Thursday, October 29, 2026

पीयूष गोयल का भरोसा, अमेरिका के साथ ट्रेड डील में सुरक्षित रहेंगे भारत के हित

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नई दिल्ली | 29 अक्टूबर 2026 | BharatSuperFastNews

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को लेकर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भरोसा जताया है कि इस समझौते में भारत के संवेदनशील हितों और घरेलू कारोबारियों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि डील की सभी शर्तें और विवरण सार्वजनिक होने के बाद लोगों को इसके संभावित लाभ समझ में आएंगे।

एक राष्ट्रीय सम्मेलन में संबोधन के दौरान गोयल ने समझौते की आलोचना करने वाले राजनीतिक दलों पर भी निशाना साधा। उनके अनुसार, इस समझौते का विरोध करने वालों को वैश्विक व्यापार की वास्तविकताओं और भारत के दीर्घकालिक आर्थिक हितों की पर्याप्त समझ नहीं है।

RCEP से बाहर रहने के फैसले को बताया सही

पीयूष गोयल ने वर्ष 2019 में क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी यानी RCEP समझौते में शामिल नहीं होने के भारत के फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि इस समझौते में शामिल होने से देश के घरेलू विनिर्माण क्षेत्र पर प्रतिकूल असर पड़ सकता था।

मंत्री ने आशंका जताई कि RCEP के तहत भारत में विदेशी, खासकर चीनी सामानों की आमद बढ़ सकती थी और इससे स्थानीय उत्पादकों के सामने कठिन प्रतिस्पर्धा खड़ी होती। उन्होंने तर्क दिया कि भारत को केवल दूसरे देशों के उत्पाद बेचने वाला बाजार बनने के बजाय अपने विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।

अमेरिका के साथ बातचीत में निर्यात को प्राथमिकता

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत का एक अहम उद्देश्य भारतीय उत्पादों के लिए अमेरिकी बाजार में बेहतर अवसर हासिल करना है। खबर के मुताबिक, दोनों देशों ने फरवरी में समझौते के पहले चरण के ढांचे को अंतिम रूप दिया था, लेकिन अमेरिका में कर और टैरिफ संबंधी नियमों में बदलाव के बाद शर्तों पर चर्चा जारी है।

भारत की कोशिश है कि उसके निर्यातकों को बांग्लादेश, वियतनाम और कंबोडिया जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले अनुकूल टैरिफ शर्तें मिलें। इससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ सकती है और अमेरिकी बाजार में उनकी पहुंच को लाभ मिल सकता है।

विनिर्माण और व्यापार में भारत की स्थिति मजबूत करने पर जोर

गोयल ने वैश्विक व्यापार में तुलनात्मक लाभ के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि भारत को ऐसे समझौतों की जरूरत है, जो घरेलू उद्योग, कारोबारियों और निर्यातकों के हितों के अनुकूल हों।

अमेरिका के साथ प्रस्तावित समझौते के वास्तविक प्रभाव का आकलन उसकी अंतिम शर्तें सामने आने के बाद ही किया जा सकेगा। टैरिफ में बदलाव, बाजार तक पहुंच और संवेदनशील घरेलू क्षेत्रों को मिलने वाली सुरक्षा इस डील के नतीजों को तय करने वाले प्रमुख पहलू होंगे।

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