धनबाद: ट्राइबल के विकास के लिए सरकार के द्वारा आरक्षण दिया गया है. इसके बावजूद आरक्षित सीटें खाली रह जा रही हैं. ट्राइबल इलाके के बच्चे नई और आधुनिक तकनीक या फिर शिक्षा के क्षेत्र में पीछे ना रहे, इसके लिए केंद्र सरकार काफी गंभीर है.
ट्राइबल बच्चों के विकास के लिए, केंद्र सरकार लगातार प्रयास कर रही है. इसी क्रम में आईआईटी आईएसएम में तीन दिवसीय बूट कैंप का आयोजन किया गया है, जिसमें भारत सरकार द्वारा संचालित ईएमआरएस यानी एकलव्य मॉडल रेसिडेंशियल स्कूल के 10वीं से 12वीं में पढ़ने वाले ट्राइबल बच्चे तकनीकी व अन्य गुर सीख रहे हैं. जनजातीय कार्य मंत्रालय रिवॉर्ड स्कीम के तहत ट्रेनिंग कैंप का आयोजन किया गया है.
प्रोजेक्ट की प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर आईआईटी आईएसएम की प्रोफेसर रश्मि सिंह ने कहा कि भारत सरकार के द्वारा एकलव्य मॉडल रेसिडेंशियल स्कूल चलाए जा रहे हैं. चार अन्य स्कूल भी झारखंड में हाल ही में खोले गए हैं. नए स्कूल में 10वीं से 12वीं कक्षा के छात्र फिलहाल नहीं हैं. सात एकलव्य मॉडल स्कूल से 33 छात्र बूट कैंप में शामिल हुए हैं. इन छात्रों के लिए आईआईटी आईएसएम के द्वारा एक साल का कार्यक्रम आयोजित किया गया था. जिसमें सभी छात्राओं का प्रदर्शन काफी बेहतर रहा था.

टेक्नोलॉजी में बच्चों को बेहतर बनाने पर फोकस
परीक्षा के माध्यम से 33 छात्र बूट कैंप के लिए चयनित हुए हैं. छात्र, सभी डिपार्टमेंट में जाकर चीजों को समझ रहे हैं. हमारे जीवन में साइंस और टेक्नोलॉजी की किस तरह से भूमिका है, उसे समझने की कोशिश कर रहे हैं. आदिवासी जनजाति क्षेत्र से यह बच्चे आते हैं और आगे चलकर उनके भविष्य के लिए यह ‘मील का पत्थर’ साबित होगा. टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बच्चे और बेहतर काम कर सकेंगे.
प्रोफेसर रश्मि सिंह ने कहा कि आरक्षण रहते हुए भी ट्राइबल सीटें खाली रह जा रही हैं. उनका सही-सही लाभ दिलवाना ही सरकार और हमारा मकसद है. उन्होंने कहा कि कई ऐसे संस्थान हैं, जहां आरक्षण होने के बावजूद ट्राइबल सीट खाली ही रह जाती है. साइंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में इन्हें आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है.

ट्राइबल बच्चों को मेन स्ट्रीम में लाना मुख्य उद्देश्य
इन बच्चों के लिए, स्कूल और कॉलेज भी है लेकिन जागरूकता की कमी है. यह बच्चे हमेशा से ही अपने लोगों के ही बीच में रहते हैं. जिस कारण मेन स्ट्रीम में यह शामिल नहीं हो पाते हैं. जब यह बच्चे मेन स्ट्रीम सोसाइटी में आते हैं तो उनके लिए सर्वाइवल थोड़ा कठिन हो जाता है. संस्थानों में इनके लिए सभी तरह के प्रावधान होने के बावजूद, यह आगे नहीं आ पा रहे हैं.
बच्चों में विकसित हो रही है सोचने और समझने की शक्ति
छात्र आईआईटी जैसे संस्थान में आकर व्यवस्था और सुविधाओं को देखते हैं और उन्हें समझते हैं. जिससे उनके विकास में काफी मदद मिलती है. आईआईटी आईएसएम की फैकल्टी से छात्र इंटरेक्ट हो रहे हैं, जिससे बच्चों में सोचने और समझने की शक्ति विकसित हो रही है.
रिसर्च और रोबोटिक्स क्लब को लेकर छात्रों में उत्सुकता
प्रोफेसर रश्मि सिंह ने बताया कि, पहले चरण में बच्चों को कंप्यूटर और आईटी के बारे में जानकारी दी जा रही है. दूसरे चरण में संस्थान के अलग-अलग डिपार्टमेंट का भ्रमण करा रहे हैं. लाइब्रेरी म्यूजियम के साथ ही टेक्निकल चीजों की भी जानकारी दी जा रही है. रिसर्च और रोबोटिक्स क्लब भी बच्चों को दिखाये जा रहे हैं, यहां छात्रों में काफी उत्सुकता देखने को मिली है.
टेक्नोलॉजी के साथ कल्चरल ज्ञान
इसके साथ ही बच्चों के लिए कल्चरल नाइट का भी आयोजन किया गया है. इससे बच्चों में आत्मबल और आत्मविश्वास बढ़ता है. वह अपने कल्चर को बेहतर ढंग से प्रदर्शित भी करना सीखते हैं. उन्हें अपने कल्चर से जोड़े रखने का भी यह एक उद्देश्य है. वह अपने आप में एक बेहतर अनुभव अपने कल्चर के साथ कर सके, इसके लिए ही कल्चरल नाइट का आयोजन किया गया है, जिसमें संथाली समेत अन्य नृत्य बच्चे प्रदर्शित करेंगे.
छात्रों ने समझी एआई और एमआई जैसी चीजें
इधर, पश्चिम सिंहभूम के एकलव्य मॉडल स्कूल की छात्रा साक्षी प्रिया ने बताया कि आईआईटी आईएसएम में आकर बहुत कुछ सीखने को मिला है. एआई और एमआई जैसी चीजें यहां सीखने और समझने को मिली हैं. इसके साथ ही अन्य तकनीकी ज्ञान भी प्रोफेसर के द्वारा दिया जा रहा है.
ट्राइबल बच्चों के लिए ‘मील का पत्थर’ साबित होंगे ऐसे आयोजन
गुमला के एकलव्य मॉडल स्कूल से आए छात्र विमल कुमार ने कहा कि जो चीज हम वीडियो में देखते हैं, आज उन चीजों को हम प्रत्यक्ष रूप में देख रहे हैं, जिससे मुझे कई तरह की जानकारी मिली है. यह काफी अहम कड़ी है हम जैसे बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए, इस तरह के कार्यक्रम व्यापक स्तर पर किए जाने चाहिए ताकि ट्राइबल बच्चे एक मुकाम तक पहुंच सके.
टेक्नोलॉजी के बारे में समझ रहे हैं छात्र
वहीं दुमका के एकलव्य मॉडल स्कूल से आई टीचर सुकूमति सोनार ने कहा कि बच्चों के लिए यह काफी जरूरी है. इससे बच्चों को काफी फायदा मिलने वाला है. हम सब टेक्नोलॉजी के बारे समझ रहे हैं.
चीजें समझने के बाद छात्रों में आएगा इंप्रूवमेंट
आखिर में लोहरदगा के एकलव्य मॉडल स्कूल से आई टीचर मीना रानी वर्मा ने बताया कि बच्चों के अंदर काफी उत्सुकता है. आईआईटी में कई नई चीजों को वह देख रहे हैं और समझ भी रहे हैं. इससे बच्चों के अंदर काफी इंप्रूवमेंट आएगा. कई बार हम चीजों को पढ़ाने के दौरान सिर्फ बताते हैं लेकिन अगर उसका प्रैक्टिकल हो जाता है तो वही चीज बेहतर तरीके से बच्चों को समझ में आ जाती है.
बेहतर मुकाम हासिल कर सकते हैं छात्र: शिक्षक
यहां आकर कुछ ऐसा ही बच्चों के साथ हो रहा है. आगे भी अगर इस तरह से कार्यक्रम होते रहे तो आने वाले दिनों में खाली ट्राइबल सीट, खाली नहीं रहेगी. ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चे, अपने जीवन में एक बेहतर मुकाम हासिल कर सकते हैं.


