चुनाव आयोग ने छह साल बाद एक बार फिर से अपने आर्थिक खुफिया समिति को सक्रिय कर दिया है. ऐसा करके बिहार विधानसभा चुनाव से पूर्व वोटरों को प्रभावित करने के लिए धन, शराब और मादक पदार्थों के प्रयोग पर रोक लगाना है.
इस सिलसिले में चुनावी खुफिया मामलों की बहु-विभागीय समिति (MDCEI) की बैठक शुक्रवार को हुई. खास बात यह थी कि यह बैठक 2019 के बाद पहली बार आयोजित की गई. इसका मकसद चुनावी राज्य विशेषकर बिहार में वोटरों को प्रभावित करने के लिए धनबल और गिफ्ट के प्रयोग को रोकने के उद्देश्य से प्रवर्तन एजेंसियों के साथ ही केंद्रीय पुलिस बलों की रणनीति को पुख्ता करना था.
बता दें कि इस चुनावी खुफिया मामलों की बहु-विभागीय समिति (MDCEI) का गठन 2014 में आम चुनावों से पूर्व किया गया था.
2019 के बाद हुई बैठक
इस बारे में अफसरों ने बताया कि समिति की बैठक 2014 और 2019 के चुनावों के पूर्व हुई थी. हालांकि उसके बाद औपचारिक रूप से इसकी कोई बैठक नहीं हुई. जबकि एजेंसी और सुरक्षा बलों के प्रमुख धनबल पर कंट्रोल करने के लिए प्लानिंग बनाने बैठकें करके रहे हैं. वहीं शुक्रवार को उनकी बैठक बड़े स्तर पर आयोजित की गई.
इस दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्त एसएस संधू और विवेक जोशी भी मौजूद थे.
बैठक में 17 विभाग के अफसर हुए शामिल
इतना ही नहीं समिति में 17 विभागों के अफसर शामिल हैं. इनमें केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड, रेलवे सुरक्षा बल, सीमा सुरक्षा बल, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड, प्रवर्तन निदेशालय, राजस्व खुफिया विभाग, केंद्रीय आर्थिक खुफिया ब्यूरो, वित्तीय आसूचना इकाई, भारतीय रिजर्व बैंक, नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो, भारतीय बैंक संघ, स्वापक नियंत्रण ब्यूरो, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, सशस्त्र सीमा बल, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण और डाक विभाग आदि शामिल हैं.
बैठक चुनावों में नकदी के अलावा अन्य प्रलोभनों के हानिकारक प्रभावों से निपटने के मद्देनजर खाका तैयार करने के लिए हुई थी.
विभिन्न एजेंसियों ने दी जानकारी
बैठक में विभिन्न एजेंसियों ने चुनाव आयोग को अपनी तैयारियों, उठाए गए कदमों और प्रलोभन-मुक्त चुनाव सुनिश्चित करने के लिए प्रस्तावित कदमों के बारे में जानकारी दी. निर्वाचन आयोग ने बताया कि ये जानकारी चुनावों को प्रभावित करने के लिए रुपये के अलावा अन्य प्रलोभनों के प्रयोग पर रोक लगाने से जुड़े कई विषयों पर थीं. साथ ही आयोग के अफसरों ने निर्देश दिया कि प्रभावी कार्रवाई के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच आर्थिक अपराधों पर सहयोग और खुफिया जानकारी शेयर की जानी चाहिए.


