सीबीआई ने पटना के पूर्व अतिरिक्त सीमा शुल्क आयुक्त रणविजय कुमार और चार अन्य सीमा शुल्क अधिकारियों सहित 29 लोगों के खिलाफ फर्जी निर्यात बिलों के आधार पर लगभग 100 करोड़ रुपये के जीएसटी दावों से जुड़े मामले में बिहार-झारखंड के सात ठिकानों पर छापेमारी की है। इस दौरान 100-100 ग्राम सोने के सात बिस्किट, आपत्तिजनक दस्तावेज और मोबाइल फोन बरामद हुए
पटना। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने पटना के सीमा शुल्क के तत्कालीन अतिरिक्त आयुक्त रणविजय कुमार और चार सीमा शुल्क अधिकारियों समेत 29 अन्य के खिलाफ दर्ज मामले में शनिवार को बिहार-झारखंड के सात ठिकानों पर छापेमारी की है।
- यह मामला फर्जी निर्यात बिलों के आधार पर करीब सौ करोड़ रुपये के जीएसटी क्लेम से जुड़ा है। सीबीआई की टीम ने पटना और पूर्णिया में दो-दो जबकि नालंदा-मुंगेर में एक-एक स्थानों पर छापेमारी की। इसके अलावा झारखंड के जमशेदपुर में भी आरोपितों के ठिकानों की तलाशी ली गई है
- इस छापेमारी में आरोपियों के ठिकानों से 100-100 ग्राम सोने की सात बिस्किट, आपत्तिजनक दस्तावेज और मोबाइल फोन आदि बरामद हुए हैं। सीबीआई की प्राथमिकी के अनुसार, इस मामले में सीमा शुल्क के जयनगर लैंड कस्टम स्टेशन के अधीक्षक नीरज कुमार और मनमोहन शर्मा (वर्तमान में सहायक आयुक्त कस्टम), भीमनगर लैंड कस्टम स्टेशन के अधीक्षक तरुण कुमार सिन्हा और भीमनगर लैंड कस्टम स्टेशन के अधीक्षक राजीव रंजन सिन्हा भी आरोपित हैं।
- इन सभी ने आपराधिक साजिश रचते हुए कुछ निजी व्यक्तियों, निर्यातक कंपनियों और 23 आयातक कंपनियों के साथ मिलकर फर्जी तरीके से टाइल्स और ऑटोमोबाइल पार्ट का निर्यात दिखाया। इसके बाद इन फर्जी बिलों के जरिए जीएसटी दावे लिए।
- आरोप है कि संदिग्ध फर्मों और निर्यातकों के द्वारा लगभग 100 करोड़ रुपये के फर्जी निर्यात बिलों के माध्यम से फर्जी जीएसटी दावों की धोखाधड़ी की गई है। आरोपी मिलीभगत करके कोशिश कर रहे थे कि फर्जी निर्यात बिल से या तो रिफंड प्राप्त किया जाए या टैक्स में गड़बड़ी करके रिफंड लिया जाए।
आरोपियों ने इसके लिए जीएसटी कार्यालय से कर रिफंड का दावा करने के लिए, संबंधित लोक सेवकों और निर्यातकों को प्रलोभन दिया गया और सरकारी खजाने को गलत तरीके से नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। आरोपियों ने अधिकारियों को सीधे या किसी तीसरे पक्ष के माध्यम से अनुचित लाभ देने का वादा किया।
सीबीआई इस पूरे नेटवर्क में शामिल अधिकारियों, निजी व्यक्तियों और कंपनियों की भूमिका की गहराई से जांच कर रही है।


