वैदिक ज्योतिष में ग्रहों की स्थिति का जीवन पर गहरा प्रभाव माना जाता है. 28 जुलाई से एक खास ज्योतिषीय योग बन रहा है जिसे समसप्तक योग कहा जाता है. यह योग तब बनता है जब दो महत्त्वपूर्ण ग्रह, शनि और मंगल, आपस में 180 डिग्री के कोण पर स्थित होते हैं. इस बार शनि मीन राशि में बैठा है, जबकि मंगल कन्या राशि में प्रवेश कर रहा है, जो कि बुध का शत्रु है. इस प्रकार ये दोनों ग्रह आमने-सामने आ जाएंगे और समसप्तक योग का निर्माण करेंगे.
इस योग के दौरान खासतौर पर मेष, मिथुन और कर्क राशि के जातकों को सावधानी बरतनी होगी क्योंकि इनके जीवन में कई प्रकार की कठिनाइयां और तनाव उत्पन्न हो सकते हैं.
मेष राशि पर प्रभाव
मेष राशि पर पहले से ही शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव है, जो जीवन में कई बाधाएं और कठिनाइयां लेकर आती है. अब मंगल का छठे भाव में प्रवेश होने से स्थिति और जटिल हो जाएगी. छठा भाव स्वास्थ्य, दुश्मन और रोज़गार से जुड़ा होता है, इसलिए इस समय मेष राशि के जातकों को विशेष सावधानी बरतनी होगी. फिजूल खर्चे बढ़ सकते हैं, मानसिक तनाव और कामकाज में बाधाएं आ सकती हैं. ऐसे में शनि और मंगल के मंत्रों का नियमित जाप करना लाभकारी रहेगा.
मिथुन और कर्क राशि पर प्रभाव
मिथुन और कर्क राशि के जातकों को भी इस समय विशेष सतर्कता बरतनी होगी. मंगल तीसरे भाव में होगा जबकि शनि बारहवें भाव में विराजमान रहेगा. यह स्थिति संचार, मानसिक उलझन, पारिवारिक तनाव और धन हानि का कारण बन सकती है. नौकरी या व्यवसाय में अनिश्चितता और बदलाव की स्थिति बन सकती है, इसलिए इस समय कोई बड़ा फैसला लेने से बचना चाहिए.
पांच ग्रहों का टकराव
इस समय आपकी राशि में शुक्र और गुरु की स्थिति अच्छी है, लेकिन शनि की वक्री चाल स्थिति को बिगाड़ सकती है. साथ ही 17 अगस्त के बाद केतु भी दूसरे भाव में आ जाएगा. इस प्रकार कुल मिलाकर पांच ग्रहों की टकराव वाली स्थिति बनी रहेगी, जो पारिवारिक और वित्तीय मामलों में दिक्कतें पैदा कर सकती है. नौकरी छूटने या बदलने का खतरा भी बढ़ सकता है, इसलिए इस समय नौकरी को स्थिर बनाए रखना बेहतर रहेगा.
समसप्तक योग से बचाव के उपाय
इस योग के दौरान शनि और मंगल के मंत्रों का जाप करने, पूजा-पाठ करने और हनुमान जी की आराधना करने की सलाह दी जाती है. नियमित ध्यान और योग से मानसिक शांति बनाए रखना भी लाभकारी होगा. इसके अलावा, अपने खर्चों पर नियंत्रण रखें और बड़े फैसले सोच-समझ कर लें.


