28 अक्टूबर 2026 | BHARATSUPERFASTNEWS
Bihar College Teacher Promotion: बिहार के विश्वविद्यालयों से संबद्ध घाटानुदानित कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों की प्रोन्नति व्यवस्था में बदलाव किया गया है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, राज्यपाल एवं कुलाधिपति सचिवालय ने वर्ष 1992 में जारी प्रोन्नति संबंधी नियम को समाप्त करने का निर्णय लिया है। अब संबंधित कॉलेजों के शिक्षकों की प्रोन्नति करियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS) के तहत लागू प्रावधानों के अनुसार होगी।
इस निर्णय में धार्मिक और भाषायी अल्पसंख्यक कॉलेजों को भी शामिल किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, नई व्यवस्था को 23 सितंबर 1995 से प्रभावी माना जाएगा।
शिक्षकों की प्रोन्नति अब Career Advancement Scheme के तहत
राज्यपाल एवं कुलाधिपति सचिवालय की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, संबद्ध घाटानुदानित कॉलेजों के शिक्षकों की प्रोन्नति के लिए CAS के प्रावधान लागू होंगे।
इस व्यवस्था के अंतर्गत सहायक प्राध्यापक और सह-प्राध्यापक सहित शिक्षकों की विभिन्न श्रेणियों में प्रोन्नति संबंधित नियमों के अनुसार की जाएगी। प्रक्रिया विश्वविद्यालयों और उनके अंगीभूत कॉलेजों में लागू प्रावधानों के अनुरूप रखने की बात कही गई है।
प्रोन्नति के लिए संबंधित प्रभावी तिथि और समय-समय पर लागू CAS नियमों का पालन करना होगा।
1992 में जारी प्रोन्नति व्यवस्था समाप्त
रिपोर्ट के अनुसार, 14 सितंबर 1992 के पत्र के माध्यम से अधिसूचित उस व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है, जिसके तहत संबद्ध कॉलेजों के व्याख्याताओं को विश्वविद्यालय में प्रोफेसर पद पर समयबद्ध प्रोन्नति देने का प्रावधान था।
नई अधिसूचना में इस व्यवस्था को 23 सितंबर 1995 से प्रभावहीन माना गया है। इसके साथ ही CAS के अंतर्गत प्रोन्नति से जुड़े पूर्व प्रावधानों में भी इसी के अनुरूप बदलाव माना जाएगा।
किस निर्णय के आधार पर बदली गई व्यवस्था?
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यह फैसला चार कुलपतियों की समिति की अनुशंसा और उच्च शिक्षा विभाग से प्राप्त प्रस्ताव पर विचार करने के बाद लिया गया।
अधिसूचना राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह की ओर से जारी किए जाने की बात रिपोर्ट में कही गई है। निर्णय का उद्देश्य संबंधित कॉलेजों में शिक्षकों की प्रोन्नति के लिए लागू नियमों को निर्धारित CAS प्रावधानों के अनुरूप करना है।
किन कॉलेजों के शिक्षकों पर लागू होगा बदलाव?
रिपोर्ट के मुताबिक, यह बदलाव बिहार के विश्वविद्यालयों से संबद्ध घाटानुदानित कॉलेजों के शिक्षकों पर लागू होगा। इसमें धार्मिक और भाषायी अल्पसंख्यक कॉलेज भी शामिल हैं।
हालांकि, किसी शिक्षक की व्यक्तिगत प्रोन्नति, पात्रता, सेवा अवधि या वित्तीय लाभ पर इस निर्णय का क्या प्रभाव पड़ेगा, यह संबंधित नियमों, अधिसूचना और व्यक्तिगत सेवा रिकॉर्ड पर निर्भर करेगा। शिक्षकों को अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित विश्वविद्यालय या कॉलेज प्रशासन से जानकारी लेनी चाहिए।
शिक्षकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?
प्रोन्नति के नियम शिक्षकों के पद, करियर में आगे बढ़ने के अवसर और सेवा संबंधी लाभों से जुड़े होते हैं। ऐसे में CAS के तहत प्रोन्नति की व्यवस्था लागू होने से संबद्ध कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों के लिए संबंधित नियमों को समझना महत्वपूर्ण हो गया है।
शिक्षकों को सलाह दी जाती है कि वे नई अधिसूचना की प्रति प्राप्त करें और अपनी पात्रता तथा प्रोन्नति प्रक्रिया के संबंध में विश्वविद्यालय के आधिकारिक निर्देशों का पालन करें।
निष्कर्ष
बिहार के संबद्ध घाटानुदानित कॉलेजों में शिक्षकों की प्रोन्नति व्यवस्था में बदलाव की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 1992 के नियम को समाप्त कर CAS के प्रावधानों के तहत प्रोन्नति की व्यवस्था लागू की गई है और इसे 23 सितंबर 1995 से प्रभावी माना जाएगा।
इस फैसले के व्यावहारिक प्रभाव, पात्रता और सेवा संबंधी लाभों को समझने के लिए शिक्षकों को आधिकारिक अधिसूचना तथा संबंधित विश्वविद्यालय के निर्देशों की पुष्टि करनी चाहिए।
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