Friday, October 23, 2026

दिसंबर तक शुरू हो सकता है बिहार का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर प्लांट, 90 गांवों को होगा फायदा.

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नवादा | 23 अक्टूबर 2026 | BHARATSUPERFASTNEWS

Bihar News: बिहार में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ी परियोजना जल्द शुरू हो सकती है। नवादा जिले के रजौली प्रखंड स्थित फुलवरिया डैम में बनाया जा रहा राज्य का सबसे बड़ा फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट लगभग तैयार हो चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसकी क्षमता 10 मेगावाट है और इसे दिसंबर 2026 तक चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना शुरू होने के बाद हर साल करीब 1.60 करोड़ यूनिट बिजली उत्पादन होने की संभावना है।

इस परियोजना से रजौली और आसपास के लगभग 90 गांवों को बिजली आपूर्ति में लाभ मिलने की उम्मीद है। फिलहाल प्लांट को चालू करने से पहले केबल बिछाने का काम पूरा किया जाना बाकी है।

फुलवरिया डैम में तैयार हुआ 10 मेगावाट का सोलर प्लांट

नवादा जिले के रजौली प्रखंड की हरदिया पंचायत स्थित फुलवरिया डैम में फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट का निर्माण किया गया है। इस तकनीक में सोलर पैनल जमीन के बजाय जलाशय की सतह पर विशेष संरचनाओं के सहारे लगाए जाते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, परियोजना का अधिकांश निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। अब बिजली को ग्रिड तक पहुंचाने के लिए केबल बिछाने का काम बाकी है। इसे पूरा करने के बाद प्लांट को चालू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

इस परियोजना की स्थापित क्षमता 10 मेगावाट बताई गई है। यहां उत्पादित बिजली को रजौली ग्रिड पावर हाउस तक पहुंचाने की योजना है।

दिसंबर 2026 तक शुरू करने का लक्ष्य, केबल का काम बाकी

फुलवरिया डैम स्थित सोलर प्लांट को दिसंबर 2026 तक चालू करने की संभावना जताई गई है। हालांकि, इसके लिए शेष तकनीकी काम और आवश्यक परीक्षण समय पर पूरे होने जरूरी हैं।

केबल बिछाने का काम पूरा होने के बाद बिजली उत्पादन और ग्रिड से जोड़ने से संबंधित प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। इसलिए दिसंबर तक प्लांट शुरू होने की तारीख को फिलहाल लक्ष्य के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि निश्चित शुरुआत के रूप में।

हर साल 1.60 करोड़ यूनिट बिजली उत्पादन की संभावना

इस फ्लोटिंग सोलर परियोजना से हर साल करीब 1.60 करोड़ यूनिट बिजली पैदा होने का अनुमान है। इससे क्षेत्र में बिजली आपूर्ति को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, परियोजना से रजौली और उसके आसपास के लगभग 90 गांवों को लाभ पहुंचाने की योजना है। हालांकि, वास्तविक आपूर्ति और गांवों को मिलने वाले लाभ का स्तर ग्रिड व्यवस्था तथा बिजली वितरण की स्थिति पर निर्भर करेगा।

बताया गया है कि परियोजना को रिन्यूएबल एनर्जी सर्विस कंपनी (RESCO) मॉडल के तहत विकसित किया गया है। इस व्यवस्था के अनुसार, बिहार की बिजली कंपनी को अगले 25 वर्षों तक 3.87 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली उपलब्ध कराने की योजना है।

30 एकड़ में लगाए गए हैं सोलर पैनल

फुलवरिया डैम में लगभग 30 एकड़ क्षेत्र में सोलर पैनल लगाए जाने की जानकारी दी गई है। फ्लोटिंग सोलर तकनीक की खासियत यह है कि इससे बड़े भूभाग पर जमीन का इस्तेमाल किए बिना बिजली उत्पादन किया जा सकता है।

इस तरह की परियोजनाओं से जमीन की उपलब्धता से जुड़ी चुनौतियां कम हो सकती हैं। जलाशय की सतह पर पैनल लगाने से कुछ परिस्थितियों में पानी के वाष्पीकरण में भी कमी आ सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव जलाशय की स्थिति, पैनलों के फैलाव और स्थानीय मौसम पर निर्भर करता है।

मछलियों और जलीय जीवन पर क्या होगा असर?

फुलवरिया डैम में फ्लोटिंग सोलर प्लांट लगाने से जलाशय के उपयोग को लेकर भी चर्चा है। परियोजना से जुड़े विवरण में दावा किया गया है कि इससे मछलियों को नुकसान नहीं होगा।

हालांकि, जलीय जीवन पर प्रभाव का आकलन स्थानीय पर्यावरणीय परिस्थितियों, पानी में ऑक्सीजन के स्तर, पैनलों से ढके क्षेत्र और अन्य कारकों के आधार पर किया जाना चाहिए। इसलिए मछलियों और अन्य जलीय जीवों पर किसी भी प्रभाव के बारे में अंतिम निष्कर्ष संबंधित तकनीकी या पर्यावरणीय अध्ययन के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

नवादा में पर्यटन और स्वच्छ ऊर्जा को मिल सकता है बढ़ावा

फुलवरिया डैम में सोलर प्लांट बनने से नवादा जिले में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही, यदि जलाशय के प्राकृतिक और पर्यटन संबंधी उपयोग को भी उचित तरीके से बनाए रखा जाता है, तो क्षेत्र की पहचान को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

फिलहाल परियोजना के चालू होने की समय-सीमा, बिजली उत्पादन और आसपास के गांवों को मिलने वाले लाभ पर नजर रहेगी। केबल बिछाने और अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि प्लांट कब से व्यावसायिक रूप से बिजली उत्पादन शुरू करता है।

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