Sunday, October 25, 2026

बिहार के 11 सीमावर्ती जिलों में नकली दवाओं पर सख्ती, दुकानों से थोक विक्रेताओं तक खंगाले जाएंगे रिकॉर्ड.

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पटना: बिहार में नकली, डुप्लीकेट और संदिग्ध दवाओं की आपूर्ति पर रोक लगाने के लिए निगरानी बढ़ाने की तैयारी है। स्वास्थ्य विभाग और औषधि नियंत्रण विभाग की ओर से सीमावर्ती क्षेत्रों में दवाओं की सप्लाई चेन पर विशेष नजर रखने की जानकारी सामने आई है। इसके तहत दवा दुकानों और थोक विक्रेताओं के रिकॉर्ड की जांच की जाएगी, ताकि दवाओं के स्रोत और उनकी गुणवत्ता का सत्यापन किया जा सके।

जांच के दौरान दवाओं के बैच नंबर, निर्माता का नाम, लाइसेंस, खरीद-बिक्री के बिल और अन्य संबंधित दस्तावेजों का मिलान किया जा सकता है। किसी दवा पर संदेह होने की स्थिति में उसका नमूना लेकर प्रयोगशाला में जांच कराने की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है।

बिहार के इन 11 सीमावर्ती जिलों पर रहेगी नजर

सीमावर्ती इलाकों से दवाओं की आवाजाही और आपूर्ति की निगरानी के लिहाज से बिहार के 11 जिलों का उल्लेख किया गया है। इनमें शामिल हैं:

  1. पश्चिम चंपारण
  2. पूर्वी चंपारण
  3. सीतामढ़ी
  4. मधुबनी
  5. सुपौल
  6. अररिया
  7. किशनगंज
  8. कटिहार
  9. पूर्णिया
  10. गोपालगंज
  11. सीवान

इन जिलों में दवाओं की खरीद, भंडारण और बिक्री से संबंधित दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, जिलेवार नकली दवाओं के मामलों का ऐसा आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं है, जिसके आधार पर किसी एक जिले को सबसे अधिक प्रभावित बताया जा सके।

बिहार में 84 हजार से अधिक दवा विक्रेता फर्म होने का दावा

राज्य औषधि नियंत्रण निदेशालय के ऑनलाइन आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि बिहार में 84 हजार से अधिक सेलिंग फर्म और लगभग 1.70 लाख लाइसेंस दर्ज हैं।

इसी जानकारी के अनुसार, अब तक 45,590 निरीक्षण दर्ज किए गए हैं। इनमें 824 लाइसेंस रद्द करने, दो मामलों में दवा बिक्री रोकने और छह लाइसेंस निलंबित करने की कार्रवाई का उल्लेख है।

ये आंकड़े औषधि नियंत्रण व्यवस्था के दायरे और निरीक्षण गतिविधियों की जानकारी देते हैं। हालांकि, इन्हें वर्तमान स्थिति के रूप में प्रकाशित करने से पहले संबंधित पोर्टल पर उपलब्ध नवीनतम रिकॉर्ड और आंकड़ों की अवधि की पुष्टि जरूरी है।

पटना और गया में अवैध गोदामों पर कार्रवाई का उल्लेख

नकली और अवैध दवाओं के कारोबार पर कार्रवाई के संदर्भ में पटना के मसौढ़ी और गया का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की कार्रवाई में आठ गोदाम और एक अवैध निर्माण इकाई पकड़े जाने की जानकारी सामने आई थी।

इस कार्रवाई में कथित तौर पर 4,39,774 टैबलेट और कैप्सूल के साथ 1,895 इंजेक्शन, वायल और एम्प्यूल जब्त किए गए।

जब्ती से संबंधित इन आंकड़ों और कार्रवाई के स्थान की पुष्टि आधिकारिक विभागीय बयान या जब्ती सूची से की जानी चाहिए। साथ ही, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि जब्त की गई सभी दवाएं नकली थीं या उनमें अन्य प्रकार की अवैध अथवा संदिग्ध दवाएं भी शामिल थीं।

बिना लाइसेंस दवा बेचने पर हो सकती है कानूनी कार्रवाई

औषधि विभाग की जांच में दवाओं के निर्माण, बैच नंबर, लेबल, लाइसेंस और आपूर्ति के स्रोत की जानकारी का सत्यापन किया जा सकता है। बिना आवश्यक लाइसेंस दवा बेचने, नकली दवाओं का कारोबार करने या नियमों के विपरीत लेबल वाली दवाएं मिलने पर लागू कानूनों के तहत कार्रवाई हो सकती है।

दवाओं की गुणवत्ता और उनके वैध स्रोत की जांच मरीजों की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। संदिग्ध दवाओं की पहचान होने पर नियमानुसार नमूने की जांच और संबंधित विक्रेता या आपूर्तिकर्ता के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

मरीजों तक सुरक्षित दवाएं पहुंचाना मुख्य उद्देश्य

दवाओं की सप्लाई चेन पर निगरानी बढ़ाने का उद्देश्य संदिग्ध उत्पादों की पहचान करना, उनके स्रोत का पता लगाना और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना है। इसके लिए दवा दुकानों से लेकर थोक आपूर्तिकर्ताओं तक के रिकॉर्ड की जांच अहम भूमिका निभा सकती है।

हालांकि, सीमावर्ती जिलों में निगरानी बढ़ाने की जानकारी को किसी जिले में नकली दवाओं की पुष्टि या वहां से उनकी आपूर्ति का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। वास्तविक स्थिति जांच, प्रयोगशाला रिपोर्ट और आधिकारिक कार्रवाई के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।

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