Saturday, March 28, 2026

Chandan Murder Case:बेउर जेल से कैसे रची गई मुखिया चंदन की हत्या की साजिश?

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लखीसराय में मुखिया चंदन कुमार डोमू की हत्या एक साजिश का हिस्सा थी जिसकी योजना बेउर जेल में बनी थी। धीरज नामक अपराधी के जेल से बाहर आते ही मो. सैफ के साथ मिलकर हत्या की योजना बनाई गई। पांच लाख रुपये में सौदा तय हुआ और शूटरों को पटना से लखीसराय लाया गया। 17 जून को मुखिया चंदन की गोली मारकर हत्या कर दी गई

लखीसराय। मुखिया चंदन कुमार डोमू की हत्या कोई साधारण आपराधिक घटना नहीं थी। यह एक साजिश थी, जिसकी पटकथा जेल की सलाखों के पीछे जमींदारी कायम रखने के लिए लिखी गई थी और बाहर आते ही इसका क्रियान्वयन शुरू हो गया। भोजपुर जिले के नारायणपुर निवासी धीरज कुमार अप्रैल 2025 में जैसे ही बेउर जेल से बाहर आया, उसके पहले कॉल ने ही हत्या के मिशन को जन्म दे दिया।

धीरज ने 29-30 मई को अपने जेल साथी राजवीर द्वारा दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क किया। कॉल रिसीव करने वाला मो. सैफ खान था, जिसने बिना किसी परिचय के कहा कि सिग्नल एप इंस्टॉल करो, उस पर बात करेंगे। और यहीं से मुखिया की हत्या की पटकथा शुरू हुई।

पटना से लखीसराय तक मौत का सफर

मो. सैफ ने धीरज को 3 जून की सुबह 8 बजे पटना जंक्शन बुलाया। हनुमान मंदिर के पास उनकी मुलाकात हुई। यहीं पर सैफ ने मुखिया चंदन डोमू की हत्या की पूरी प्लानिंग शेयर की।

पांच लाख का कॉन्ट्रैक्ट तय हुआ, जिसमें सैफ और धीरज की बराबर हिस्सेदारी थी। दो अन्य शूटरों को अलग से पैसे दिए जाने थे। उसी दिन धीरज सैफ के साथ ट्रेन से लखीसराय के लिए रवाना हुआ। लेकिन उसी ट्रेन के दूसरे डिब्बे में दो और शूटर बैठे थे, जिनकी जानकारी धीरज को जानबूझकर नहीं दी गई।

लखीसराय स्टेशन पर उतरने के बाद चारों शूटर महादेव सिनेमा पहुंचे। वहां से उन्हें होटल संगम में ठहराया गया। पांच जून को होटल मैनेजर ने जगह खाली करवा ली। फिर असली मोहरा मुकेश उर्फ ​​उमाशंकर सिंह आया, जिसने होटल लक्ष्मी केदार में कमरा नंबर 107 अपने नाम से बुक कराया और सबके खाने-पीने का इंतजाम किया।

हत्या टली, अपराधी देवघर शिफ्ट हुए

छह जून को सैफ को खबर मिली कि मुखिया चंदन आठ दिनों की ट्रेनिंग पर बाहर गया है। फिर प्लान बदला गया। धीरज और बाकी शूटरों को देवघर भेजा गया। वे दीपसुचि होटल पहुंचे और वहां शिवम भारद्वाज उर्फ ​​गोलू ने मैनेजर से संपर्क कर पांचवीं मंजिल पर कमरा ले लिया। यहां अपराधियों ने कई दिन आराम से गुजारे।

14 जून: हत्या का आदेश वापस

चारों शूटर 14 जून को फिर लखीसराय लौटे। उस रात महादेव सिनेमा में रुकने के बाद उन्हें 15 जून को फिर होटल लक्ष्मी केदार में रुकवाया गया, लेकिन इस बार उनके पास अरविंद मिस्त्री की आईडी थी। मुकेश उसे साथ लेकर आया और योजना को धार दी।

17 जून: मिशन मर्डर… 7 बजे शुरू हुआ

17 जून की सुबह सैफ को मोबाइल पर आखिरी निर्देश मिला कि आज खेल खत्म करना है। चारों शूटर होटल से निकलकर महादेव सिनेमा पहुंचे। शाम 7 बजे वे टोटो से विद्यापीठ चौक पहुंचे और वहां मुकेश ग्लैमर बाइक पर मौजूद था, जबकि पांचवां शूटर अपाचे पर तैयार मिला।

पांच पिस्तौल, दो गोली, दो शव

रास्ते में टीटू और माधव ने पांच देसी पिस्तौल मुहैया कराई। वलीपुर में रात 11:30 बजे मुखिया चंदन कुमार डोमू जैसे ही स्कूल से बाहर निकले, उन पर गोलियों की बौछार कर दी गई। मौके पर ही उनकी मौत हो गई। उनके साथ मौजूद वार्ड सदस्य प्रतिनिधि चंदन कुमार को भी गोली मार दी गई, ताकि कोई गवाह जिंदा न बचे।

पूरे नेटवर्क में जमींदार परिवार

मुखिया की हत्या दियारा के जमींदार परिवार से दुश्मनी और तात्कालिक विवाद का नतीजा थी। यह एक सुनियोजित, बहुस्तरीय, पेशेवर अपराध ऑपरेशन था। कॉन्ट्रैक्ट किलिंग में शामिल लोगों में मुकेश, सैफ, धीरज, विकास भारद्वाज, शिवम भारद्वाज, टीटू, माधव और होटल मैनेजर के साथ-साथ गांव के कई अपराधियों का गिरोह शामिल है।

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