पटना | 2 नवंबर 2026 | Bharat Superfast News
बिहार में बाढ़ के बाद नदियों के किनारे और आसपास के क्षेत्रों में जमा होने वाली बालू और गाद का अब वैज्ञानिक तरीके से आकलन किया जाएगा। इसके लिए राज्य के 22 बाढ़ प्रभावित जिलों में सर्वे कराने की योजना बनाई गई है। खान एवं भूतत्व विभाग ड्रोन, सैटेलाइट और आधुनिक सर्वे तकनीकों की मदद से बालू तथा गाद की वास्तविक मात्रा, गुणवत्ता और जमाव की मोटाई का पता लगाएगा।
सर्वेक्षण पूरा होने के बाद उपलब्ध संसाधनों के उपयोग और नीलामी को लेकर रोडमैप तैयार किया जाएगा। इससे सरकारी राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ गाद के व्यावसायिक इस्तेमाल की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी।
बालू और गाद की मात्रा के आधार पर बनेगी नीलामी की योजना
बिहार में सड़क, पुल, भवन और अन्य आधारभूत संरचनाओं के निर्माण में बालू की मांग बनी रहती है। ऐसे में नदियों के किनारे जमा बालू का सही आकलन कर उसके उपयोग और नीलामी की व्यवस्था विकसित करने की तैयारी है।
सर्वे के जरिए यह जानकारी जुटाई जाएगी कि किस क्षेत्र में कितनी बालू और गाद मौजूद है। इसके साथ उनकी गुणवत्ता, प्रकृति और परत की मोटाई का भी अध्ययन होगा।
विभाग का उद्देश्य उपलब्ध संसाधनों का व्यवस्थित उपयोग करना और राजस्व के नए अवसर तलाशना है। हालांकि, बालू के उठाव से जुड़े फैसलों में नदी के प्राकृतिक प्रवाह, भौगोलिक स्थिति और पर्यावरणीय पहलुओं को ध्यान में रखना जरूरी होगा।
गाद से ईंट निर्माण की संभावनाओं का होगा आकलन
बाढ़ के बाद खेतों, दियारा क्षेत्रों और नदी के आसपास बड़ी मात्रा में गाद जमा हो जाती है। कई स्थानों पर यह स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का कारण बनती है। अब विभाग इस गाद की उपयोगिता का भी पता लगाएगा।
गाद का इस्तेमाल ईंट निर्माण में किया जा सकता है या नहीं, इसकी जांच तकनीकी आधार पर होगी। इसके लिए मिट्टी की संरचना, चिकनाई, नमी और अन्य गुणवत्ता संबंधी पहलुओं का परीक्षण किया जाएगा।
यदि गाद ईंट निर्माण के लिए उपयुक्त पाई जाती है, तो इसे संबंधित कारोबारियों के लिए कच्चे माल के रूप में उपलब्ध कराने की संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं।
ड्रोन और सैटेलाइट से तैयार होगा 3D डिजिटल मॉडल
सर्वेक्षण में आधुनिक तकनीक की अहम भूमिका होगी। नदी के किनारों, दियारा क्षेत्रों और बालू जमाव वाले स्थानों की ड्रोन से तस्वीरें ली जाएंगी। इसके लिए एरियल लिडार और फोटोग्रामेट्री जैसी तकनीकों के इस्तेमाल की योजना है।
इनकी मदद से 3D डिजिटल एलिवेशन मॉडल तैयार किया जाएगा। इससे अलग-अलग स्थानों पर बालू और गाद की परत की मोटाई तथा जमीन की बनावट का आकलन करने में मदद मिलेगी।
भौगोलिक सूचना प्रणाली यानी GIS के माध्यम से संबंधित जिलों का बेस मैप भी तैयार किया जाएगा। वहीं, सैटेलाइट तस्वीरों की मदद से मानसून से पहले और बाद में नदी के विस्तार की तुलना की जाएगी। इससे नए सैंड बार और गाद जमाव वाले क्षेत्रों की पहचान की जा सकेगी।
विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों के विशेषज्ञों की ली जाएगी मदद
सर्वेक्षण को तकनीकी रूप से सटीक बनाने के लिए विभिन्न शैक्षणिक और वैज्ञानिक संस्थानों के विशेषज्ञों को शामिल करने की योजना है। इनमें पटना विश्वविद्यालय, मगध विश्वविद्यालय, IIT पटना, NIT और केंद्रीय भूजल बोर्ड के भूवैज्ञानिकों की भागीदारी प्रस्तावित है।
इसके अलावा हाइड्रोलॉजी और भूगोल के विशेषज्ञों के साथ स्थानीय परिस्थितियों की जानकारी रखने वाले लोगों की मदद भी ली जाएगी। नदी के प्रवाह, भौगोलिक बनावट और बालू-गाद के जमाव की प्रकृति को समझने के बाद सर्वेक्षण एजेंसियां अपनी रिपोर्ट तैयार करेंगी।
खान एवं भूतत्व मंत्री ने दी सर्वे की जानकारी
खान एवं भूतत्व मंत्री प्रमोद कुमार ने बताया कि बिहार में नदियों के किनारे जमा बालू और अलग-अलग क्षेत्रों में मौजूद सिल्ट का सर्वे कराया जाएगा। इसमें उनकी मात्रा, गुणवत्ता और प्रकार से संबंधित जानकारी जुटाई जाएगी।
मंत्री के अनुसार, सर्वेक्षण से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी। रिपोर्ट आने के बाद बालू और गाद के उपयोग तथा नीलामी को लेकर योजना तैयार करने का रास्ता साफ होगा।
सर्वे रिपोर्ट के बाद तय होगी आगे की रणनीति
22 बाढ़ प्रभावित जिलों में प्रस्तावित यह सर्वेक्षण बालू और गाद के उपलब्ध भंडार की पहचान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। इससे न केवल संसाधनों का वैज्ञानिक आकलन होगा, बल्कि गाद के वैकल्पिक उपयोग की संभावनाओं को भी समझा जा सकेगा।
हालांकि, नीलामी और उठाव की वास्तविक प्रक्रिया सर्वे रिपोर्ट, गुणवत्ता परीक्षण तथा संबंधित नियमों के आधार पर आगे बढ़ेगी।
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