केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने पटना में बिहार के सहकारिता मंत्री डॉ. प्रेम कुमार और खाद्य मंत्री लेशी सिंह से मुलाकात की। इस बैठक में केंद्र और राज्य के बीच 4800 करोड़ रुपये की बकाया राशि पर चर्चा हुई। जोशी ने ऑडिट रिपोर्ट मिलने के बाद राशि जारी करने का सशर्त आश्वासन दिया।
पटना। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग और केंद्र सरकार के बीच 4800 करोड़ रुपये का बकाया राशि लंबित रहने का मामला शीघ्र सुलझेगा। केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रहलाद जोशी ने शनिवार को पटना के होटल ताज में सहकारिता मंत्री डॉ. प्रेम कुमार और खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री लेशी सिंह के साथ बैठक में बकाया राशि जारी करने का सशर्त आश्वासन दिया।
- इस मौके पर खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार मौजूद थे। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ऑडिट रिपोर्ट मिलने के बाद बकाया राशि को जारी किया जाएगा। बैठक में शामिल सहकारिता मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने बताया कि लंबित बकाया राशि को जारी करने को लेकर केंद्रीय मंत्री गंभीर है, लेकिन उनका कहना था कि संबंधित राशि के बारे में आडिट रिपोर्ट केंद्र सरकार को नहीं मिली है, जबकि केंद्र का यह प्रविधान है।
- डॉ. प्रेम कुमार ने केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी के समक्ष पैक्सों एवं व्यापार मंडलों को अधिप्राप्ति में दिए जा रहे कमीशन, मिलिंग दर, परिवहन शुल्क, मंडी श्रम शुल्क और हैंडलिंग शुल्क की आकस्मिक दरों को 15 वर्षों से असंशोधित बताते हुए उनके पुनर्निर्धारण की मांग की।
- इस पर केंद्रीय मंत्री ने संबंधित शुल्कों में बढ़ोतरी का भरोसा दिलाते हुए कहा कि इस संबंध में एक कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी के प्रतिवेदन के आलोक में वांछित संशोधन किया जाएगा। मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने वर्तमान खरीफ विपणन मौसम में पैक्सों के पास बचे धान के समतुल्य चावल आपूर्ति की तिथि विस्तार करने की मांग की।
उन्होंने केंद्रीय मंत्री को बताया कि राज्य खाद्य निगम को चावल आपूर्ति करने की अंतिम तिथि 15 जून तक केंद्र सरकार ने निर्धारित की थी। इस दौरान राज्य में अधिप्राप्त 39.23 लाख टन के समतुल्य 26.61 लाख टन चावल की आपूर्ति राज्य खाद्य निगम को किया जाना था। निर्धारित तिथि तक 22.06 लाख टन चावल की आपूर्ति की जा सकी है, लेकिन तिथि समाप्त होने के कारण 4.55 लाख टन चावल की आपूर्ति ठप हो चुकी है।
तिथि विस्तारित नहीं करने पर राज्य सरकार की लगभग 1500 करोड़ की क्षति होने का अनुमान है। पिछले वर्ष चावल आपूर्ति की अंतिम तिथि 30 सितम्बर, 2024 तक निर्धारित थी। इस मांग पर केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने शीघ्र ही आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।


