Monday, October 26, 2026

रांची का लोक भवन लाल रोशनी से जगमगाया, GoRed अभियान से डिस्लेक्सिया के प्रति जागरूकता का संदेश.

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रांची: झारखंड की राजधानी रांची स्थित लोक भवन रविवार, 25 अक्टूबर को लाल रोशनी से जगमगा उठा। अंतरराष्ट्रीय डिस्लेक्सिया जागरूकता माह के अवसर पर #GoRed अभियान के तहत यह पहल की गई। इसका उद्देश्य लोगों को डिस्लेक्सिया के बारे में जागरूक करना और बच्चों की सीखने से जुड़ी कठिनाइयों को समझने के लिए प्रेरित करना है।

लोक भवन, जिसे पहले राजभवन के नाम से जाना जाता था, को लाल रोशनी से प्रकाशित करने के पीछे संदेश है कि हर बच्चे के सीखने का तरीका अलग हो सकता है। किसी बच्चे को पढ़ने या लिखने में परेशानी होने का अर्थ यह नहीं कि उसमें प्रतिभा की कमी है। सही सहयोग और मार्गदर्शन से ऐसे बच्चे भी अपनी क्षमताओं को विकसित कर सकते हैं।

क्या है डिस्लेक्सिया और इसकी पहचान कैसे होती है?

डिस्लेक्सिया एक न्यूरो-डेवलपमेंटल स्थिति है, जो मुख्य रूप से पढ़ने और भाषा से जुड़ी कुछ क्षमताओं को प्रभावित कर सकती है। इससे प्रभावित बच्चों को शब्दों को पहचानने, सही ढंग से पढ़ने, वर्तनी समझने या लिखने में कठिनाई हो सकती है।

रिम्स के मनोचिकित्सा विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष और रिनपास के पूर्व प्रभारी निदेशक डॉ. अशोक प्रसाद के अनुसार, डिस्लेक्सिया का व्यक्ति की बुद्धिमत्ता से सीधा संबंध नहीं है। इस स्थिति से प्रभावित बच्चे भी रचनात्मक और प्रतिभाशाली हो सकते हैं तथा उचित सहायता मिलने पर अपनी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ सकते हैं।

यदि किसी बच्चे को पढ़ने या लिखने में लगातार परेशानी होती है, तो उसे डांटने या अन्य बच्चों से तुलना करने के बजाय शिक्षक, अभिभावक और विशेषज्ञ मिलकर उसकी जरूरतों को समझने का प्रयास कर सकते हैं।

GoRed अभियान में लाल रंग का क्या है महत्व?

इस अभियान में लाल रंग का चुनाव एक प्रतीकात्मक संदेश से जुड़ा है। स्कूलों में गलत उत्तरों और वर्तनी की गलतियों को अक्सर लाल पेन से चिह्नित किया जाता है। ऐसे में लाल रंग कुछ बच्चों के लिए गलतियों और निराशा से जुड़ सकता है।

GoRed अभियान इसी धारणा को बदलने का संदेश देता है। इसका उद्देश्य लाल रंग को जागरूकता, स्वीकार्यता और आत्मविश्वास के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करना है, ताकि डिस्लेक्सिया से प्रभावित बच्चों को लेकर समाज का नजरिया अधिक सकारात्मक बने।

कब शुरू हुआ GoRed अभियान?

रिपोर्ट के अनुसार, इस पहल की प्रेरणा ऑस्ट्रेलिया में वर्ष 2015 में शुरू हुए ‘Code Read’ अभियान से मिली। इसके बाद वर्ष 2019 से ‘Go Red for Dyslexia’ को वैश्विक जागरूकता अभियान के रूप में आगे बढ़ाया गया।

अक्टूबर में डिस्लेक्सिया के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। भारत में भी सरकारी और ऐतिहासिक इमारतों को लाल रोशनी से प्रकाशित करने जैसी पहलों के माध्यम से इस विषय पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया गया है।

लोक भवन की लाल रोशनी ने दिया समावेशी शिक्षा का संदेश

रांची में लोक भवन को लाल रोशनी से सजाने का उद्देश्य अभिभावकों, शिक्षकों और समाज को यह समझाना है कि बच्चों की सीखने की जरूरतें अलग-अलग हो सकती हैं। किसी बच्चे की कठिनाई को आलस्य या कम क्षमता मान लेने के बजाय उसकी सही जरूरत पहचानना जरूरी है।

समय पर पहचान, विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और पढ़ाई में आवश्यक सहयोग बच्चों के लिए मददगार साबित हो सकते हैं। स्कूलों में ऐसा वातावरण बनाना भी महत्वपूर्ण है, जहां बच्चे बिना डर के सवाल पूछ सकें और अपनी कठिनाइयों के बारे में बता सकें।

GoRed अभियान का संदेश साफ है—हर बच्चा अलग तरीके से सीख सकता है, लेकिन हर बच्चे को शिक्षा, सम्मान और आगे बढ़ने के समान अवसर मिलने चाहिए।

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