Tuesday, October 27, 2026

अनंत सिंह की बढ़ सकती हैं मुश्किलें? 30 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में जमानत पर सुनवाई.

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27 अक्टूबर 2026 | BHARATSUPERFASTNEWS

पटना: मोकामा के विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। दुलारचंद यादव हत्याकांड में उनकी जमानत रद्द करने की मांग वाली याचिका पर 30 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होनी है। वहीं, जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) से निष्कासन के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द करने की पहल भी की गई है। ऐसे में बिहार की राजनीति में इस मामले को लेकर हलचल तेज है।

दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार ने अनंत सिंह को मिली जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। अब सभी की नजरें अदालत की सुनवाई और आने वाले आदेश पर टिकी हैं।

30 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में होगी अहम सुनवाई

दुलारचंद यादव हत्याकांड में पटना हाईकोर्ट से मिली अनंत सिंह की जमानत को चुनौती देते हुए नीरज कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में जमानत रद्द करने की मांग की गई है।

30 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, अनंत सिंह को दोबारा जेल जाना पड़ेगा या नहीं, यह सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगा। सुनवाई से पहले इस बारे में कोई निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

जेडीयू से निष्कासन के बाद सदस्यता पर भी सवाल

अनंत सिंह के खिलाफ राजनीतिक स्तर पर भी कार्रवाई की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, जेडीयू से निष्कासित किए जाने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द करने की पहल हुई है।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने इस संबंध में विधानसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपा है। पत्र में संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अनंत सिंह की सदस्यता समाप्त करने की अनुशंसा की गई है।

इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष की ओर से होने वाली आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। सदस्यता को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय से स्पष्ट होगी।

जेल में रहते हुए अनंत सिंह ने जीता था चुनाव

दुलारचंद यादव हत्याकांड में गिरफ्तारी के बाद अनंत सिंह को जेल भेजा गया था। इसके बावजूद उन्होंने जेल में रहते हुए विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी।

रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 में पटना हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद वह जेल से बाहर आए थे। अब उनकी जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिए जाने के कारण मामले ने फिर से राजनीतिक और कानूनी महत्व हासिल कर लिया है।

बिहार सरकार के हलफनामे में क्या कहा गया?

रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि बिहार सरकार ने 24 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल किया था। इसमें पुलिस जांच और आरोपितों के खिलाफ की गई कार्रवाई का उल्लेख किया गया है।

हलफनामे के अनुसार, पुलिस जांच में अनंत सिंह और कुछ अन्य आरोपितों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सही पाया गया। इसमें जांच की निगरानी और संबंधित अधिकारियों की भूमिका का भी जिक्र है।

रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2026 में अनंत सिंह, मणिकांत ठाकुर और रंजीत राम के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया था।

ध्यान देने वाली बात: आरोपपत्र दाखिल होना अपने आप में दोषसिद्धि नहीं है। मामले में आरोपों और संबंधित पक्षों की कानूनी स्थिति का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।

क्या अनंत सिंह को फिर जाना पड़ सकता है जेल?

इस सवाल का जवाब फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर निर्भर है। नीरज कुमार की याचिका में जमानत रद्द करने की मांग की गई है, लेकिन याचिका दाखिल होने या सुनवाई तय होने मात्र से जमानत रद्द नहीं हो जाती।

30 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई के बाद अदालत का आदेश ही आगे की स्थिति स्पष्ट करेगा। फिलहाल अनंत सिंह की जमानत, विधानसभा सदस्यता और दुलारचंद यादव हत्याकांड से जुड़ी कानूनी कार्यवाही पर सबकी नजरें बनी हुई हैं।

बिहार की राजनीति में मामले पर नजर

अनंत सिंह से जुड़े इस घटनाक्रम में कानूनी और राजनीतिक, दोनों पहलू अहम हैं। एक ओर सुप्रीम कोर्ट में जमानत रद्द करने की मांग पर सुनवाई होनी है, वहीं दूसरी ओर विधानसभा सदस्यता को लेकर कार्रवाई की पहल की गई है।

आने वाले दिनों में अदालत और विधानसभा से जुड़े फैसले इस मामले की दिशा तय कर सकते हैं।

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