Saturday, April 11, 2026

जज ने कविता लिख दुष्कर्मी को सुनाई फांसी, कहा ‘बच्ची ने सिसकियां ले मम्मी-पापा को याद किया’

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90 दिन के अंदर सिवनी मालवा कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला. 6 साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के आरोपी को फांसी की सजा.

सिवनी मालवा: नर्मदापुरम के सिवनी मालवा में 6 साल की नाबालिग बालिका को इंसाफ मिल गया है. दुष्कर्म एवं हत्या के आरोपी अजय वाडीवा को प्रथम जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश तबस्सुम खान ने फांसी की सजा सुनाई है. शुक्रवार शाम को जज ने मार्मिक कविता लिखते हुए इस फैसले को सुनाया है. न्यायालय ने आरोपी पर 3000 का जुर्माना एवं दुष्कर्म एवं हत्या के अपराध के लिए धारा 137(2), 64, 65(2), 103(1), 66 बीएनएस 5 (एम), 6 पॉक्सो में मृत्युदंड एवं पीडिता के माता-पिता को चार लाख रुपये का प्रतिकर स्वरूप दिये जाने का आदेश दिया है.

दुष्कर्म के बाद हत्या, आरोपी को फांसी
एडीपीओ (Assistant District Prosecution Officer) मनोज जाट ने बताया कि, ”घटना दो जनवरी 2025 की रात की है. आरोपी अजय 6 वर्ष की मासूम बालिका को घर से उठाकर लेकर गया और नहर के किनारे झाड़ियां में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया. बालिका जब चिल्लाई तो उसका मुंह दबाकर उसकी हत्या कर दी.” उन्होंने बताया कि, ”आरोपी ने शव को झाड़ियां में फेंक दिया. सिवनी मालवा पुलिस ने 24 घंटे में ही आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट के समक्ष 10 दिन के भीतर ही चालान प्रस्तुत किया. जिसके बाद कोर्ट ने 90 दिन के भीतर ही यह फैसला सुनाया है.”

90 दिन के भीतर आया फैसला
उन्होंने बताया कि, ”यह मध्य प्रदेश का पहला फैसला है जो 90 दिन के भीतर नए कानून लागू होने के बाद हुआ है. सिवनी मालवा के इतिहास में मेरे नॉलेज के अनुसार यह पहला मामला है, जिसमें फांसी की सजा आरोपी को दी गई है. मृतक पीड़िता के संबंध में अभियोजन मनोज जाट, एडीपीओ/विशेष लोक अभियोजक द्वारा कवि की यह पंक्तियां अंतिम बहस में प्रस्तुत की थीं.

“वो छोटी सी बच्ची थी, ढंग से बोल ना पाती थी. देख के जिसकी मासूमियत, उदासी मुस्कान बन जाती थी. जिसने जीवन के केवल, पांच बसंत ही देखे थे, उसपे ये अन्याय हुआ, ये कैसे विधि के लेखे थे. एक छः साल की बच्ची पे, ये कैसा अत्याचार हुआ. एक बच्ची को बचा सके ना, कैसा मुल्क लाचार हुआ. उस बच्ची पे जुल्म हुआ, वो कितनी रोई होगी, मेरा कलेजा फट जाता है, तो माँ कैसे सोयी होगी. जिस मासूम को देखके मन में, प्यार उमड़ के आता है. देख उसी को मन में कुछ के, हैवान उत्तर क्यों आता है. कपड़ों के कारण होते रेप, जो कहे उन्हें बतलाऊ मैं. आखिर छः साल की बच्ची को, साड़ी कैसे पहनाऊँ मैं. अगर अब भी हम ना सुधरे तो, एक दिन ऐसा आएगा. इस देश को बेटी देने में, भगवान भी जब घबराएगा.”

जज तबस्सुम खान ने अपने निर्णय में पीड़िता के संबंध में यह पंक्तियाँ लेख की हैं:-
2 से 3 जनवरी 2025 की थी वो दरमियानी रात,
जब कोई नहीं था मेरे साथ.
इठलाती, नाचती छः साल की परी थी,
मैं अपने मम्मी-पापा की लाड़ली थी.
सुला दिया था उस रात बड़े प्यार से माँ ने मुझे घर पर,
पता नहीं था नींद में मुझे ले जाएगा.
“वो” मौत का साया बनकर.
जब नींद से जागी, तो बहुत अकेली और डरी थी मैं,
सिसकियों ले लेकर मम्मी-पापा को याद बहुत करी थी मैं.
न जाने क्या-क्या किया मेरे साथ,
मैं चीखती थी, चिल्लाती थी, लेकिन किसी ने न सुनी मेरी आवाज.
थी गुडियों से खेलने की उम्र मेरी, पर उसने मुझे खिलोनी बना दिया.
“वो” भी तो था तीन बच्चों का पिता,
फिर मुझे क्यों किया अपनो से जुदा.
खेल खेलकर मुझे तोड़ दिया, फिर मेरा मुंह दबाकर, मरता हुआ झाडियों में छोड़ दिया.
हां मैं हू निर्भया, हां फिर एक निर्भया, एक छोटा सा प्रश्न उठा रही हूं:-
जो नारी का अपमान करे, क्या वो मर्द हो सकता हैं क्या जो इंसाफ निर्भया को मिला, वह मुझे मिल सकता है.

24 घंटे में आरोपी हुआ था गिरफ्तार
सिवनी मालवा थाना प्रभारी अनूप उईके ने बताया कि, ”सिवनी मालवा में यह दुखद घटना 3 जनवरी की रात घटित हुई थी. जिसमें एक गांव में 6 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी थी. इसके बाद तत्काल सिवनी मालवा पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को 24 घंटों के अंदर गिरफ्तार कर लिया था. घटना को लेकर परिजन और ग्रामीणों में आक्रोश था, लोग आरोपी को फांसी देने की मांग कर रहे थे. न्यायालय का जो फैसला आया है उसमें आरोपी को फांसी की सजा से दंडित किया गया है. हम पीड़िता और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने में सफल रहे हैं.”

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