बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 से पहले राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। राजद ने राजग सरकार पर नए आयोगों में नेताओं के रिश्तेदारों को नियुक्त करने का आरोप लगाया है। तेजस्वी यादव ने एक वीडियो जारी कर दामाद आयोग में भी विशेष लोगों को प्राथमिकता देने की बात कही है। जदयू ने पलटवार करते हुए लालू-राबड़ी शासनकाल के मामा आयोग का जिक्र किया है।
पटना। विधानसभा चुनाव (Bihar Election 2025) से पहले बिहार में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप मर्यादा की सीमा लांघने को आतुर है। इस बार तो इसके लिए पर्याप्त आधार भी मिल गया है। नवगठित आयोगों और बोर्डों में सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के नेताओं के स्वजनों और रिश्तेदारों को स्थान दिए जाने पर विपक्षी राजद ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।
दो दिन पहले प्रेस-वार्ता कर सरकार को ‘जमाई आयोग’ बनाने की राय दे चुके तेजस्वी यादव ने मंगलवार को अपने एक्स हैंडल से एक वीडियो प्रस्तुत कर जमाई आयोग में भी विशेष लोगों को ही प्राथमिकता दिए जाने का उल्लेख किया है।
यह उल्लेख वस्तुत: कटाक्ष है और इसके लिए पैरोडी का बखूबी उपयोग किया गया है। एआई की सहायता से बनाए गए वीडियो और गीत में दामाद-दामाद का बार-बार उल्लेख संभवत: अपने आरोपों को पुष्ट करने की मंशा से किया गया है।
वीडियो के साथ तेजस्वी लिखते हैं कि ”अगर आप किसी के जमाई हैं तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा संरक्षित ‘बिहार राज्य दामाद आयोग’ में आवेदन नहीं कर सकते हैं, क्योंकि इसका सर्वाधिकार विशेष लोगों तक ही सीमित है।”
उल्लेखनीय है कि केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के दामाद, चिराग पासवान के बहनोई और राज्य के मंत्री अशोक चौधरी के दामाद सहित सरकार में उच्चाधिकार प्राप्त सेवानिवृत्त अधिकारी की पत्नी को इन आयोगों-बोर्डों में अध्यक्ष से लेकर सदस्य तक का पद मिला है।
राजद का कहना है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सार्वजनिक रूप से वंशवाद की राजनीति का विरोध करते हैं, लेकिन स्वयं उसी राह का अनुकरण कर रहे।
प्रतिक्रिया में जदयू लालू-राबड़ी राज में अघोषित ‘मामा आयोग’ का उल्लेख कर रहा। उसका संकेत वस्तुत: उस दौर में अतिशय सक्रिय रहे तेजस्वी के मामा साधु यादव और सुभाष यादव की ओर है।


