिचित थे, बतौर जिला गिरिडीह जिले के एसपी के पद पर रहते हुए होमकर ने पारसनाथ से लेकर झुमरा तक की टेरेन को भली भांति जानते थे.

बेहतरीन तालमेल के साथ विवेक दस्ते का खात्मा

वहीं आईजी सीआरपीएफ साकेत सिंह, जो झारखंड कैडर के ही आईपीएस हैं और बोकारो एसपी के तौर पर अपनी सेवा पूर्व में दे चुके हैं. उन्हें भी झुमरा का पूरा ज्ञान था. ऐसे में दोनों आईपीएस अफसरों ने बेहतरीन तालमेल दिखाते हुए विवेक दस्ते के खिलाफ कामयाबी की गाथा लिख डाली, जिसमें उन्हें डीजीपी का भरपूर सहयोग मिला. इस अभियान को सफल बनाने में तत्कालीन आईजी बोकारो डॉक्टर माइकल राज, आईजी एसटीएफ अनूप बिरथरे, तत्कालीन बोकारो डीआईजी और तत्कलीन एसपी बोकारो की भी सराहनीय भूमिका रही थी.

क्यों महत्वपूर्ण था विवेक का मारा जाना

दरअसल, मारा गया नक्सली प्रयाग मांझी उर्फ विवेक दा, जिसे फुचना, नागो मांझी और करण दा जैसे कई नामों से जाना जाता था, भाकपा माओवादी की सेंट्रल कमेटी का सदस्य था. वह संगठन के लिए रणनीतिक और सैन्य मोर्चे पर काम करता था और पिछले साल ही में झारखंड के पारसनाथ क्षेत्र की कमान उसे सौंपी गई थी, ताकि नक्सली गतिविधियों को फिर से संगठित किया जा सके. विवेक दा, धनबाद जिले के टुंडी थाना क्षेत्र के दलबुढ़ा गांव का रहने वाला था लेकिन उसकी सक्रियता का क्षेत्र सीमित नहीं था. वह झारखंड के गिरिडीह, बोकारो, लातेहार से लेकर बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ तक फैले रेड कॉरिडोर में संगठन के लिए सालों तक सक्रिय रहा, उसके खिलाफ केवल गिरिडीह में ही 50 से अधिक मामले दर्ज थे.

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