बहुत से लोग अपने पैरों के स्वास्थ्य पर ज्यादा ध्यान नहीं देते. वे इसे नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन पैरों की समस्याएं जल्द ही गंभीर और संभावित रूप से खतरनाक हो सकती हैं. ये त्वचा के रंग में बदलाव से लेकर सुन्नपन तक, कई तरह की समस्याएं पैदा कर सकती हैं. ये बदलाव चलते समय भी दिखाई दे सकते हैं. अगर आपको ऐसी कोई समस्या दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना सबसे अच्छा है.
किसी भी तरह की देरी गंभीर कॉम्प्लिकेशन का कारण बन सकती है. दरअसल, कई अध्ययनों से इस बात का खुलासा हुआ कि पैरों में इस तरह के बदलाव डायबिटीज और हार्ट डिजीज जैसी कई गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकते हैं. डायबिटीज से पैरों में घाव, छाले, सूखी-फटी त्वचा, सुन्नता, जलन और झुनझुनी जैसे लक्षण दिख सकते हैं. वहीं, हार्ट डिजीजी से संबंधित कॉम्प्लिकेशन से भी पैरों में सूजन या दर्द हो सकता है.
पैरों की त्वचा का रंग बदलना
तापमान में बदलाव के साथ पैरों का रंग बदल सकता है, और सूजन एक चिंता का विषय है, खासकर जब धमनियों में वसा जमा हो जाती है. धमनियों में वसा जमा होना (एथेरोस्क्लेरोसिस) ब्लड फ्लो को बाधित करता है, जिससे पैरों में सूजन और त्वचा का रंग नीला या पीला पड़ सकता है. यदि समय पर सही इलाज न किया जाए, तो गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं.

नर्व डैमेज के भी हो सकते हैं लक्षण
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के मुताबिक, अगर आपको पैरों में सुन्नता और खुजली जैसे लक्षण बार-बार महसूस होते हैं, तो यह डायबिटीज का संकेत हो सकता है. या फिर इसी तरह के लक्षण नर्व डैमेज के कारण भी हो सकते हैं. ऐसा तब होता है जब ब्लड शुगर का लेवल ठीक से कंट्रोल नहीं होता. पैरों में सुन्नता तंत्रिकाओं के दबने या अन्य तंत्रिका संबंधी समस्याओं के कारण भी हो सकती है. हालांकि, इन लक्षणों के दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.
इस कारण से पैरों में हो सकती है सूजन की समस्या
पैरों में तेज दर्द और सूजन होना, पैर बहुत भारी लगना अगर ऐसे लक्षण दिखें, तो माना जाता है कि दिल से जुड़ी कोई समस्या का संकेत है. इसे एडिमा कहते हैं. यह समस्या खासतौर पर हार्ट फेल होने की स्थिति में होती है. हार्ट की मांसपेशियों में किसी समस्या के कारण भी पैरों में सूजन आ सकती है. पैरों में मूवमेंट बढ़ने से यह सूजन और बढ़ जाती है. अगर आप लंबे समय तक खड़े या बैठे रहते हैं, तो सूजन और बढ़ जाती है. अगर ऐसे समय में सही इलाज न लिया जाए, तो लक्षण बहुत गंभीर हो सकते हैं. पैरों की त्वचा का रूखा होना और त्वचा का रंग बदलना जैसे लक्षण दिखते हैं. अगर कोई चोट कई दिनों तक ठीक न हो, तो यह डायबिटीज का लक्षण हो सकता है. कई बार ये छाले बहुत गंभीर हो जाते हैं. अगर जल्दी इलाज हो जाए, तो कोई समस्या नहीं होगी.

ठंडे पैर किस बीमारी का हैं लक्षण?
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, कभी-कभी पैर बहुत ठंडे हो जाते हैं. नसें सूज जाती हैं और दर्द करने लगती हैं. ये नसें कभी-कभी लाल या नीली दिखाई देती हैं. ऐसा होने पर, इसका मतलब है कि खून की आपूर्ति पर्याप्त नहीं हो रही है. यह स्थिति शिरापरक अपर्याप्तता (venous insufficiency) का संकेत हो सकती है, जहां नसों के वाल्व ठीक से काम नहीं करते और पैरों में खून जमा होने लगता है, जिससे नसें सूज जाती हैं और दर्द करने लगती हैं. यह परिधीय धमनी रोग (PDA) का भी लक्षण हो सकता है, जिसमें आर्टरी संकरी हो जाती हैं और पैरों में ब्लड का सप्लाई कम हो जाता है.
वैरिकोज वेन्स का विकसित होना एक गंभीर समस्या है
आम तौर पर ब्लड सप्लाई हार्ट से होती है. फिर, अन्य अंगों से ब्लड वापस हार्ट में प्रवाहित होता है. यह प्रोसेस लगातार चलती रहती है. जब भी यह साइकिल बाधित होता है, नसों में समस्याएं उत्पन्न होती हैं. पैरों की नसों में सूजन इसका एक उदाहरण है. कुछ लोगों में वैरिकाज वेन्स भी विकसित हो जाती हैं. यह खराब ब्लड सप्लाई के कारण होने वाली समस्या है. इस पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है.
इस रोग से पैरों में फंगल इंफेक्शन हो जाता है
फंगस के कारण बार-बार होने वाले इंफेक्शन, सूजन और घाव जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. डॉक्टरों का कहना है कि गठिया जैसी बीमारियों से पहले ऐसे लक्षण दिखाई देते हैं. जितना ज्यादा आप इन्हें नजरअंदाज करेंगे, उतनी ही ज्यादा समस्याएं बढ़ेंगी. गठिया होने पर आपको खास तौर पर बहुत सतर्क रहना चाहिए. नियमित दवा लेना बहुत जरूरी है. वरना समस्या और बिगड़कर बहुत गंभीर हो जाएगी. फिर दवा ठीक से काम नहीं कर पाएगी.


