Thursday, October 22, 2026

MLA और MLC में क्या अंतर है? जानिए चुनाव कैसे होता है, किसके पास कितने अधिकार.

Share

पटना: चुनाव के दौरान अक्सर MLA यानी विधायक और MLC यानी विधान पार्षद के नाम सुनने को मिलते हैं। दोनों राज्य की विधायी व्यवस्था का हिस्सा हैं, लेकिन इनके चुनाव का तरीका, कार्यकाल और अधिकार अलग-अलग होते हैं। विधायक को सीधे जनता चुनती है, जबकि विधान परिषद के सदस्यों का चुनाव अलग-अलग निर्वाचन समूहों के जरिए होता है। कुछ सदस्यों को राज्यपाल भी नामित करते हैं।

बिहार में विधान परिषद की आठ सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान की खबर के बीच यह समझना जरूरी है कि विधायक और विधान पार्षद कैसे चुने जाते हैं और राज्य की राजनीति में उनकी क्या भूमिका होती है।

MLA और MLC किस सदन के सदस्य होते हैं?

MLA (Member of Legislative Assembly) यानी विधायक राज्य की विधानसभा का सदस्य होता है। विधानसभा को राज्य विधानमंडल का निचला सदन कहा जाता है।

MLC (Member of Legislative Council) यानी विधान पार्षद राज्य की विधान परिषद का सदस्य होता है। विधान परिषद को ऊपरी सदन कहा जाता है।

हर राज्य में विधानसभा होती है, लेकिन विधान परिषद केवल कुछ राज्यों में है। बिहार के अलावा उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी विधान परिषद मौजूद है।

MLA का चुनाव कैसे होता है?

विधायक का चुनाव विधानसभा क्षेत्र के मतदाता सीधे करते हैं। संबंधित क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम दर्ज पात्र मतदाता अपने पसंदीदा उम्मीदवार को वोट देते हैं। सबसे अधिक वैध मत प्राप्त करने वाला उम्मीदवार निर्वाचित होता है।

विधायक का चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम उम्र 25 वर्ष होनी चाहिए। विधानसभा का सामान्य कार्यकाल पांच साल होता है, हालांकि संवैधानिक प्रावधानों के तहत इसे पहले भी भंग किया जा सकता है।

MLC कैसे बनते हैं? समझिए चुनाव का गणित

विधान परिषद के सदस्यों को चुनने की प्रक्रिया विधानसभा चुनाव से अलग होती है। संविधान के अनुच्छेद 171 के अनुसार, विधान परिषद की संरचना में विभिन्न निर्वाचन समूहों और राज्यपाल द्वारा नामित सदस्यों की भूमिका होती है।

विधान परिषद की संरचना में सामान्यतः ये श्रेणियां शामिल होती हैं:

  • स्थानीय निकायों के प्रतिनिधि: नगरपालिकाओं, जिला बोर्डों और अन्य निर्दिष्ट स्थानीय प्राधिकरणों के लिए निर्धारित निर्वाचन समूहों से सदस्य चुने जाते हैं।
  • स्नातक निर्वाचन क्षेत्र: निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले पंजीकृत स्नातक मतदाता अपने प्रतिनिधि का चुनाव करते हैं।
  • शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले शिक्षक मतदाता इस श्रेणी के प्रतिनिधियों को चुनते हैं।
  • विधायकों द्वारा चुनाव: राज्य विधानसभा के सदस्य विधान परिषद के निर्धारित हिस्से के सदस्यों का चुनाव करते हैं।
  • राज्यपाल द्वारा नामांकन: साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारी आंदोलन और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव रखने वाले व्यक्तियों को राज्यपाल नामित कर सकते हैं।

संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार, विधान परिषद के लगभग एक-तिहाई सदस्य स्थानीय निकायों के निर्वाचन समूहों से और लगभग एक-तिहाई विधायक चुनते हैं। करीब एक-बारहवां हिस्सा स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों और एक-बारहवां हिस्सा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से चुना जाता है। शेष सदस्यों को राज्यपाल नामित करते हैं।

MLC का चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम उम्र 30 वर्ष होनी चाहिए।

MLA और MLC के कार्यकाल में क्या अंतर है?

विधानसभा और विधान परिषद के कार्यकाल में भी महत्वपूर्ण अंतर है।

विधायक (MLA):

  • विधानसभा का सामान्य कार्यकाल पांच साल होता है।
  • विधानसभा को संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार पहले भी भंग किया जा सकता है।
  • विधानसभा भंग होने पर नई विधानसभा के गठन के लिए चुनाव कराया जाता है।

विधान पार्षद (MLC):

  • विधान परिषद एक स्थायी सदन है और इसे भंग नहीं किया जाता।
  • विधान पार्षद का सामान्य कार्यकाल छह साल होता है।
  • प्रत्येक दो साल में लगभग एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं और उनकी जगह नए सदस्य आते हैं।

इस व्यवस्था से विधान परिषद में निरंतरता बनी रहती है, जबकि विधानसभा का गठन चुनाव के बाद नए सिरे से हो सकता है।

MLA और MLC की सैलरी कितनी होती है?

विधायक और विधान पार्षद के वेतन, भत्ते और अन्य सुविधाएं संबंधित राज्य के कानूनों तथा लागू नियमों के अनुसार निर्धारित होती हैं। इसलिए दोनों की सैलरी हर राज्य में एक जैसी हो, यह जरूरी नहीं है।

बिहार में दोनों पदों के वर्तमान वेतन और भत्तों की सटीक तुलना करने के लिए राज्य सरकार के लागू नियमों और नवीनतम अधिसूचनाओं को देखना आवश्यक है।

कानून बनाने में किसकी भूमिका ज्यादा महत्वपूर्ण है?

विधानसभा और विधान परिषद दोनों विधायी प्रक्रिया का हिस्सा हैं, लेकिन उनके अधिकार समान नहीं हैं।

विधानसभा को राज्य के वित्तीय मामलों और सरकार की जवाबदेही के संबंध में विशेष अधिकार प्राप्त हैं। विधान परिषद विधेयकों पर चर्चा कर सकती है, सुझाव दे सकती है और निर्धारित संवैधानिक सीमाओं के भीतर उनके पारित होने की प्रक्रिया में भाग लेती है।

धन विधेयक पर विधानसभा का फैसला अंतिम

राज्य का धन विधेयक केवल विधानसभा में पेश किया जा सकता है। विधान परिषद इसे अधिकतम 14 दिनों तक अपने पास रख सकती है और इस दौरान सुझावों के साथ विधानसभा को वापस भेज सकती है।

विधानसभा विधान परिषद के सुझावों को स्वीकार या अस्वीकार कर सकती है। यदि विधान परिषद 14 दिनों के भीतर विधेयक वापस नहीं भेजती, तो संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार उसे विधानसभा द्वारा पारित रूप में दोनों सदनों से पारित माना जाता है।

इसलिए धन विधेयक के मामले में विधानसभा की भूमिका निर्णायक होती है।

सरकार बनाने और गिराने में कौन निभाता है भूमिका?

राज्य की मंत्रिपरिषद विधानसभा के प्रति सामूहिक रूप से जवाबदेह होती है। विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव पारित होने पर सरकार को पद छोड़ना पड़ सकता है।

विधान परिषद में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए सरकार को हटाने का अधिकार नहीं है। हालांकि, विधान पार्षद प्रश्न पूछकर, बहस में भाग लेकर और विधायी कार्यवाही के जरिए सरकार की नीतियों तथा फैसलों पर चर्चा कर सकते हैं।

इस प्रकार, सरकार के बहुमत और उसके बने रहने के मामले में विधानसभा की भूमिका अधिक प्रत्यक्ष होती है।

राष्ट्रपति और राज्यसभा चुनाव में कौन वोट देता है?

राष्ट्रपति चुनाव में संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य और राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य भाग लेते हैं। विधान परिषद के सदस्य राष्ट्रपति चुनाव में मतदान नहीं करते।

इसी तरह, राज्यसभा चुनाव में राज्य विधानसभा के निर्वाचित सदस्य मतदान करते हैं। विधान परिषद के सदस्य राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं डालते।

MLA और MLC में मुख्य अंतर एक नजर में

आधारMLA यानी विधायकMLC यानी विधान पार्षद
सदनविधानसभाविधान परिषद
चुनाव का तरीकासंबंधित क्षेत्र के मतदाता सीधे चुनते हैंस्थानीय निकाय, स्नातक, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र, विधायक या राज्यपाल द्वारा नामांकन
चुनाव लड़ने की न्यूनतम उम्र25 वर्ष30 वर्ष
सामान्य कार्यकालपांच सालछह साल
सदन की प्रकृतिभंग हो सकती हैस्थायी सदन
सरकार के प्रति जवाबदेहीसरकार विधानसभा के प्रति सामूहिक रूप से जवाबदेहसरकार को अविश्वास प्रस्ताव से हटाने का अधिकार नहीं
धन विधेयकविशेष और निर्णायक भूमिकासुझाव दे सकती है, लेकिन अंतिम निर्णय विधानसभा का
राज्यसभा चुनावनिर्वाचित विधायक मतदान करते हैंमतदान नहीं करते

निष्कर्ष

MLA और MLC दोनों राज्य की कानून बनाने वाली व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन उनके चुनाव और अधिकारों में अंतर है। विधायक सीधे जनता द्वारा चुना जाता है और विधानसभा के जरिए सरकार के गठन तथा जवाबदेही में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वहीं, विधान पार्षद अलग-अलग निर्वाचन समूहों या राज्यपाल के नामांकन के जरिए विधान परिषद में पहुंचता है। विधान परिषद कानूनों पर विचार-विमर्श और समीक्षा में योगदान देती है, लेकिन कुछ संवैधानिक मामलों में उसके अधिकार सीमित हैं।

BHARATSUPERFASTNEWS

Read more

Local News