Wednesday, November 4, 2026

सीएम के निर्देश के बाद भी नहीं बना विश्वविद्यालय सेवा आयोग, 6000 से अधिक नियुक्तियां प्रभावित

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Ranchi Education News | 4 नवंबर 2026: झारखंड के सरकारी विश्वविद्यालयों में शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्ति का इंतजार लंबा होता जा रहा है। विश्वविद्यालय सेवा आयोग का गठन अब तक नहीं होने से 6000 से अधिक नियुक्तियां प्रभावित होने की बात सामने आई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जुलाई 2026 में अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर आयोग गठित कर उसे क्रियाशील बनाने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद करीब साढ़े तीन महीने बाद भी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।

आयोग के गठन में देरी का असर नियमित नियुक्तियों के साथ शिक्षकों की प्रोन्नति और झारखंड पात्रता परीक्षा (JET) के आयोजन पर भी पड़ रहा है। उच्च शिक्षा विभाग से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, आयोग के गठन से संबंधित फाइल फिलहाल वित्त विभाग में लंबित है।

6000 से अधिक नियुक्तियां प्रभावित, आयोग का इंतजार

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 13 जुलाई 2026 को उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में विश्वविद्यालय सेवा आयोग के गठन को लेकर निर्देश दिए थे। इसका उद्देश्य विश्वविद्यालयों में अधिकारियों, शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों के रिक्त पदों पर नियुक्ति तथा प्रोन्नति की प्रक्रिया को समयबद्ध बनाना था।

हालांकि, निर्धारित समयसीमा के बाद भी आयोग का गठन नहीं हो सका। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इससे 6000 से अधिक नियुक्तियां प्रभावित हुई हैं। इनमें करीब 3500 शिक्षकों के पद, अधिकारियों के 23 पद और लगभग 1500 शिक्षकेतर कर्मचारियों के पद शामिल बताए गए हैं। चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों की नियुक्ति आउटसोर्सिंग के माध्यम से किए जाने की बात भी सामने आई है।

कानून में प्रावधान, फिर भी धरातल पर नहीं बना आयोग

झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 में विश्वविद्यालय सेवा आयोग के गठन का प्रावधान किया गया है। 28 अप्रैल 2026 को जारी अधिनियम के अनुसार, आयोग का मुख्यालय रांची में निर्धारित किया गया है।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत आयोग में एक अध्यक्ष, एक प्रशासनिक सदस्य और तीन अन्य सदस्य होंगे। सभी पद पूर्णकालिक होंगे और नियुक्तियां राज्य सरकार करेगी।

अधिनियम में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के लिए प्रशासनिक, शैक्षणिक और न्यायिक अनुभव से जुड़ी योग्यताओं का प्रावधान है। अध्यक्ष के पद पर राज्य सरकार के प्रधान सचिव, भारत सरकार के सेवानिवृत्त अपर सचिव, पूर्व कुलपति या किसी संस्थान के निदेशक को नियुक्त किए जाने का प्रावधान बताया गया है।

प्रशासनिक सदस्य के लिए वरिष्ठ प्रशासनिक अनुभव वाले अधिकारी अथवा निर्धारित अनुभव रखने वाले सेवानिवृत्त प्रोफेसर का प्रावधान है। अन्य सदस्यों में प्रशासनिक, शैक्षणिक और न्यायिक क्षेत्र से जुड़े अनुभवी लोगों को शामिल किया जाना है।

कानूनी प्रावधान होने के बावजूद अध्यक्ष और सदस्यों के चयन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाने से आयोग का काम शुरू नहीं हो सका है।

विश्वविद्यालयों में पढ़ाई और शोध पर पड़ रहा असर

नियमित शिक्षकों के हजारों पद खाली रहने से विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियों पर असर पड़ने की चिंता बढ़ गई है। इसका प्रभाव कक्षाओं के संचालन, प्रैक्टिकल, शोध निर्देशन और परीक्षा के मूल्यांकन जैसी प्रक्रियाओं पर पड़ सकता है।

कई विभागों में शिक्षकों की कमी पूरी करने के लिए अतिथि और आवश्यकता-आधारित शिक्षकों की मदद ली जा रही है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के विश्वविद्यालयों में 600 से अधिक अतिथि और आवश्यकता-आधारित शिक्षक कार्यरत हैं।

स्थायी नियुक्तियों में देरी के कारण विश्वविद्यालयों के सामने शैक्षणिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने की चुनौती बनी हुई है।

JET परीक्षा पर भी बना हुआ है असमंजस

झारखंड पात्रता परीक्षा (JET) के आयोजन की जिम्मेदारी नए अधिनियम के तहत विश्वविद्यालय सेवा आयोग को दी गई है। ऐसे में आयोग का गठन नहीं होने से अगली परीक्षा की समयसीमा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में लगभग 18 वर्षों के अंतराल के बाद वर्ष 2025 में JET परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा के लिए छह जिलों में 434 केंद्र बनाए गए थे और करीब 1.75 लाख अभ्यर्थियों ने इसमें हिस्सा लिया था। बाद में परीक्षा रद्द कर दी गई।

अब नई परीक्षा के आयोजन को लेकर अभ्यर्थियों की नजर आयोग के गठन और आगे की आधिकारिक घोषणा पर है। इसका असर पीएचडी में दाखिले और असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों पर भी पड़ रहा है।

शिक्षकों की प्रोन्नति में भी वर्षों की देरी

विश्वविद्यालय शिक्षक संगठनों के अनुसार, वर्ष 2008 में नियुक्त शिक्षकों की प्रोन्नति का मामला लंबे समय से लंबित रहा है। अक्टूबर 2025 में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने इस बैच के 488 असिस्टेंट प्रोफेसरों को स्टेज-1 से स्टेज-2 में प्रोन्नति देने की प्रक्रिया शुरू की थी।

रिपोर्ट में बताया गया है कि JPSC की परीक्षाओं से संबंधित जांच और आयोग के अध्यक्ष सहित सदस्यों के इस्तीफे के बाद स्टेज-2 से स्टेज-4 तक की प्रोन्नति प्रक्रिया भी प्रभावित हुई। इसका असर विश्वविद्यालयों में वरिष्ठ शैक्षणिक पदों की उपलब्धता पर पड़ने की बात कही गई है।

प्रोन्नति में देरी से शिक्षकों के करियर, वेतन संबंधी लाभ और उच्च शैक्षणिक पदों पर पहुंचने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के सैकड़ों पद खाली

झारखंड हाईकोर्ट में विश्वविद्यालयों की ओर से दिसंबर 2024 में प्रस्तुत हलफनामों में शिक्षकों के बड़ी संख्या में पद रिक्त होने की जानकारी दी गई थी। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कई प्रमुख विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद लंबे समय से खाली हैं।

विश्वविद्यालयअसिस्टेंट प्रोफेसर के स्वीकृत पदरिक्त पद
रांची विश्वविद्यालय850528
सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय809575
विनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय536373
कोल्हान विश्वविद्यालय753508

नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में भी असिस्टेंट प्रोफेसर के 326 पद रिक्त बताए गए हैं। डीएसपीएमयू में नियमित नियुक्ति के 54 और बैकलॉग के 25 पद खाली होने की जानकारी दी गई है।

इसके अतिरिक्त प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के पद भी कई विश्वविद्यालयों में रिक्त हैं। रिपोर्ट में कोल्हान विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के 64, रांची विश्वविद्यालय में 46, नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय और बीबीएमकेयू में 21-21 तथा डीएसपीएमयू में 20 पद खाली बताए गए हैं।

एसोसिएट प्रोफेसर के पदों में भी रांची विश्वविद्यालय में 121, नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में 54, बीबीएमकेयू और सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय में 42-42 तथा कोल्हान विश्वविद्यालय में 23 पद रिक्त बताए गए हैं।

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