नई दिल्ली, 4 नवंबर 2026: केंद्र सरकार के रिटायर होने वाले कर्मचारियों के लिए पेंशन कम्यूटेशन को लेकर अहम जानकारी सामने आई है। डिपार्टमेंट ऑफ पेंशन एंड पेंशनर्स वेलफेयर (DoPPW) ने चार ऑफिस मेमोरेंडम जारी कर आवेदन की समय-सीमा, मेडिकल जांच और विभागीय या न्यायिक कार्यवाही से जुड़े मामलों पर स्थिति स्पष्ट की है।
हालांकि, पेंशन का अधिकतम 40 प्रतिशत हिस्सा एकमुश्त लेने और कम्यूट की गई पेंशन को 15 साल बाद बहाल करने के नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। आइए जानते हैं पेंशन कम्यूटेशन से जुड़ी पांच जरूरी बातें।
1. क्या है 40% पेंशन कम्यूटेशन का नियम?
पेंशन कम्यूटेशन का मतलब रिटायरमेंट के समय अपनी मासिक पेंशन का एक हिस्सा एकमुश्त राशि के रूप में प्राप्त करना है। केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन कम्यूटेशन) नियमों के तहत कर्मचारी अपनी पेंशन का अधिकतम 40 प्रतिशत हिस्सा कम्यूट करा सकते हैं।
उदाहरण के तौर पर, यदि किसी कर्मचारी की बेसिक पेंशन 50,000 रुपये है और वह 40 प्रतिशत कम्यूटेशन का विकल्प चुनता है, तो उसकी पेंशन का 20,000 रुपये वाला हिस्सा कम्यूटेशन के आधार पर एकमुश्त भुगतान के लिए लिया जाएगा। इसके बाद उसकी मासिक पेंशन घटकर 30,000 रुपये रह जाएगी।
एकमुश्त मिलने वाली राशि का निर्धारण सरकार द्वारा तय फॉर्मूले के आधार पर किया जाता है।
2. 15 साल बाद बहाल हो जाती है पूरी पेंशन
कम्यूटेशन के कारण पेंशन में हुई कटौती स्थायी नहीं होती है। नियम 10-A के अनुसार, कम्यूट की गई पेंशन का हिस्सा 15 साल पूरे होने के बाद दोबारा बहाल कर दिया जाता है।
इस अवधि की गणना रिटायरमेंट की तारीख से नहीं, बल्कि उस तारीख से होती है जिस दिन पेंशन में कटौती शुरू हुई थी।
उदाहरण के लिए, यदि किसी कर्मचारी की मूल पेंशन 50,000 रुपये थी और कम्यूटेशन के बाद उसे 30,000 रुपये मासिक पेंशन मिल रही थी, तो निर्धारित 15 साल पूरे होने पर कम्यूट किया गया हिस्सा भी बहाल हो जाएगा।
3. किन कर्मचारियों के लिए मेडिकल जांच जरूरी?
नियम 18 के तहत कुछ श्रेणियों के कर्मचारियों को पेंशन कम्यूटेशन से पहले मेडिकल जांच करानी होती है। इनमें शामिल हैं:
- बीमारी के कारण इनवैलिड पेंशन पर रिटायर होने वाले कर्मचारी।
- दंड के तौर पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति पाने वाले कर्मचारी।
- अनुकंपा भत्ता (Compassionate Allowance) प्राप्त करने वाले कर्मचारी।
- सामान्य रिटायरमेंट के एक साल के भीतर कम्यूटेशन के लिए आवेदन नहीं करने वाले कर्मचारी।
इन मामलों में कम्यूटेशन की प्रक्रिया पूरी करने से पहले मेडिकल जांच कराना जरूरी हो सकता है।
4. किन कर्मचारियों को मेडिकल जांच से छूट मिल सकती है?
नियमों के अनुसार, सामान्य प्रक्रिया के तहत रिटायर होने वाले कर्मचारी यदि निर्धारित एक साल की अवधि के भीतर कम्यूटेशन के लिए आवेदन करते हैं, तो उन्हें मेडिकल जांच से छूट मिल सकती है।
इसके अलावा, किसी कंपनी या कॉर्पोरेशन में शामिल होने अथवा पद समाप्त होने के कारण पेंशन पाने वाले कर्मचारियों के लिए भी निर्धारित शर्तों के तहत मेडिकल जांच से छूट का प्रावधान बताया गया है।
इसलिए आवेदन की तारीख और कर्मचारी की सेवा संबंधी स्थिति महत्वपूर्ण है।
5. विभागीय या न्यायिक जांच लंबित होने पर क्या होगा?
जिन कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय या न्यायिक कार्यवाही चल रही होती है, उन्हें नियम 8 के तहत अनंतिम पेंशन (Provisional Pension) मिल सकती है।
हालांकि, कार्यवाही पूरी होने और नियमित पेंशन स्वीकृत होने तक वे अनंतिम पेंशन का कम्यूटेशन नहीं करा सकते।
जांच पूरी होने और पेंशन मंजूर होने के बाद कर्मचारी कम्यूटेशन के लिए आवेदन कर सकते हैं। यदि पेंशन स्वीकृत होने की तारीख से एक साल के भीतर आवेदन किया जाता है, तो मेडिकल जांच की जरूरत नहीं होगी।
कर्मचारियों के लिए क्या है सबसे जरूरी बात?
पेंशन कम्यूटेशन का विकल्प चुनने से पहले कर्मचारियों को यह समझना चाहिए कि एकमुश्त रकम मिलने के बाद उनकी मासिक पेंशन कम हो जाती है। कम्यूटेशन की अधिकतम सीमा 40 प्रतिशत है और कम्यूट की गई पेंशन 15 साल बाद बहाल होती है।
आवेदन करने से पहले अपनी सेवा संबंधी स्थिति, मेडिकल जांच की पात्रता और आवेदन की समय-सीमा की जानकारी संबंधित पेंशन कार्यालय से जरूर प्राप्त कर लें।
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