नई दिल्लीः बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के निर्वाचन आयोग के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से फिर कहा कि वह बिहार में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाताओं की पहचान साबित करने के लिए आधार कार्ड और मतदाता फोटो पहचान पत्र को स्वीकार्य दस्तावेज़ों में शामिल करने पर विचार करे.
- सुप्रीम कोर्ट ने मामले के पक्षकारों से कहा कि वे इस मामले में बहस के लिए कितना समय लेंगे, यह तय करें और कल सुनवाई की अगली तारीख की जानकारी देगा. बता दें कि इस महीने की शुरुआत में, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से एसआईआर के लिए इन तीन दस्तावेजों, आधार, मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड पर विचार करने को कहा था.
- अदालत ने कहा था कि ये दस्तावेज मतदाताओं के सत्यापन के लिए चुनाव निकाय द्वारा सूचीबद्ध 11 दस्तावेजों, जिनमें निवास और जाति प्रमाण पत्र शामिल हैं. इसमें से कोई भी प्राप्त करने के लिए आधारभूत रिकॉर्ड हैं. चुनाव आयोग ने अदालत में दायर अपने लिखित जवाब में तर्क दिया कि मतदाता फोटो पहचान पत्र (ईपीआईसी) और राशन कार्ड आसानी से नकली बनाये जा सकते हैं.
- चुनाव आयोग ने कहा कि पात्रता के लिए केवल मतदाता पहचान पत्र पर निर्भर रहने से एसआईआर प्रक्रिया विफल हो जाएगी. चुनाव आयोग ने कहा कि फर्जी राशन कार्डों की व्यापक मौजूदगी के कारण, उसे अनुच्छेद 326 के तहत पात्रता की जांच के लिए भरोसेमंद 11 दस्तावेजों की सूची में शामिल नहीं किया गया है. चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि बिहार में मतदाता सूचियों की एसआईआर (विशेष पहचान पत्र) मतदाता सूची से अपात्र लोगों को हटाने की प्रक्रिया मतदाता सूची की विश्वसनीयता में जनता का विश्वास बहाल करने के लिए शुरू की गई है.
बता दें कि चुनाव आयोग ने बिहार में मतदाता सूची के एसआईआर कराने का निर्देश 24 जून को दिया था. इसके बाद से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर सियासी बवाल मचा हुआ है. गैर-सरकारी संगठन एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स (ADR) ने भारतीय चुनाव आयोग द्वारा SIR के दौरान आधार, मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड को वैध स्वतंत्र प्रमाण के रूप में स्वीकार करने से इनकार करने पर सवाल उठाया है.


