Friday, October 23, 2026

वंदे भारत जैसी दिखेगी पटना जू की नई टॉय ट्रेन, 9.88 करोड़ से बनेगा ट्रैक.

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पटना | 23 अक्टूबर 2026 | BHARATSUPERFASTNEWS

पटना के संजय गांधी जैविक उद्यान यानी पटना जू में घूमने आने वाले पर्यटकों के लिए अच्छी खबर है। करीब 11 वर्षों से बंद टॉय ट्रेन को नए रूप में फिर से शुरू करने की तैयारी है। प्रस्तावित योजना के अनुसार, बैटरी से चलने वाली चार डिब्बों की नई ट्रेन पर्यटकों को जू की हरियाली और वन्यजीवों के आसपास के क्षेत्र की सैर कराएगी।

इस परियोजना पर करीब 9.88 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। दानापुर रेल मंडल और जू प्रबंधन की योजना के मुताबिक, नया ट्रैक तैयार होने और जरूरी काम पूरा होने के बाद ट्रेन का परिचालन शुरू किया जा सकेगा। हालांकि, इसकी अंतिम शुरुआत की तारीख अभी तय नहीं मानी जानी चाहिए।

वंदे भारत की तर्ज पर होगा नई टॉय ट्रेन का डिजाइन

नई टॉय ट्रेन को आधुनिक लुक देने की योजना है। इसके चार डिब्बे होंगे और उनका डिजाइन वंदे भारत ट्रेन से प्रेरित बताया गया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, डिब्बों का अंतिम डिजाइन अभी तय नहीं हुआ है।

ट्रेन के डिब्बे समस्तीपुर रेल कारखाने में तैयार किए जाने की योजना है। प्रत्येक डिब्बे में लगभग 20 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी। इस तरह एक बार में चारों डिब्बों में कुल 80 पर्यटक सफर कर सकेंगे, बशर्ते अंतिम डिजाइन और स्वीकृत क्षमता में बदलाव न हो।

टॉय ट्रेन की वापसी से बच्चों और परिवारों के लिए पटना जू की सैर पहले से अधिक आकर्षक हो सकती है।

9.88 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा 3.77 किलोमीटर का ट्रैक

परियोजना के तहत करीब 9 करोड़ 88 लाख रुपये की लागत से नया ट्रैक तैयार किया जाना है। इसकी प्रस्तावित लंबाई 3.77 किलोमीटर बताई गई है।

ट्रेन को डीजल इंजन के बजाय बैटरी से चलाने की योजना है। इससे परिसर में डीजल इंजन के सीधे धुएं से बचा जा सकेगा। हालांकि, इसके वास्तविक पर्यावरणीय लाभ बिजली के स्रोत और परिचालन व्यवस्था पर भी निर्भर करेंगे।

योजना के अनुसार, ट्रेन से जू के विभिन्न हिस्सों की सैर कराई जाएगी। इसके रास्ते में गैंडा हॉल्ट और मछली घर हॉल्ट जैसे पड़ाव शामिल होने की जानकारी दी गई है।

40 मिनट में होगी जू की सैर

प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, टॉय ट्रेन से पर्यटक करीब 40 मिनट में जू परिसर के निर्धारित मार्ग की सैर कर सकेंगे। रास्ते में एक गुफानुमा संरचना भी बनाई जाने की योजना है, जो बच्चों और अन्य पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकती है।

ट्रेन के मार्ग और आसपास के क्षेत्रों का डिजाइन विशेषज्ञों की मदद से तैयार किया जाना है। इसका उद्देश्य पर्यटकों को हरियाली और वन्यजीवों से जुड़े क्षेत्रों का अनुभव कराने के साथ पर्यावरण तथा वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक करना भी है।

हालांकि, ट्रेन का वास्तविक मार्ग, ठहराव और टिकट व्यवस्था परिचालन शुरू होने से पहले जू प्रशासन की ओर से स्पष्ट किए जाने की जरूरत होगी।

जनवरी के अंत तक काम पूरा होने की संभावना

पटना जू में टॉय ट्रेन दोबारा शुरू करने के लिए दिसंबर 2024 में दानापुर रेल मंडल के साथ समझौता किए जाने की जानकारी दी गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, रेल मंडल की ओर से जनवरी के अंत तक काम पूरा करने की संभावना जताई गई है। काम पूरा होने और जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही ट्रेन का परिचालन शुरू हो सकेगा।

इसलिए पर्यटकों को फिलहाल उद्घाटन या टिकट बिक्री की किसी निश्चित तारीख को अंतिम नहीं मानना चाहिए। जू प्रशासन की आधिकारिक घोषणा के बाद ही परिचालन की पुष्टि हो सकेगी।

1977 में शुरू हुई थी पटना जू की शिशु रेल

पटना जू में टॉय ट्रेन का इतिहास काफी पुराना है। यहां पहली बार 1977 में शिशु रेल का परिचालन शुरू किया गया था। उस समय भारतीय रेलवे ने राज्य सरकार के अनुरोध पर एक इंजन और दो डिब्बों वाली ट्रेन उपलब्ध कराई थी।

शुरुआती शिशु रेल का ट्रैक लगभग 1.59 किलोमीटर लंबा था। यह ट्रेन खासकर बच्चों और परिवारों के बीच लोकप्रिय रही। समय के साथ ट्रेन पुरानी होती गई और उसके रखरखाव में कठिनाइयां आने लगीं।

वर्ष 2004 में रेल मंत्रालय की ओर से पटना जू को चार डिब्बों वाली नई शिशु रेल उपहार में दी गई थी। लेकिन पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 17 अगस्त 2015 से इसका परिचालन बंद कर दिया गया।

अब नई तकनीक और आधुनिक सुविधाओं के साथ टॉय ट्रेन को दोबारा शुरू करने की तैयारी है।

पर्यटकों को क्या होगा फायदा?

नई टॉय ट्रेन शुरू होने पर पटना जू आने वाले पर्यटकों को कई सुविधाएं मिल सकती हैं।

  • जू की सैर का नया अनुभव: ट्रेन से परिसर के निर्धारित हिस्सों को देखना आसान हो सकता है।
  • बच्चों के लिए आकर्षण: आधुनिक डिजाइन वाली ट्रेन बच्चों और परिवारों के लिए खास अनुभव बन सकती है।
  • बैटरी से परिचालन: डीजल इंजन के बजाय बैटरी का इस्तेमाल परिसर में सीधे धुएं के उत्सर्जन को कम कर सकता है।
  • वन्यजीव संरक्षण का संदेश: प्रस्तावित मार्ग और जानकारी के माध्यम से पर्यटकों को पर्यावरण के प्रति जागरूक किया जा सकता है।

कुल मिलाकर, पटना जू की टॉय ट्रेन की वापसी पर्यटकों के लिए एक नया आकर्षण बन सकती है। अब सबकी नजरें परियोजना का काम पूरा होने, अंतिम डिजाइन और परिचालन शुरू करने की आधिकारिक तारीख पर टिकी हैं।

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