वेतनभोगी कर्मचारियों के भविष्य में फाइनेंशियल सिक्योरिटी सुनिश्चित करने के लिए प्रोविडेंट फंड स्कीम बनाई गई है.
नई दिल्ली: प्रोविडेंट फंड (PF) एक रिटायरमेंट सेविंग स्कीम है, जिसमें कर्मचारी और नियोक्ता दोनों योगदान करते हैं. इसका संचालन कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) द्वारा किया जाता है. यह योजना वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए भविष्य में फाइनेंशियल सिक्योरिटी सुनिश्चित करने और पेंशन लाभ प्रदान करने के लिए बनाई गई है. पीएफ खाते पर ब्याज मिलता है.
आमतौर पर कर्मचारी यह पैसा रिटायरमेंट के बाद आने वाली चुनौतियों के मद्देनजर जमा किया जाता है, लेकिन जरा सोचिए…, अगर एक छोटी सी लापरवाही की वजह से यह पैसा अटक जाए तो क्या होगा? यह लापरवाही है- शादी के बाद नया नॉमिनेशन न करना.
दरअसल, EPF और EPS के नियमों के मुताबिक कर्मचारी की शादी होते ही उसका नॉमिनेशन ऑटोमैटिकली रद्द हो जाता है. ऐसे में अगर यानी आपने शादी के बाद नया नॉमिनी नहीं चुना, तो आपके फंड का पैसा उस व्यक्ति तक नहीं पहुंचेगा, जिसे आप इसका लाभ देना चाहते हैं.
शादी के बाद बदल जाती हैं जिम्मेदारियां
ईपीएफ स्कीम 1952 और ईपीएस 1995 के नियमों के अनुसार शादी के बाद आपकी कानूनी जिम्मेदारियां बदल जाती हैं और आपकी फैमिली अलग तरीके से परिभाषित होती है. इसलिए शादी से पहले किया गया नॉमिनेशन ऑटोमैटिर कैंसिल हो जाता है.
शादी के बाद किसे बनाया जा सकता है नॉमिनी
बता दें EPF-EPS के हिसाब से परुष सदस्य के लिए पत्नी, बच्चे (शादीशुदा हों या न हों), आश्रित माता-पिता, मृतक बेटे की पत्नी और बच्चे को फैमिली माना जाता है. वहीं, महिला कर्मचारी के लिए पति, बच्चे, आश्रित माता-पिता, सास-ससुर, मृतक बेटे की पत्नी और बच्चे को परिवार माना जाता है. यानी शादी के बाद पीएफ की राशि के लिए केवल इन्हीं लोगों को नॉमिनी बनाया जा सकता है.
शादी के बाद नॉमिनेशन न किया जाए और सदस्य की मृत्यु हो जाए तो क्या होगा?
ऐसे मामले में अगर सदस्य शादीशुदा है और उसने नॉमिनेशन अपडेट नहीं किया तो उसके अकाउंट में जमा पैसा उसके परिवार के पात्र सदस्यों में बराबर बांट दिया जाएगा. वहीं, अगर सदस्य शादीशुदा नहीं है, तो पैसा आश्रित माता-पिता को मिलेगा.क्या शादी से पहले चुना गया ‘नॉन-फैमिली’ नॉमिनी वैध रहेगा?
शादी के बाद नॉन-फैमिली व्यक्ति का नॉमिनेशनअपने-आप रद्द हो जाता है. ऐसे में अगर किसी ने अपने किसी रिश्तेदार को नामित किया था, तो शादी के बाद उसका हक खत्म हो जाएगा.


