सारण/बिहार | 29 अक्टूबर 2026 | BharatSuperFastNews
Bihar News: राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की सभी 17 सांगठनिक इकाइयों और प्रकोष्ठों को भंग करने के फैसले पर डॉ. रोहिणी आचार्य ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। सारण लोकसभा क्षेत्र से पूर्व प्रत्याशी रहीं रोहिणी आचार्य ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि पार्टी को मजबूत बनाने के लिए लालू प्रसाद यादव की विचारधारा और संगठनात्मक सिद्धांतों को प्राथमिकता देनी होगी।
राजद के पूर्व प्रवक्ता हरेलाल यादव के अनुसार, रोहिणी आचार्य ने संगठन में बदलाव के साथ-साथ समर्पित कार्यकर्ताओं को उचित स्थान देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
लालू प्रसाद यादव की विचारधारा को बताया अहम
रोहिणी आचार्य का कहना है कि लालू प्रसाद यादव ने लंबे समय तक समाज के वंचित और पिछड़े वर्गों के सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक सशक्तीकरण के लिए काम किया है। उनके मुताबिक, पार्टी के संस्थापक नेतृत्व की विचारधारा और कार्यकर्ताओं को महत्व देने की परंपरा को आगे बढ़ाना संगठन के लिए जरूरी है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि राजद अपने मूल सिद्धांतों के अनुरूप आगे बढ़ेगा और संगठन को मजबूत बनाने के लिए जमीनी स्तर पर काम करने वाले लोगों को उचित अवसर मिलेगा।
चुनावी हार के बाद संगठन में बदलाव की जरूरत थी
रोहिणी आचार्य ने संगठनात्मक इकाइयों को भंग करने के समय पर भी सवाल उठाया। उनके अनुसार, वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव और 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी को मिली हार के बाद ही संगठन में इस तरह के बदलाव किए जाने चाहिए थे।
उनकी टिप्पणी से स्पष्ट है कि वह संगठनात्मक पुनर्गठन को जरूरी मानती हैं, लेकिन उनके विचार में यह प्रक्रिया पहले शुरू होनी चाहिए थी।
जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को मिले जगह
रोहिणी आचार्य ने नए संगठन के गठन में उन कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देने की बात कही, जो लंबे समय से पार्टी के लिए निष्ठा और समर्पण के साथ काम कर रहे हैं।
उन्होंने ऐसे कार्यकर्ताओं को आगे लाने पर जोर दिया, जिन्हें लालू प्रसाद यादव की विचारधारा में विश्वास हो, संगठन की समझ हो और जो जनता के बीच रहकर संघर्ष करते हों। उनके मुताबिक, जमीनी स्तर पर सक्रिय और मेहनती कार्यकर्ताओं की भागीदारी से पार्टी को नई ऊर्जा मिल सकती है।
नए सिरे से संगठन खड़ा करने की चुनौती
राजद की सांगठनिक इकाइयों और सभी 17 प्रकोष्ठों को भंग किए जाने के बाद अब नए सिरे से संगठनात्मक ढांचा तैयार करने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। इस दौरान पदाधिकारियों के चयन, कार्यकर्ताओं की भूमिका और पार्टी की विचारधारा को संगठन में लागू करने जैसे मुद्दों पर ध्यान रहेगा।
रोहिणी आचार्य की प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है, जब राजद के संगठनात्मक ढांचे में बदलाव को लेकर चर्चा हो रही है। अब यह देखना होगा कि नए गठन में जमीनी कार्यकर्ताओं को कितनी प्राथमिकता मिलती है और पार्टी संगठन को मजबूत बनाने के लिए क्या कदम उठाती है।
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