रांची: झारखंड की जेलों में रिक्त पदों पर नियुक्ति में देरी को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक की खंडपीठ ने गृह सचिव के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई को 7 दिसंबर 2026 तक बढ़ा दिया। अदालत ने राज्य सरकार को निर्धारित समयसीमा के भीतर अपने आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया।
छह महीने में रिक्त पद भरने का दिया गया था निर्देश
मामले के अनुसार, झारखंड हाईकोर्ट ने 1 अप्रैल को राज्य सरकार और संबंधित भर्ती आयोगों को जेलों में खाली पदों को छह महीने के भीतर भरने का निर्देश दिया था। इस आदेश का उद्देश्य जेलों में कर्मचारियों की कमी दूर करना और व्यवस्था में सुधार करना था।
हालांकि, नियुक्ति प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं होने के कारण मामला अदालत में फिर उठा। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने भर्ती में हो रही देरी पर चिंता जताई और आदेश के अनुपालन को लेकर अधिकारियों से जवाब मांगा।
भर्ती प्रक्रिया को लेकर सरकार ने क्या बताया?
पिछली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया था कि असिस्टेंट जेलर और जेल वार्डर के पदों पर भर्ती के लिए शारीरिक दक्षता परीक्षा अलग-अलग जोन में विभिन्न तारीखों पर आयोजित करने की योजना बनाई गई है। सरकार की ओर से पेश जवाब में बताया गया कि यह प्रक्रिया जल्द पूरी कर ली जाएगी।
लेकिन अदालत ने इस जवाब पर असंतोष जताया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल प्रक्रिया आगे बढ़ाने की जानकारी देना पर्याप्त नहीं है; पहले दिए गए आदेश का समयबद्ध अनुपालन भी जरूरी है।
गृह सचिव और JSSC सचिव को जारी हुआ था नोटिस
इससे पहले हाईकोर्ट ने आदेश का समय पर पालन नहीं होने और बार-बार समय बढ़ाने की मांग किए जाने पर गृह सचिव वंदना दादेल तथा झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के सचिव सुधीर कुमार गुप्ता के प्रति सख्त रुख अपनाया था।
अदालत ने दोनों अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा था कि उनके खिलाफ अवमानना अधिनियम, 1971 के तहत कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जानी चाहिए। दोनों अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर शपथपत्र दाखिल कर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया था।
ताजा सुनवाई में गृह सचिव के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही 7 दिसंबर तक बढ़ा दी गई है। अदालत ने इस अवधि तक आदेश के अनुपालन को सुनिश्चित करने को कहा है।
जेल सुधार से भी जुड़ा है मामला
यह प्रकरण झारखंड की जेलों में सुधार और मॉडल जेल मैनुअल से संबंधित मामले से भी जुड़ा है। हाईकोर्ट ने इस विषय पर स्वतः संज्ञान लिया था और तभी से मामले की सुनवाई जारी है।
अब भर्ती प्रक्रिया पूरी करने और अदालत के निर्देशों का पालन करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार तथा संबंधित भर्ती एजेंसियों पर है। अगली सुनवाई में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रिक्त पदों को भरने की दिशा में कितना काम पूरा हुआ है।
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