Thursday, October 22, 2026

झारखंड के स्कूली बच्चों को दीपावली तक मिलेगी पोशाक की राशि? पांच महीने से इंतजार, शिक्षा विभाग ने बताया लक्ष्य.

Share

रांची, 22 अक्टूबर 2026: झारखंड के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों विद्यार्थियों को शैक्षणिक सत्र 2026-27 शुरू होने के करीब पांच महीने बाद भी पोशाक, स्वेटर और जूता-मोजा के लिए मिलने वाली सहायता राशि का इंतजार है। दुर्गा पूजा के बाद अब दीपावली और छठ का त्योहार नजदीक है, ऐसे में बच्चों और अभिभावकों को उम्मीद है कि जल्द ही सरकारी सहायता मिल जाएगी।

झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के निदेशक शशि रंजन के अनुसार, केंद्र से राशि आवंटित हो चुकी है और विद्यार्थियों तक इसका लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया तेज की गई है। उन्होंने बताया कि दीपावली के अंत तक सभी पात्र बच्चों के बैंक खातों में राशि भेजने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, राज्य के अलग-अलग जिलों में वितरण की स्थिति एक जैसी नहीं है।

केंद्र से राशि आवंटित, भुगतान की प्रक्रिया तेज

झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के निदेशक शशि रंजन ने बताया कि केंद्र से राशि मिलने के बाद पोशाक और गर्म कपड़ों के लिए सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। कई जिलों के विद्यालयों में बच्चों को लाभ मिलना शुरू हो गया है, जबकि कुछ स्थानों पर वितरण की प्रक्रिया अभी जारी है।

विभाग के सामने अब यह सुनिश्चित करने की चुनौती है कि सभी पात्र विद्यार्थियों तक समय पर सहायता पहुंच सके। दीपावली तक भुगतान पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन कितने बच्चों को राशि मिल चुकी है और कितने का भुगतान लंबित है, इसका विस्तृत जिलावार आंकड़ा उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।

कक्षा के अनुसार निर्धारित है सहायता राशि

समग्र शिक्षा के तहत सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को पोशाक, स्वेटर और जूता-मोजा उपलब्ध कराने के लिए कक्षा के अनुसार अलग-अलग राशि निर्धारित की गई है।

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक:

  • कक्षा 1 से 5 तक: प्रति विद्यार्थी 600 रुपये।
  • कक्षा 6 से 8 तक: 700 से 760 रुपये तक।
  • कक्षा 9 से 12 तक: निर्धारित सामग्री के लिए 1,200 रुपये।

कक्षा 1 से 5 तक की राशि में दो सेट पोशाक के लिए 350 रुपये, स्वेटर के लिए 150 रुपये और जूता-मोजा के लिए 100 रुपये शामिल हैं।

हालांकि, अलग-अलग कक्षाओं में सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया और माध्यम में अंतर हो सकता है। इसलिए सभी विद्यार्थियों तक राशि या सामग्री पहुंचने की स्थिति अलग-अलग बनी हुई है।

कहीं खाते में राशि, तो कहीं पोशाक का इंतजार

राज्य के कुछ विद्यालयों में विद्यार्थियों को सहायता मिल चुकी है, जबकि कई जगहों पर बच्चे अब भी पोशाक और गर्म कपड़ों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। सहायता उपलब्ध कराने के लिए पात्र विद्यार्थियों की जानकारी, बैंक खाते और भुगतान से संबंधित विवरण का सत्यापन भी जरूरी है।

कक्षा 1 और 2 के जिन छोटे बच्चों के बैंक खाते नहीं हैं, उनके लिए स्कूल प्रबंधन समिति या स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से पोशाक, स्वेटर और जूता-मोजा खरीदकर वितरित करने की व्यवस्था की जाती है।

अन्य पात्र विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी DBT के माध्यम से राशि भेजी जाती है या निर्धारित प्रक्रिया के तहत सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। बैंक खाते या विद्यार्थियों के विवरण में गड़बड़ी होने पर भुगतान में देरी हो सकती है।

ठंड से पहले स्वेटर और जूता-मोजा मिलना जरूरी

सर्दियों का मौसम नजदीक आने के कारण विद्यार्थियों को गर्म कपड़े उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण हो गया है। केवल खाते में राशि भेजना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि बच्चों को समय पर पोशाक, स्वेटर और जूता-मोजा मिल सके।

कुछ जिलों में स्वयं सहायता समूहों और जेम पोर्टल के माध्यम से खरीद प्रक्रिया अपनाई जा रही है। ऐसे में खरीद और वितरण की प्रक्रिया समय पर पूरी होना जरूरी है, ताकि ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर बच्चों की जरूरी सामग्री खरीदने का अतिरिक्त बोझ न पड़े।

दीपावली तक भुगतान पूरा करने का लक्ष्य

झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने दीपावली के अंत तक सभी पात्र बच्चों के खातों में सहायता राशि भेजने का लक्ष्य रखा है। अब इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए लंबित भुगतान, बैंक खातों के सत्यापन और सामग्री वितरण से जुड़ी प्रक्रियाओं में तेजी लाने की जरूरत होगी।

अभिभावकों की नजर अब विभाग की अगली कार्रवाई पर है। सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या सभी पात्र विद्यार्थियों तक दीपावली तक सहायता पहुंच पाएगी और ठंड बढ़ने से पहले उन्हें जरूरी पोशाक तथा गर्म कपड़े मिल सकेंगे।

BHARATSUPERFASTNEWS

Read more

Local News