Bihar News | 23 अक्टूबर 2026 | BHARATSUPERFASTNEWS
बिहार विधान परिषद चुनाव के बीच मोकामा से जेडीयू विधायक अनंत सिंह ने पार्टी की संभावित अनुशासनात्मक कार्रवाई और नीरज कुमार के बयानों पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि पार्टी में उनके खिलाफ क्या कार्रवाई होती है, इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। अपने चिर-परिचित शायराना अंदाज में उन्होंने कहा, “न मरने का गम है, न जीने की खुशी।”
अनंत सिंह ने जनता को अपना भगवान बताते हुए कहा कि उनके लिए जनता का समर्थन सबसे महत्वपूर्ण है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जेडीयू के उम्मीदवार नीरज कुमार और जनसुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह के बीच मुकाबले को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं।
अनुशासनात्मक कार्रवाई की बात पर क्या बोले अनंत सिंह?
नीरज कुमार की ओर से पार्टी अनुशासन और संभावित कार्रवाई को लेकर दिए गए बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए अनंत सिंह ने कहा कि उन्हें इन बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में यह भी कहा कि दूसरे लोग क्या बोलते हैं, इससे उनकी राजनीतिक स्थिति तय नहीं होती।
अनंत सिंह ने अपने समर्थकों और मतदाताओं पर भरोसा जताते हुए कहा कि जनता ही उनकी मालिक है और वही तय करेगी कि किसे समर्थन देना है।
उनकी यह प्रतिक्रिया जेडीयू के भीतर पटना स्नातक सीट को लेकर सामने आए मतभेदों के बीच आई है। अनंत सिंह कथित तौर पर पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार के बजाय जनसुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह का समर्थन कर रहे हैं।
छोटू सिंह की हिरासत पर भी दी प्रतिक्रिया
अपने समर्थक छोटू सिंह को पुलिस थाने में बैठाए जाने से जुड़े सवाल पर अनंत सिंह ने कहा कि इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने दावा किया कि जनता का समर्थन उनके साथ है और समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई से उनका मनोबल कम नहीं होगा।
उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए आरोप लगाया कि उनके समर्थकों को अलग-अलग थानों में हिरासत में लिया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों और हिरासत से जुड़े मामलों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं दी गई है।
अनंत सिंह ने यह भी दावा किया कि पुलिस की कार्रवाई से उन्हें राजनीतिक नुकसान होने के बजाय समर्थन बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि मतदाता अपने विवेक से फैसला करेंगे और चुनाव में जनता का निर्णय ही अंतिम होगा।
‘जनता ही मेरा भगवान है’
जेडीयू उम्मीदवार नीरज कुमार के मंदिर जाकर मन्नत मांगने से जुड़े सवाल पर अनंत सिंह ने कहा कि वह जनता को भगवान मानते हैं। उनके मुताबिक, किसी उम्मीदवार का मंदिर जाना उसकी व्यक्तिगत आस्था का विषय है।
उन्होंने कहा कि जनता का आशीर्वाद ही उनकी राजनीतिक ताकत है। इस दौरान उन्होंने पार्टी में अपने साथ कथित तौर पर हुए व्यवहार को लेकर भी नाराजगी जताई।
अनंत सिंह ने आरोप लगाया कि पार्टी ने उनके मुकाबले कुछ अन्य नेताओं को अधिक महत्व दिया है। उन्होंने कहा कि उनके साथ कई बार अन्याय हुआ, लेकिन इसके बावजूद वह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति अपना समर्थन बनाए हुए हैं।
नीरज कुमार पर साधा निशाना
अनंत सिंह ने नीरज कुमार की राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए दावा किया कि उनका प्रभाव सीमित है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी ने कुछ नेताओं के लिए अधिक सक्रियता दिखाई, जबकि उनके मामले में वैसा सहयोग नहीं मिला।
हालांकि, ये अनंत सिंह के व्यक्तिगत राजनीतिक आरोप हैं। जेडीयू नेतृत्व की ओर से इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया दी गई है, इसकी जानकारी उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं है।
इस पूरे विवाद ने पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर जेडीयू के भीतर मतभेदों को चर्चा में ला दिया है। पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार और पार्टी विधायक के अलग-अलग प्रत्याशियों के समर्थन की खबरों ने चुनावी समीकरणों को और दिलचस्प बना दिया है।
नीतीश कुमार के समर्थन में रहने की बात दोहराई
अनंत सिंह ने स्पष्ट किया कि दूसरे राजनीतिक दल में रहने के दौरान भी उन्होंने नीतीश कुमार का साथ दिया था और आगे भी उनका समर्थन जारी रखेंगे।
उन्होंने वशिष्ठ नारायण सिंह से मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा कि वह उनके स्वास्थ्य की स्थिति के कारण उनसे मिलने गए थे। अनंत सिंह ने उनके वरिष्ठ होने का उल्लेख करते हुए कहा कि वह उनके खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते।
उनके इस बयान से संकेत मिलता है कि पार्टी के भीतर मतभेदों के बावजूद वह नीतीश कुमार के प्रति अपना समर्थन सार्वजनिक रूप से बनाए रखना चाहते हैं।
पटना स्नातक सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला
बिहार विधान परिषद की आठ सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान हुआ। इनमें पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र पर राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों की विशेष नजर रही।
इस सीट पर जेडीयू के नीरज कुमार, जनसुराज के अनुज सिंह और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के दिलीप कुमार मैदान में हैं। अनंत सिंह की ओर से अनुज सिंह को समर्थन दिए जाने की खबरों ने चुनावी चर्चा को और तेज कर दिया है।
हालांकि, मतदान के दौरान सामने आए राजनीतिक दावों के आधार पर किसी उम्मीदवार की जीत या हार का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। चुनाव का वास्तविक परिणाम मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगा।
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