Friday, March 27, 2026

झारखंड एटीएस ने संगठित आपराधिक गिरोहों से जुड़े अपराधियों पर आर्थिक नकेल कसने की तैयारी शुरू कर दी है.

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रांची: झारखंड में सक्रिय संगठित आपराधिक गिरोहों की काली कमाई पर झारखंड एटीएस की टेढ़ी नजर पड़ चुकी है. खौफ के बल पर अकूत संपत्ति अर्जित करने वाले अपराधियों के खाते पुलिस के रडार पर हैं. जांच के क्रम में कई चौंकाने वाले खुलासे भी हुए हैं. जिसमें सबसे बड़ा खुलासा ये है कि अपराधी बैंकों में करोड़ों रुपये नगद जमा कर रहे हैं.

झारखंड के अपराध जगत में इन दिनों नगद का चलन जोरों पर है. बड़े अपराधी अपने करीबियों और रिश्तेदारों के खातों में अपनी काली कमाई नगद में जमा करवा रहे हैं. झारखंड के नामी गैंगस्टर्स के मनी ट्रेल की जांच कर एटीएस को यह चौंकाने वाली जानकारी मिली है. जिसके बाद अपराधियों की काली कमाई की जांच गहराई से की जा रही है.एटीएस एसपी ऋषभ झा ने बताया कि सभी नगद ट्रांजेक्शन की जांच शुरू कर दी गई है.

एटीएस एसपी ऋषभ झा ने बताया कि झारखंड के संगठित आपराधिक गिरोहों के गैंग लीडर्स और उनके सगे-संबंधियों के खातों की बड़े लेबल पर जांच चल रही है. जांच के दौरान एटीएस ने वैसे खातों की जांच शुरू की है जिनमें बड़ी रकम नगद के रूप में खातों में जमा करायी गई और निकाली गई. जांच के दौरान हैवी कैश ट्रांजेक्शन और डिपॉजिट किए जाने से संबंधित जानकारी मिली है.हालांकि जिन बड़े अपराधियो के खातों में नगद जमा करने के साक्ष्य एटीएस को मिले हैं उनके नामों का खुलासा जांच प्रभावित होने की वजह से नहीं किया गया है, लेकिन बताया जा रहा है कि लगभग हर बड़े अपराधी ने अपने कारीबियों के खाते में बड़ी रकम जमा करायी है.

एटीएस के अनुसार कुछ ऐसे खाते भी हैं, जो संगठित आपराधिक गिरोहों से संबंधित हैं. उन खातों में करोड़ों रुपये नगद जमा कराए गए हैं. करोड़ों रुपये जिन खातों में जमा हुए हैं वे खाते बड़े अपराधियों के हैं. ऐसे में हर खाते जांच की जा रही है. बड़े पैमाने पर बैंक स्टेटमेंट निकाले गए हैं.

दरअसल, झारखंड के बड़े आपराधिक गिरोह एक्सटॉर्शन के जरिए करोड़ों की उगाही करते हैं. व्यापारी हो या कारोबारी जो अपराधियों के खौफ के आगे हार कर उन्हें पैसे देते हैं, वह नगद ही होता है.एक्सटॉर्शन के जरिए की गई कमाई ही अपराधी बैंकों में जमा कर रहे हैं.

अमन साव (अब मृत), सुजीत सिन्हा, प्रिंस खान, डब्लू सिंह, मयंक सिंह और विकास तिवारी जैसे गैंगस्टर्स की काली कमाई को कारोबार में लगाने वाले सफेदपोश, गैंगस्टर्स के करीबी और रिश्तेदार बड़े संकट में फंसने वाले हैं. झारखंड में सक्रिय संगठित अपराधी गिरोह पर लगाम लगाने के लिए झारखंड एटीएस के साथ-साथ कई एजेंसियां साथ में मिलकर काम कर रही हैं. इसी कड़ी में झारखंड एटीएस ने ऐसे दो दर्जन से ज्यादा लोगों की पहचान कर ली है जो झारखंड के संगठित आपराधिक गिरोहों की कमाई को बैंकों में नगद के रूप में जमा कर रहे थे. फिर उसी पैसे को विभिन्न तरह कारोबार में लगा रहे हैं और उसका मुनाफा अपराधियों तक पहुंचा रहे हैं.

झारखंड के दुर्दांत अपराधियों की करोड़ों की संपत्ति का पता एटीएस को मिल चुका है. अब धीरे-धीरे संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई शुरू की जाएगी. इसके तहत जो संपत्ति अपराधियों के नाम पर है उसे सीधे तौर पर जब्त की जाएगी, जबकि जो संपत्ति उनके रिश्तेदारों के नाम पर हैं वैसे लोगों को नोटिस के जरिए ये बताना होगा की संपत्ति लीगल है या इलीगल.

संगठित आपराधिक गिरोहों के बड़े अपराधियों की संपत्ति जांच में कई बड़े खुलासे हुए हैं. झारखंड के कई बड़े अपराधियों ने भारत के कई बड़े राज्यों में निवेश तो किया ही है, साथ ही साथ नेपाल जैसे देशों में भी होटल के कारोबार के साथ-साथ रियल स्टेट में अपने पैसे लगाए हैं.

एटीएस के जांच में यह बात भी सामने आई है कि अपराधियों के द्वारा कई सफेदपोश और अपने रिश्तेदारों के नाम पर संपत्ति को खरीदी गई है. एटीएस की ओर से उन करीबियों की सूची तैयार की गई थी. अब उन्हें नोटिस भेजने का काम भी शुरू कर दिया गया है.

नोटिस के जरिए सभी से यह जानकारी मांगी जा रही है कि जिस संपत्ति को उसने खरीदी है, वह राशि कहां से लाई गई थी. उसका पुख्ता सबूत भी मांगा जा रहा है. नोटिस मिलने के बाद अगर संबंधित व्यक्ति जवाब नहीं देता है तो ऐसी स्थिति में उस पर कार्रवाई की जाएगी.

झारखंड एटीएस के एसपी ऋषभ झा ने बताया कि अपराधियों की काली कमाई का निवेश करने वाले लोगों की सूची बना कर उन्हें नोटिस किया जा रहा है. नोटिस मिलने के बाद चाहे गैंगस्टर के परिवार वाले हों या फिर उनके नजदीकी दोस्त या फिर बिजनेसमैन उन सब को खरीदी गई संपत्ति और किए गए निवेश को लेकर पुख्ता सबूत देने होंगे. अगर वे ऐसा नहीं कर पाते हैं तो नए कानून के हिसाब से तीन साल की सजा तो है ही साथ ही सारी संपत्ति भी जब्त कर ली जाएगी.

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