Friday, October 23, 2026

रणजी ट्रॉफी से महिला अंडर-19 तक बिहार की मुश्किलें, एलीट ग्रुप में लगातार हार से बढ़ी चिंता.

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पटना | 23 अक्टूबर 2026 | BHARATSUPERFASTNEWS

बिहार क्रिकेट के लिए एलीट ग्रुप में अपनी जगह बनाए रखना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। प्लेट ग्रुप में अच्छा प्रदर्शन कर शीर्ष स्तर तक पहुंचने वाली राज्य की टीमें मजबूत प्रतिद्वंद्वियों के सामने लगातार संघर्ष कर रही हैं। रणजी ट्रॉफी में पुरुष सीनियर टीम को उत्तर प्रदेश और बड़ौदा के खिलाफ बड़ी हार झेलनी पड़ी है। वहीं, अंडर-23 और महिला अंडर-19 टीमों का प्रदर्शन भी निराशाजनक रहा है।

वीनू मांकड़ अंडर-19 टूर्नामेंट में बिहार को एक जीत जरूर मिली, लेकिन कुल मिलाकर विभिन्न आयु वर्गों में टीमों के नतीजे राज्य के क्रिकेट ढांचे और मैदान पर तैयारियों को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं।

रणजी ट्रॉफी में उत्तर प्रदेश और बड़ौदा से बड़ी हार

रणजी ट्रॉफी के मौजूदा सत्र में बिहार की शुरुआत उम्मीदों के अनुरूप नहीं रही। उत्तर प्रदेश ने बिहार को पारी और 267 रनों के बड़े अंतर से हराया। इसके बाद बड़ौदा ने भी 10 विकेट से मुकाबला जीत लिया।

इन नतीजों ने एलीट ग्रुप में बिहार की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। मजबूत घरेलू टीमों के खिलाफ बल्लेबाजी और गेंदबाजी में बेहतर प्रदर्शन करना बिहार के लिए अहम होगा।

आगे बिहार को मध्य प्रदेश, विदर्भ और पिछले सत्र की रणजी ट्रॉफी विजेता जम्मू-कश्मीर जैसी टीमों की चुनौती का सामना करना है। इन मुकाबलों में टीम का प्रदर्शन उसके अभियान की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकता है।

अंडर-23 टीम को भी नहीं मिली राहत

कर्नल सीके नायडू अंडर-23 टूर्नामेंट में बिहार को लगातार दो हार का सामना करना पड़ा।

राजगीर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में गोवा के खिलाफ मुकाबले में बिहार की पहली पारी 204 रनों पर सिमट गई। गोवा ने पहली पारी में 295 रन बनाए थे। इस मैच में बिहार को 174 रनों से हार झेलनी पड़ी।

इसके बाद बलांगीर के गांधी स्टेडियम में ओडिशा के खिलाफ चार दिवसीय मुकाबले में भी बिहार को शिकस्त मिली। बिहार ने पहली पारी में 207 और दूसरी पारी में 389 रन बनाए। ओडिशा के सामने जीत के लिए 439 रनों का लक्ष्य था, जिसे उसने पांच विकेट खोकर हासिल कर लिया।

यह नतीजा दिखाता है कि रन बनाने के बावजूद बिहार की टीम को मैच के निर्णायक चरणों में गेंदबाजी और विपक्षी टीम पर दबाव बनाए रखने की चुनौती का सामना करना पड़ा।

महिला अंडर-19 टीम का प्रदर्शन भी चिंताजनक

बिहार की महिला अंडर-19 टीम के लिए भी टूर्नामेंट का सफर मुश्किल रहा। नौ अक्टूबर को मुंबई में उत्तर प्रदेश के खिलाफ मुकाबले में बिहार की पूरी टीम महज 32 रनों पर आउट हो गई। टीम की छह बल्लेबाज अपना खाता भी नहीं खोल सकीं और कोई भी खिलाड़ी दो अंकों तक नहीं पहुंच सकी।

उत्तर प्रदेश ने 5.1 ओवर में दो विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया।

इसके बाद भी बिहार को लगातार हार का सामना करना पड़ा। दस अक्टूबर को उत्तराखंड ने 71 रनों से, 12 अक्टूबर को चंडीगढ़ ने तीन विकेट से और 16 अक्टूबर को पंजाब ने छह विकेट से बिहार को हराया।

लगातार इन नतीजों से महिला टीम की बल्लेबाजी में निरंतरता और मजबूत टीमों के खिलाफ मुकाबला करने की क्षमता पर ध्यान देने की जरूरत सामने आती है।

वीनू मांकड़ अंडर-19 में मिली एकमात्र जीत

लगातार हार के बीच बिहार के लिए वीनू मांकड़ अंडर-19 एलीट टूर्नामेंट में एक सकारात्मक नतीजा भी सामने आया। पुडुचेरी में हरियाणा के खिलाफ वर्षा से प्रभावित मुकाबले में अनमोल ने 184 रनों की शानदार पारी खेली।

बिहार ने 46.1 ओवर में 325 रन बनाए। जवाब में हरियाणा की टीम 42.2 ओवर में 288 रन ही बना सकी। वी.जे.डी. नियम के आधार पर बिहार ने यह मुकाबला 19 रनों से जीत लिया।

हालांकि, इस जीत से पहले बिहार को उत्तर प्रदेश के खिलाफ 105 रनों, छत्तीसगढ़ के खिलाफ चार विकेट और पंजाब के खिलाफ 24 रनों से हार का सामना करना पड़ा था। ऐसे में हरियाणा के खिलाफ जीत टीम के लिए राहत जरूर रही, लेकिन पूरे अभियान में निरंतरता बनाए रखना अभी भी चुनौती है।

पिछले रणजी सत्र का प्रदर्शन भी रहा था कमजोर

बिहार की मौजूदा स्थिति को समझने के लिए पिछले रणजी सत्र का प्रदर्शन भी महत्वपूर्ण है। 2024-25 के एलीट ग्रुप में बिहार को छह मुकाबलों में हार का सामना करना पड़ा था, जबकि पंजाब के खिलाफ मैच ड्रॉ रहा था।

उस सत्र में हरियाणा ने बिहार को पारी और 43 रन, मध्य प्रदेश ने पारी और 108 रन, उत्तर प्रदेश ने पारी और 119 रन, केरल ने पारी और 169 रन तथा बंगाल ने पारी और 138 रन से हराया था। कर्नाटक ने भी बिहार को आठ विकेट से मात दी थी।

इन नतीजों के कारण बिहार को अंक तालिका में केवल एक अंक मिला और टीम सबसे निचले स्थान पर रही। लगातार दो सत्रों में एलीट स्तर पर संघर्ष का यह सिलसिला राज्य क्रिकेट के लिए गंभीर चुनौती है।

बिहार क्रिकेट के सामने क्या हैं चुनौतियां?

विभिन्न आयु वर्गों में आए नतीजे बताते हैं कि बिहार को एलीट स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए कई पहलुओं पर ध्यान देने की जरूरत हो सकती है। इनमें बल्लेबाजी में निरंतरता, दबाव की परिस्थितियों में विकेट बचाना, गेंदबाजी में अनुशासन और लंबे प्रारूप के मैचों में रणनीति शामिल हैं।

हालांकि, केवल मैच परिणामों के आधार पर बिहार क्रिकेट की प्रशासनिक या तकनीकी व्यवस्था में किसी विशेष कमी को निर्णायक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। इसके लिए खिलाड़ियों की तैयारी, चयन प्रक्रिया, प्रशिक्षण व्यवस्था और टीम प्रबंधन से जुड़े तथ्यों का विस्तृत आकलन जरूरी होगा।

एलीट ग्रुप में बने रहना होगी बड़ी चुनौती

प्लेट ग्रुप में अच्छा प्रदर्शन करके एलीट स्तर तक पहुंचना बिहार क्रिकेट के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि रही है। लेकिन शीर्ष स्तर पर जगह बनाना और वहां लगातार प्रतिस्पर्धा करना दो अलग चुनौतियां हैं।

रणजी ट्रॉफी में बड़ी हार, अंडर-23 टीम की असफलता और महिला अंडर-19 के कमजोर नतीजों के बीच बिहार को आगे के मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन करना होगा। वीनू मांकड़ अंडर-19 में मिली जीत उम्मीद की किरण जरूर है, लेकिन विभिन्न टीमों में लगातार सुधार और अच्छे नतीजे हासिल करना ही बिहार क्रिकेट की वास्तविक प्रगति का संकेत होगा।

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