Friday, October 23, 2026

मैथिली की पहली व्याकरण पुस्तक के 100 साल पूरे, 25 अक्टूबर को जुटेंगे देशभर के विद्वान.

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भागलपुर | 23 अक्टूबर 2026 | BHARATSUPERFASTNEWS

बिहार के भागलपुर में 25 अक्टूबर को मैथिली भाषा और उसके व्याकरण पर राष्ट्रीय परिसंवाद आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम प्रख्यात विद्वान एवं लेखक पंडित हीरालाल झा ‘हेम’ की ऐतिहासिक पुस्तक ‘मैथिलीय भाषा-व्याकरण भास्कर’ के प्रकाशन के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित हो रहा है। इसमें बिहार के विभिन्न जिलों से भाषाविद्, साहित्यकार और शोधार्थी हिस्सा लेकर मैथिली के व्याकरणिक विकास और समकालीन प्रासंगिकता पर चर्चा करेंगे।

साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली और हेम-जयन्ती साहित्य मंच, दरभंगा के संयुक्त तत्वावधान में होने वाले इस एक दिवसीय आयोजन की तैयारियां पूरी होने की जानकारी दी गई है। कार्यक्रम रविवार को भागलपुर के आदमपुर चौक स्थित तपस्वी अस्पताल के सेमिनार हॉल में आयोजित होगा।

सुबह 10 बजे होगा परिसंवाद का उद्घाटन

कार्यक्रम का उद्घाटन सुबह 10 बजे निर्धारित है। उद्घाटन सत्र में साहित्य अकादेमी के उप सचिव एन. सुरेश बाबू स्वागत वक्तव्य देंगे। मैथिली परामर्श मंडल के सदस्य प्रमोद कुमार झा विषय प्रवर्तन करेंगे, जबकि परामर्श मंडल के सदस्य रमण कुमार सिंह बीज वक्तव्य प्रस्तुत करेंगे।

हेम-जयन्ती साहित्य मंच के निदेशक अमरेन्द्र कुमार झा उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करेंगे। सत्र के अंत में सबौर कॉलेज के सेवानिवृत्त प्राध्यापक वाचस्पति झा धन्यवाद ज्ञापन करेंगे।

दो तकनीकी सत्रों में मैथिली व्याकरण पर होगी चर्चा

परिसंवाद में दो तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें मैथिली भाषा की विविधता, व्याकरण के ऐतिहासिक विकास और दूसरी भाषाओं के साथ उसके तुलनात्मक अध्ययन जैसे विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे।

पहला सत्र: मैथिली के व्याकरणिक विकास पर विमर्श

पहले तकनीकी सत्र की अध्यक्षता साहित्य अकादेमी के मैथिली परामर्श मंडल की सदस्य नीता झा करेंगी। इस सत्र में तीन शोध पत्र प्रस्तुत किए जाने हैं।

  • किसलय कृष्ण: ‘मैथिली भाषाक विविध स्वरूप आ मैथिलीक पहिल व्याकरण’
  • कुमार राहुल: ‘क्रियाक सन्दर्भमे मैथिली, बाँग्ला आ असमिया व्याकरणक तुलनात्मक अध्ययन’
  • योगानन्द झा: ‘मैथिली क्रियाक विकास : प्राचीन मैथिली वर्णरत्नाकर से आधुनिक मैथिली’

इन शोध पत्रों में मैथिली के विभिन्न भाषाई स्वरूपों, क्रिया-व्यवस्था और ऐतिहासिक विकास से जुड़े पहलुओं पर चर्चा होगी।

दूसरा सत्र: लोक साहित्य और शास्त्रीय व्याकरण

दूसरे तकनीकी सत्र की अध्यक्षता प्रख्यात मैथिली लेखक शिवप्रसाद यादव करेंगे। इसमें लोक साहित्य में व्याकरण के प्रयोग, पुराने व्याकरण ग्रंथों की तुलना और पंडित हीरालाल झा ‘हेम’ के योगदान की प्रासंगिकता पर विचार किया जाएगा।

इस सत्र में प्रस्तुत होने वाले शोध पत्र हैं:

  • प्रमोद पाण्डेय: ‘लोक साहित्य मे व्याकरणिक प्रयोग आ शास्त्रीय व्याकरण में विचलन’
  • सुरेन्द्र भारद्वाज: ‘पं. हीरालाल झा ‘हेम’क मैथिली व्याकरणक दीनबन्धु झा आ ग्रियर्सनक व्याकरणमे तुलनात्मक विश्लेषण’
  • भास्कर ज्योति: ‘पं. हीरालाल झा ‘हेम’क मैथिली व्याकरण आ ओकर प्रासंगिकता’

इन विषयों के माध्यम से मैथिली के लोकभाषाई प्रयोग और औपचारिक व्याकरण के बीच संबंधों को समझने का प्रयास किया जाएगा।

पंडित हीरालाल झा ‘हेम’ की पुस्तक के 100 वर्ष पूरे

इस परिसंवाद का मुख्य केंद्र पंडित हीरालाल झा ‘हेम’ की पुस्तक ‘मैथिलीय भाषा-व्याकरण भास्कर’ की शताब्दी है। भागलपुर के भ्रमरपुर निवासी हीरालाल झा ‘हेम’ को मैथिली साहित्य और भाषा-अध्ययन से जुड़े विद्वान के रूप में याद किया जाता है।

आयोजकों के अनुसार, पुस्तक के 100 वर्ष पूरे होने पर यह कार्यक्रम मैथिली के व्याकरणिक इतिहास, उसके विकास और आधुनिक समय में उसकी उपयोगिता पर विचार करने का अवसर देगा।

मैथिली भाषा और साहित्य के लिए क्यों अहम है यह आयोजन?

किसी भाषा के व्याकरण का अध्ययन उसके शब्दों, वाक्य संरचना, क्रिया-प्रयोग और ऐतिहासिक बदलावों को समझने में मदद करता है। इस दृष्टि से मैथिली की पुरानी व्याकरण पुस्तक के शताब्दी वर्ष पर आयोजित परिसंवाद का साहित्यिक और अकादमिक महत्व है।

कार्यक्रम में बिहार के विभिन्न जिलों से आने वाले विद्वानों और शोधार्थियों के शोध पत्रों के जरिए मैथिली के पारंपरिक स्वरूप और आधुनिक प्रयोगों पर चर्चा होगी। इससे भाषा-अध्ययन से जुड़े शोध और साहित्यिक संवाद को आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा।

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