रांची: झारखंड की राजधानी स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में मेडिकल की उच्च स्तरीय पढ़ाई के अवसर बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। संस्थान में सुपर स्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों की 44 अतिरिक्त सीटें शुरू करने का प्रस्ताव है। इसके लिए छह विशेषज्ञता वाले विभाग स्थापित किए जाने हैं। हालांकि, विभागों की स्थापना और आगे की प्रक्रिया कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद ही शुरू होगी।
प्रस्तावित विस्तार से मेडिकल शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को विशेषज्ञता के नए अवसर मिल सकते हैं। साथ ही, संबंधित विभाग शुरू होने पर गंभीर और जटिल बीमारियों के इलाज की सुविधाओं को मजबूत करने की संभावनाएं भी बनेंगी।
रिम्स में किन छह विशेषज्ञता वाले विभागों की तैयारी?
प्रस्ताव के तहत रिम्स में छह नए विभाग स्थापित करने की योजना है। इनमें शामिल हैं:
- गैस्ट्रोएंटरोलॉजी: पेट और पाचन तंत्र से जुड़ी बीमारियों का विशेषज्ञ उपचार।
- एंडोक्रिनोलॉजी: हार्मोन और अंतःस्रावी ग्रंथियों से संबंधित रोगों का अध्ययन एवं इलाज।
- क्लिनिकल हेमेटोलॉजी: रक्त से जुड़ी बीमारियों का विशेषज्ञ उपचार।
- रूमेटोलॉजी: जोड़ों, मांसपेशियों और प्रतिरक्षा तंत्र से जुड़ी बीमारियों का इलाज।
- न्यूरो एनेस्थीसिया: मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र से संबंधित जटिल प्रक्रियाओं में एनेस्थीसिया की विशेषज्ञ सेवाएं।
- कार्डियक एनेस्थीसिया: हृदय संबंधी सर्जरी और प्रक्रियाओं के दौरान एनेस्थीसिया की विशेषज्ञ सेवाएं।
इन विभागों की स्थापना से रिम्स में सुपर स्पेशियलिटी शिक्षा का दायरा बढ़ाने की योजना है।
44 अतिरिक्त सीटों में MD, DM और MCh पाठ्यक्रम शामिल
रिपोर्ट के मुताबिक, रिम्स में प्रस्तावित 44 अतिरिक्त सीटों में एमडी, डीएम और एमसीएच स्तर के पाठ्यक्रम शामिल होंगे। इन पाठ्यक्रमों के माध्यम से मेडिकल विद्यार्थियों को अलग-अलग विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में उच्च स्तरीय प्रशिक्षण मिल सकता है।
हालांकि, प्रत्येक विभाग में कितनी सीटें होंगी और किन पाठ्यक्रमों को किस सत्र से शुरू किया जाएगा, इसका विस्तृत विवरण अभी सामने नहीं आया है। अंतिम सीट संख्या और पाठ्यक्रमों की उपलब्धता संबंधित स्वीकृतियों पर निर्भर करेगी।
नए विभागों के लिए 30 फैकल्टी डॉक्टरों की जरूरत
छह नए विभागों को संचालित करने के लिए करीब 30 फैकल्टी डॉक्टरों की आवश्यकता बताई गई है। प्रस्ताव के अनुसार, इन पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया विभागों की स्थापना को मंजूरी मिलने के बाद आगे बढ़ेगी।
विशेषज्ञ शिक्षकों की उपलब्धता मेडिकल शिक्षा के लिए अहम होती है। पर्याप्त फैकल्टी मिलने से विद्यार्थियों को प्रशिक्षण और संबंधित विशेषज्ञता में अध्ययन का अवसर उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद आगे बढ़ेगा प्रस्ताव
नए विभागों की स्थापना का प्रस्ताव स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष भेजा जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद ही विभाग स्थापित करने और फैकल्टी डॉक्टरों की नियुक्ति से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
इसलिए फिलहाल 44 अतिरिक्त सीटों को प्रस्तावित विस्तार के रूप में देखना चाहिए। कैबिनेट की स्वीकृति, नियुक्तियों और संबंधित शैक्षणिक नियामक संस्थाओं की आवश्यक मंजूरी के बाद ही इन सीटों के शुरू होने की स्थिति स्पष्ट होगी।
मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मिल सकता है लाभ
रिम्स में सुपर स्पेशियलिटी विभागों का विस्तार होने से झारखंड में उच्च स्तरीय मेडिकल शिक्षा के अवसर बढ़ सकते हैं। इसके साथ ही, संबंधित विशेषज्ञताओं में इलाज की सुविधाओं को विकसित करने की संभावना भी है।
हालांकि, नए विभागों का वास्तविक लाभ उनकी स्थापना, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता, जरूरी उपकरणों और उपचार सुविधाओं पर निर्भर करेगा। फिलहाल प्रस्ताव को मंजूरी मिलने और उसके क्रियान्वयन की प्रक्रिया पर नजर रहेगी।
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