28 अक्टूबर 2026 | BHARATSUPERFASTNEWS
Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने कल्याण विभाग के 13 चतुर्थ श्रेणी (वर्ग-IV) कर्मचारियों को पदोन्नति के मामले में राहत दी है। अदालत ने कर्मचारियों के प्रमोशन से संबंधित सरकारी आदेश को रद्द करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि रिकॉर्ड का सत्यापन करने के बाद, यदि याचिकाकर्ता अन्य निर्धारित शर्तों के अनुसार पात्र पाए जाते हैं, तो आठ सप्ताह के भीतर पदोन्नति का औपचारिक आदेश जारी किया जाए। इस प्रक्रिया में सीमित प्रतियोगिता परीक्षा पास करने की शर्त लागू नहीं होगी।
न्यायमूर्ति दीपक रोशन की एकल पीठ ने यह फैसला रामावतार सिंह मुंडा और अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। मामले में कर्मचारियों ने उस सरकारी आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उनकी पदोन्नति से संबंधित मांग खारिज कर दी गई थी।
2020 के सरकारी आदेश को हाईकोर्ट ने किया निरस्त
याचिकाकर्ताओं ने 30 अक्टूबर 2020 को जारी मेमो संख्या 2147 को चुनौती दी थी। विभाग की ओर से पहले कहा गया था कि वर्ग-IV से वर्ग-III में पदोन्नति के लिए सीमित प्रतियोगिता परीक्षा आयोजित करने की अधियाचना कर्मचारी चयन आयोग को भेजी जा चुकी है। इसलिए कर्मचारियों को आयोग की ओर से जारी विज्ञापन के आधार पर आवेदन करना चाहिए।
हालांकि, मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पदोन्नति की प्रक्रिया में हुई देरी और समान परिस्थितियों वाले कर्मचारियों के साथ किए गए व्यवहार पर विचार किया। इसके बाद कोर्ट ने संबंधित सरकारी आदेश को रद्द कर दिया।
कर्मचारियों ने 2012 में मिले प्रमोशन का दिया हवाला
याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि कल्याण विभाग ने 10 नवंबर 2012 को जारी मेमो संख्या 2667 के माध्यम से समान योग्यता रखने वाले वर्ग-IV कर्मचारियों को बिना परीक्षा के वर्ग-III में पदोन्नति दी थी।
कर्मचारियों ने इसी आधार पर अपने मामले में भी समान व्यवहार किए जाने की मांग की। उन्होंने यह भी बताया कि टाइपिस्ट, आवासीय विद्यालयों और प्रखंड कल्याण कार्यालयों में कई पद रिक्त हैं, जबकि संबंधित कर्मचारियों की पदोन्नति का मामला लंबे समय से लंबित है।
इससे पहले वर्ष 2018 में भी कर्मचारी अपनी मांग को लेकर हाईकोर्ट पहुंचे थे। उस समय अदालत ने उन्हें नया प्रतिनिधित्व देने का निर्देश दिया था।
परीक्षा में देरी को प्रमोशन रोकने का आधार नहीं माना
सुनवाई के दौरान अदालत ने पदोन्नति के लिए निर्धारित प्रक्रिया और परीक्षा आयोजित करने में हुई देरी पर गौर किया। उपलब्ध विवरण के अनुसार, संबंधित नियम वर्ष 2010 में बनाए गए थे, लेकिन लंबे समय तक परीक्षा आयोजित नहीं हुई। परीक्षा की प्रक्रिया और रूपरेखा से जुड़ी जानकारी भी 17 मार्च 2026 को सामने आई।
अदालत ने माना कि वर्ष 2019 में कर्मचारी चयन आयोग को अधियाचना भेजे जाने के बावजूद परीक्षा आयोजित नहीं होने का हवाला देकर कर्मचारियों की पदोन्नति रोकना उचित आधार नहीं है।
कोर्ट के समक्ष विभाग में पहले समान स्थिति वाले कर्मचारियों को बिना परीक्षा पदोन्नति दिए जाने का तथ्य भी आया। अदालत में सरकार के वकील इस समानता से जुड़े तथ्य का प्रभावी खंडन नहीं कर सके।
आठ सप्ताह में जारी करना होगा प्रमोशन का आदेश
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि संबंधित रिकॉर्ड का सत्यापन किया जाए। यदि 13 याचिकाकर्ता अन्य निर्धारित मानदंडों के अनुसार पदोन्नति के पात्र पाए जाते हैं, तो सीमित प्रतियोगिता परीक्षा पास करने की शर्त से छूट देते हुए आठ सप्ताह के भीतर औपचारिक आदेश जारी किया जाए।
अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए 30 अक्टूबर 2020 के सरकारी आदेश को निरस्त कर दिया। इस फैसले से संबंधित कर्मचारियों के पदोन्नति मामले में आगे की कार्रवाई का रास्ता खुला है।
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