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नई दिल्ली: जब कोई आईसीसी इवेंट निर्धारित होता है, तो मेजबान देश का बहुत महत्व होता है. क्योंकि वह एक बड़े इवेंट की मेजबानी करते हैं, इसलिए आमतौर पर सारा ध्यान मेजबान देश पर ही होता है. मेजबान होने के ज्यादातर टीमों खुद व खुद टूर्नामेंट की प्रतिभागी भी बन जातीं हैं, क्योंकि मैच उनकी धरती पर खेले जाने वाले होते हैं. चैंपियंस ट्रॉफी का चल रहा संस्करण टूर्नामेंट के इतिहास का नौवां संस्करण है और इसकी मेजबानी पाकिस्तान और यूएई कर रहे हैं.
हालांकि, चैंपियंस ट्रॉफी में कुछ बार ऐसा दुर्लभ मामला देखने को मिला है, जब मेजबान देश ने टूर्नामेंट को होस्ट तो किया है लेकिन टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं लिया है. चल रहा संस्करण पाकिस्तान और यूएई में खेला जा रहा है. यूएई प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले रहा है, लेकिन वे टूर्नामेंट की मेजबानी कर रहे हैं.
हालांकि, भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण संबंधों के कारण यह स्थिति पैदा हुई है. भारत ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पाकिस्तान जाने से इनकार कर दिया है, इसलिए वह अपने सभी मैच दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम, दुबई में खेल रहे हैं.
चैंपियंस ट्रॉफी के पहले संस्करण, जिसे उस समय आईसीसी नॉकआउट ट्रॉफी के नाम से जाना जाता था. उसकी मेजबानी बांग्लादेश ने की थी, लेकिन वह टूर्नामेंट का हिस्सा नहीं थे. दरअसल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने देश में खेल को बढ़ावा देने और खेल की वैश्विक पहुंच का विस्तार करने के लिए बांग्लादेश को मेजबानी के अधिकार दिए थे. आयोजन की मेजबानी करने के बावजूद टीम ने इसमें भाग नहीं लिया क्योंकि वह उस समय टेस्ट राष्ट्र नहीं थे और उन्हें अभी तक आईसीसी द्वारा टेस्ट का दर्जा नहीं दिया गया था.
उन्होंने नवंबर 2000 में भारत के खिलाफ ढाका में पहला टेस्ट खेला और टेस्ट टीम का दर्जा हासिल कर लिया. बांग्लादेश ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी क्षमता दिखाई, 1997 ICC ट्रॉफी जीती और 1999 क्रिकेट विश्व कप के लिए क्वालीफाई किया. इसके बाद से बांग्लादेश की टीम ने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा.


