कुंवारी कन्याएं भी शिव-पार्वती के दिव्य मिलन की स्मृति में उपवास रखकर अपनी भावी वैवाहिक जीवन के लिए आशीर्वाद प्राप्त कर सकती हैं.
हरियाली तीज, श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है. यह दिन विशेषकर सुहागिन स्त्रियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इस दिन वे अपने पति की लंबी उम्र और वैवाहिक सुख की कामना से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं….
– माता पार्वती का आदर्श जीवन मार्ग
- धार्मिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने 108 जन्मों तक तपस्या कर शिव जी को पति रूप में प्राप्त किया.
- कुंवारी कन्याएं यदि श्रद्धा और नियमपूर्वक हरियाली तीज का व्रत करें, तो उन्हें योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति हो सकती है.
– मानसिक शुद्धि और आत्म-नियंत्रण की साधना
- यह व्रत केवल वैवाहिक फल के लिए नहीं, बल्कि मन, वाणी और आचरण की शुद्धि का माध्यम भी है.
- कुंवारी कन्याएं इस दिन व्रत रखकर धैर्य, संयम और आस्था की भावना को मजबूत कर सकती हैं.
– शिव-पार्वती की कृपा प्राप्त करना
- तीज का व्रत करने से माता पार्वती का आशीर्वाद मिलता है जो जीवन के हर रिश्ते में प्रेम और समर्पण बनाए रखने में मदद करता है.
- यह व्रत आध्यात्मिक उन्नति की दिशा में भी पहला कदम हो सकता है.
– कुंवारी कन्याएं कैसे करें हरियाली तीज का व्रत?
– पूजा विधि
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें (हरे वस्त्र शुभ माने जाते हैं).
- माता पार्वती और शिव जी की मूर्ति को लकड़ी की चौकी पर स्थापित करें.
- सिंदूर, चूड़ी, मेहंदी, फल-फूल, मिठाई आदि अर्पण करें.
- “तीज माता की कथा” अवश्य सुनें.
- पूरे दिन व्रत रखें — पूर्ण निर्जला या फलाहार (स्वास्थ्य अनुसार).
- अंत में माता से अपने लिए योग्य वर की कामना करें.
– किन बातों से बचना चाहिए?
- इस दिन तामसिक भोजन, क्रोध, झूठ या दिखावे से बचें.
- पूजा करते समय मन एकाग्र और श्रद्धापूर्ण रखें.


