धनबाद: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माता स्वर्गीय रूपी सोरेन के दशकर्म के अवसर पर धनबाद के झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बराकर नदी घाट पर पारंपरिक रस्में निभाईं। पार्टी के जिलाध्यक्ष लखी सोरेन के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने घाट पर मुंडन कराया और दिवंगत आत्मा की शांति एवं सद्गति के लिए प्रार्थना की।
यह अनुष्ठान आदिवासी परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न कराया गया। इस दौरान झामुमो कार्यकर्ताओं ने स्वर्गीय रूपी सोरेन के प्रति अपनी श्रद्धा और भावनात्मक जुड़ाव व्यक्त किया।
आदिवासी परंपरा के अनुसार निभाई गईं रस्में
दशकर्म के अवसर पर झामुमो नेता और कार्यकर्ता बराकर नदी घाट पहुंचे। यहां पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार मुंडन सहित अन्य धार्मिक रस्में निभाई गईं। कार्यकर्ताओं ने दिवंगत रूपी सोरेन की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
इस आयोजन में आदिवासी परंपराओं के प्रति सम्मान और दिवंगत के प्रति श्रद्धा का भाव देखने को मिला।
लखी सोरेन ने बताया रूपी सोरेन से अपना संबंध
झामुमो जिलाध्यक्ष लखी सोरेन ने कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन को वह अपना धर्मपिता मानते हैं। इसी कारण स्वर्गीय रूपी सोरेन उनके लिए धर्ममाता के समान थीं।
उन्होंने बताया कि रूपी सोरेन के निधन के दस दिन पूरे होने पर आदिवासी रीति-रिवाजों के अनुसार दशकर्म की रस्में निभाई गईं। इस अनुष्ठान के माध्यम से पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनके प्रति अपनी श्रद्धा और भावनात्मक संबंध प्रकट किया।
दिवंगत रूपी सोरेन को दी श्रद्धांजलि
बराकर नदी घाट पर आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में झामुमो नेताओं और कार्यकर्ताओं ने स्वर्गीय रूपी सोरेन को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के दौरान उनकी आत्मा की शांति और सद्गति की कामना की गई।
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