तेलंगाना के हैदराबाद में क्राइम से जुड़ा एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां दिनदहाड़े एक सोने के व्यापारी को लूटा जाता है और दूसरी तरफ वही जालसाज लोन रिकवरी एजेंटों के हाथों लूट जाते हैं.
दरअसल, यह अपराध किसी क्राइम थ्रिलर वाली पिक्चर से कम नहीं है. कुल मिलाकर हैदराबाद पुलिस ने एक बहुस्तरीय डकैती का पर्दाफाश कर दिया है. मामले में 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और चोरी की गई लूट का एक बड़ा हिस्सा बरामद कर लिया गया है.
खबर के मुताबिक, आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के रहने वाले दो भाई चंद्रशेखर वर्मा और नागराज कुमार वर्मा पहले से ही सोने के व्यापारियों को बाजार मूल्य से 5 प्रतिशत कम पर सोना देने का वादा करके ठगने के लिए जाने जाते थे. राधेश्याम नामक एक बिचौलिए की मदद से उन्होंने हैदराबाद के मोंडा मार्केट में एक अमीर व्यापारी हरिराम की पहचान की और उसे लूटने के लिए एक बड़ी योजना बनाई.
वर्मा बंधुओं ने 28 लोगों का एक गिरोह बनाया जिसमें आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और यहां तक कि एक बर्खास्त टीजीएसपी कांस्टेबल केशवुलु भी शामिल था. गिरोह को तीन उप-समूहों में बांट दिया किया गया था. एपी, उप्पल और लिंगमपल्ली. वे सिकंदराबाद के एक होटल में मिले और एक फिल्मी स्टाइल की डकैती की योजना बनाई.
18 जून को, यह पुष्टि करने के बाद कि व्यापारी के पास नकदी तैयार है, कांस्टेबल केशवुलु, विनोद कुमार, विजयशेखर राजू और तेजा के साथ एक किराए की कार में बैठकर उस स्थान पर पहुंचे. धोखेबाजों ने खुद राचकोंडा एसओटी पुलिस का आदमी बताया. राचकोंडा पुलिस बनकर जालसाजों ने व्यापारी को धमकाया और मोबाइल फोन के साथ 70 लाख रुपये की नकदी लूट ली. इस बीच, गिरोह के दो अन्य सदस्य, रामबाबू और भानुप्रकाश, पैसों से भरा बैग लेकर दोपहिया वाहन से फरार हो गए.
दूसरे धोखेबाजों ने पहले वाल जालसाजों को चकमा दिया
जब गिरोह को लगा कि उन्होंने सही अपराध को अंजाम दे दिया है तो वे थोड़े रिलेक्स हो गए. दूसरी तरफ लोन रिकवरी एजेंट रोशन सुनील, अरविंद, राजेश और सुरेंदर ने डिफॉल्टरों की जांच करते हुए जुबली बस स्टैंड के पास दोपहिया वाहन को देखा.
सवारों को ड्रग पेडलर समझकर (बाइक पर हुक्का पॉट दिखने के कारण), उन्होंने उन्हें तिरुमलागिरी के पास रोक लिया और उन्हें धमकाकर पैसों से भरा बैग छीन लिया. बैग में लाखों रुपये होने का एहसास होने पर रोशन और उनकी टीम गायब हो गई.
मास्टरमाइंड रोशन ने अपनी मां को 10 लाख रुपये दिए, जिन्होंने 6 लाख रुपये से सोने के गहने खरीदे. इसके बाद रोशन गिरफ्तारी के डर से दोस्तों के साथ गोवा भाग गया. इस बीच, डीसीपी रश्मि पेरुमल के नेतृत्व में हैदराबाद की मार्केट पुलिस ने बड़े पैमाने पर मामले की जांच शुरू की. 100 से अधिक अधिकारियों ने शहर भर से सीसीटीवी फुटेज को खंगालना शुरू किया. सफलता तब मिली जब उन्होंने रिकवरी एजेंटों द्वारा चिह्नित एक बाइक नंबर को ट्रैक किया.
काफी जांच पड़ताल के बाद आखिरकार पुलिस ने मामले में 28 में से 18 लोगों को गिरफ्तार कर लिया. इस दौरान पुलिस ने 43 लाख रुपये नकद, 6 लाख मुल्य के 59 ग्राम सोने के गहने, 2 कारें, 4 दोपहिया वाहन और 23 मोमबाइल फोन जब्त किए. वहीं, पुलिस बाकी 10 फरार संदिग्धों की तलाश कर रही है. आरोप है कि, जवाहरनगर पुलिस स्टेशन की सीमा के अंतर्गत यप्रल के ऋण वसूली एजेंट रोशन के खिलाफ पहले से ही NDPS का मामला लंबित था.
वास्तविकता कल्पना से कहीं अधिक नाटकीय है
पुलिस बनकर एक व्यापारी को लूटने से लेकर, और फिर असंबंधित एजेंटों द्वारा खुद को लूटे जाने तक, इस मामले ने अनुभवी जांचकर्ताओं को भी चौंका दिया है. जांच में शामिल एक अधिकारी ने कहा, “यह एक फिल्म के अंदर एक फिल्म की तरह था.


