तिरुवनंतपुरम: दिव्यांग नाबालिग किशोरी के यौन उत्पीड़न मामले में तिरुवनंतपुरम की एक विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपी रिश्तेदार को कठोर कारावास और भारी जुर्माने की सजा सुनाई है.
इस संबंध में कोर्ट की न्यायाधीश आर. रेखा ने 41 वर्षीय आरोपी राजीव को 47 साल के सश्रम कारावास और 25,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई. वहीं जुर्माना न भरने पर आठ महीने की अतिरिक्त कैद की सजा भुगतनी होगी.
घटना 25 सितंबर, 2020 को सुबह करीब 11:45 बजे हुई, जब पीड़िता घर पर अकेली थी. पीड़िता की बड़ी बहन के लौटने पर उसे इस घटना का पता चला.
बड़ी बहन घर पहुंची तो उस दौरान आरोपी वहां पर मौजूद था, जिसे बड़ी बहन ने डंडा लेकर भगा दिया. वहीं घटना में पीड़िता के निजी अंगों में गंभीर चोटें आईं. दोनों बहनों की चीख सुनकर पड़ोसी भागकर उनके घर पहुंचे और मामले की जानकारी पुलिस को दी.
पुलिस की जांच के दौरान पता चला कि आरोपी के द्वारा पीड़िता को रसोई में ले जाकर मारपीट की गई और फिर यौन शोषण किया गया. जांच में यह भी पता चला कि आरोपी ने पहले भी दो पीड़िता के साथ रेप किया था, लेकिन उसे डरा-धमकाकर चुप करा दिया था. कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि आरोपी ने डाउन सिंड्रोम से पीड़ित नाबालिग पर क्रूरतापूर्वक हमला किया था, किसी भी प्रकार की दया का पात्र नहीं है.
इस मामले में अभियोजन पक्ष का प्रतिनिधित्व विशेष लोक अभियोजक आरएस विजय मोहन ने किया. जबकि अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष 31 गवाह, 31 दस्तावेज और तीन महत्वपूर्ण साक्ष्य पेश किए. नेदुमनगड के पुलिसकर्मी सुनील गोपी, वी. राजेश कुमार और पीएस विनोद ने जांच की. फास्ट-ट्रैक कोर्ट द्वारा दिए गए इस फैसले को ऐसे जघन्य अपराधों के खिलाफ एक सख्त चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है.


